कहानी: सितारे

ऋतिक कैस्टेलिनो
- ऋतिक कैस्टेलिनो

कैलिफोर्निया में जन्म। ड्यूक विश्वविद्यालय, अमेरिका में छात्र। तीसरा साल ड्यूक में और दूसरा साल हिन्दी कक्षा में। केमिस्ट्री और हिन्दी की पढ़ाई। संगीत और टाइकोंडो का शौक!


सुबह जग रही थी। सूरज उग चुका था और फिर एक के बाद एक अंधेरा धीरे धीरे छँट रहा था। मैं खिड़की से सड़क को देख रहा था। व्यस्त लोग इधर-उधर बहुत काम के साथ भागे जा रहे थे। कुछ लोग फोन पर बात कर रहे थे। कुछ हाथों में नाश्ता ले जा रहे थे। गाड़ी भी, बार बार जोरदार आवाज में पों-पों चिल्ला रही थी। यह सब देखकर मेरा पेट गुड़गुड़ाने लगा। मुझे भी नाश्ता चाहिए था। 

मैं अपने बारे में बता दूँ कि मैं विश्वविद्यालय का छात्र हूँ और मैं बॉस्टन में सिर्फ गर्मी में रहूँगा। मैं अमीर नहीं हूँ और प्रतिभावान तो बिल्कुल भी नहीं। लेकिन मैं मेहनती हूँ। मेरे बाल बहुत गहरे काले और अक्सर गंदे रहते हैं। मैं औसत लंबा हूँ। मेरी आँखें भूरी  हैं। हाँ, मेरा रंगरूप बहुत आम  है। मैं बॉस्टन में हूँ क्योंकि मेरी इंटर्नशिप एक कंसलटिंग  कंपनी के साथ है। काम बहुत उबाऊ है। मुझे बहुत लिखना होता है। लेकिन, मुझे अपनी इंटर्नशिप गरमी के छुट्टियों के दौरान करनी ही थी, इसलिए यह काम कर रहा हूँ। 

अक्सर, मेरे पास बहुत काम करने के लिए होते है, लेकिन आज, पहली बार मेरे पास कुछ खास काम नहीं है। तो मैंने अपना मुँह पानी और उस्तरे से साफ किया। मैं बिस्तर बनाकर खिड़की खोलता हूँ। हवा मेरे कमरे में आती है और बासी हवा खिड़की से बाहर चली जाती है। एक साँस अंदर और एक साँस बाहर। अकेला होना बहुत मुश्किल बात है। लेकिन मैं सीख रहा हूँ। 

मैं मेट्रो से कैफे चला जाता हूँ। कैफै मॉडर्न और नया है। इस कैफे की ईंटों में इतिहास दिखता है। लेकिन आजकल जैसे सारी पुरानी इमारतें, पुरानी चीजें नयी चीजों के साथ साथ खड़ी होती हैं। मैं कैफे में पैदल जाकर खाली कुर्सी खोजता हूँ। कमरे में, पीछे, एक खाली कुर्सी दिखती है तो मैं उसके पास जाता हूँ। मैं बैठकर चारों तरफ देखता हूँ। अभी, दिन शुरू हुआ है तो कुछ लोग कैफे में हैं। लेकिन ज़्यादातर लोग अपने-अपने समूहों में साथ साथ बैठे हैं। शायद मैं ही एक अकेला हूँ। मैं  कॉफी खरीदता हूँ। 

मुझे चाय "लाते" पसंद है। हालांकि मुझे लगता है कि वह स्वाद सिर्फ, मुझे मेरे घर की याद दिलाता है। घर थोड़ा मुश्किल शब्द है। ज्यादातर, मुझे लोगों की याद आती है। मेरा परिवार, मेरे दोस्त, सब  परिचित अनुभव की याद मुझे आती है। बॉस्टन थोड़ा अनोखा है। वहाँ  बहुत नयी चीजें  करने के लिए हैं  — नया खाना, नयी दुकानें, नई  जगहें , नये लोग। तो हर दिन, मैं एक ही कैफै में  बैठता हूँ। तनाव के दिनों में भी।

"तुम्हारा  नाम क्या है?" मैं अपने आस-पास देखता हूँ। मेरे सामने, एक लड़की खड़ी थी। औसत लंबाई वाली उस लड़की के कपड़े बहुत आम थे, जींस और काली कमीज़। हम लगभग एक ही तरह के कपड़े पहने हुए थे।  मैं झटके से देखता हूँ।   "क्या?" अगर लोग हमें देखें तो उन्हे कोई खास बात नहीं लगेगी। हमारी ओर सिर्फ दो छात्र देख रहे थे। यह लड़की भी मेरे साथ काम करती है शायद, लगता है जैसे मैंने उसे पहले देखा है।  

मेरा दिल तेज से धड़कता है। मुझे घबराहट  हुई। मैं खड़ा होनेवाला था वह लड़की दुबारा बोली,  "तुम्हारा नाम क्या है?"

