खेमकरण ‘सोमन’ की कविताएँ

खेमकरण सोमन
तीन हजार नौ सौ निन्यानवे

फोन पर उसने 
अपने दोस्तों को बताया कि
आज ही खरीदी है उसने
तीन हजार नौ सौ निन्यानवे रूपये की जींस

जिन्हें फ़ोन पर बता न सका
उन्हें बताता रहा मिल-जुलकर
भेजता रहा वाट्सअप -इन्स्टाग्राम पर तस्वीरें
और सुनता -पढ़ता रहा प्रशंसात्मक शब्द
जैसे वाओ, नाइस, गुड, औसम, झकास

पर यह क्या,
तीन हजार नौ सौ निन्यानवे रूपये की जींस 
चल ना सकी निन्यानवे दिन भी!

प्रथम विश्व युद्ध 
द्वितीय विश्व युद्ध, ऐतिहासिक नरसंहार या
भारत विभाजन की घटनाओं को पढ़-सुनकर भी
इतना भारी दुख नहीं पहुँचा था उसे-
जितना भारी दुख पहुँचा था-
तीन हजार नौ सौ निन्यानवे रूपये की जींस के 
फट जाने पर

पछतावे की आँधी 
बार-बार उसे उड़ा ले जा रही थी कि 
काश, न वह जींस पहनता
न दौड़ लगाता, 
न जींस फटती कई जगह से

दो-तीन सप्ताह बीत जाने पर भी 
वह निकल न पाया जींस की याद
और उसकी महक से 

कई बार महंगी या बेकार वस्तुओं की
पोल खुल जाने के बाद भी
वे चढ़ी रहती हैं सिर-जुबान, नाक 
और आँखों पर-
बहुत बुरी तरह।
***


इस परिभाषा के रंग से

ये हो गए हैं अब बूढ़े
बूढ़ा हो गया है इनका शरीर
बूढ़े हो गए हैं इनके विचार
बूढ़ी हो गई है इनकी दिनचर्या
बूढ़ा हो गया है इनका जीवनानुभव
अब ये नहीं हैं किसी काम के
इन्हें निकाल दिया जाए
सीने का बोझ या
सिर का भार समझकर घर से 
ताकि घर रहे स्वस्थ और 
इनकी किच-किच की आदत से दूर

इस परिभाषा के रंग से
अपना घर- मकान और आँगन रंगने वाले 
लोगों की कतार में 
कहीं तुम भी तो नहीं?
***


वह लड़की है मेरे लिए

वह दिख जाती है कॉलेज में
पुस्तकालय-वाचनालय में
बाजार में
मेले में
बस स्टेशन पर

नहीं पता कि हम 
एक-दूसरे को कब दिख गए
धीरे-धीरे मुस्कुराना... सीख गए

मुस्कुराने के इसी पुल पर खड़े होकर हम
‘हाय-हैलो’ ‘कैसी हो’ ‘कैसे हो’ 
‘कैसी चल रही है आपकी पढ़ाई -लिखाई’का 
कर लेते हैं आदान-प्रदान 
पर मैं थोड़ा भी नहीं जानता 
वह कौन है
कहाँ से आती-जाती है

अभी-
वह लड़की है मेरे लिए
बिलकुल, नींद की तरह।
***


No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।