मैं शर्माकर बोला, "मेरा नाम आरव है" वह मेरे सामने बैठी और मैं खड़ा हो गया। 

"क्या हुआ?" उसने पूछा। 

मैंने बस यही कहा, "कुछ नहीं" फिर में दरवाजे की और जाने लगा। लेकिन, वह भी मेरे पीछे आने लगी। हम साथ साथ कैफै से बाहर निकले। मैं नहीं चाहता था कि वह लड़की मेरे साथ आए। लड़की आसपास देख रही थी। मैं दाईं ओर मुड़कर बहुत तेजी से दौड़ा।

"आप कहाँ जा रहे  हैं?"

बिना आवाज़ किए, मैं ज़्यादा तेज दौड़ने लगा  — "ज़्यादा तेज, और तेज", मैं ओल्ड स्टेट हाउस और कॉंग्रेस सड़क की ओर भागता हूँ। मैं साउथ मार्केट वाले सड़क पर दाईं ओर मुड़ता हूँ। अब तक, मुझे उसकी आवाज़ आ रही थी वह मेरे पीछे आ रही थी। 

मैं अपने पीछे देखता हूँ और लड़की भी बहुत तेज भाग रही थी। मैं क्वींसी मार्केट में जाता हूँ। बहुत शोर और गंध थी वहाँ। झींगा मछली रोटी, क्लैम चावडर, और इधर-उधर अनेक परिवार खाना साथ-साथ खा रहे थे। मैं एक छोटे से फूड स्टाल में जाकर छिप जाता  हूँ। मेरा पेट खाली था क्योंकि मेरा नाश्ता, कैफै की मेज पर रह गया था। 

मैं आस-पास देखकर मेनू देखता हूँ। 
"दो क्लैम चावडर्स, प्लीस"
एक कराह मेरे मुँह से निकल जाती है… मेरे सामने, वही लड़की खड़ी थी। 
"मेरा नाम रुद्र है। आप दौड़ क्यों रहे थे? क्या आपको मुझसे डर लग रहा है?" वह हँसकर पूछती है।  

मैं चुप था। मुझे क्यों डर लग रहा है?। मैं नीचे देखकर और क्लैम चावडर खाने लगा। जब मैंने ऊपर देखा, वह लड़की मुझे गहरी भूरी आँखों के साथ देख रही थी। मैं दुकानदार को पैसे देकर चला गया। लड़की चुप थी। 
क्वींसी मार्केट के बाहर, सबकुछ वैसा ही था जैसे सामान्यतः व्यस्त होता है। 

अगले दिन, सात बजे, मैंने अपनी दिनचर्या शुरू की। मैंने बाल और मुँह साफकिये। मैंने आईने में अपना मुँह देखा।  कोटरगत, भूरी आँखों ने भी मुझे देखा। समाचार में, एक आदमी मौसम के बारे में, बता रहा था। आज का मौसम थोड़ा खराब होगा। बारिश होगी। तो मैं जैकेट और बुटस पहनकर बाहर गया। ऊपर, बादल से भरा आसमान था और सारे पेड़ और फूल झूम रहे थे। हवा नम थी और घास ठंडी हवा से नाच रहे थे। लेकिन मैंने ध्यान नहीं दिया। दुनिया नीला-धूसर रंग रंगा था। एक ब्लॉक, दो ब्लॉक, तीन ब्लॉक, मैं पैदल जाता हूँ। मैं सोचता है कि जरूर बारिश आनेवाली है। मैं नीचे मेट्रोस्टेशन जाता हूँ।  ईयर फोन मेरे कानों में था और मैं गाना चलाकर बाहर की हर आवाज़ से मुक्त था। 

रेड लाइन केम्ब्रिज जाने के लिए आ पहुँची और मैं रेल गाड़ी में चढ़ जाता हूँ।

दफ्तर जाने का यह वक्त माँ से बात करने के लिए तय है। रेल गाड़ी लॉंगफ़ेलो ब्रिज पर पहुँचने पर फ़ोन सिग्नल गड़बड़ करता है। बार बार, फोन कटता है, फिर बजता है फिर एक परिचित आवाज सुनाई देती है, "बेटा !" और उसके साथ, मैं पिताजी की आवाज़ भी सुन सकता हूँ। 

"नमस्ते माँ, आप कैसी हैं?" मैंने जवाब दिया "क्या सब ठी..."

"ठीक है। ठीक है। और क्या खाया? क्या आज काफी खाना खाया है?"। जैसे अक्सर, मेरी माँ बोलती हैं।

"अभी, मैं मेट्रो में हूँ। मैं नाश्ता करने के लिए निकला हूँ। मैं नाश्ता दोस्तों के साथ करूँगा" मैंने माँ से झूठ बोला। 

मेरी माँ की चिंतित आवाज आई,  “ठीक है। लेकिन तुम्हारा काम सबसे जरूरी है। काम करो। " 

थोड़ी आह के साथ: "हँ" और बातचीत खत्म हुई। 

मेरे माँ-बाप भारत से हैं और अमेरिका 90's में आए। उस वक्त से, वे सिर्फ पेन्सिलवेनिया में रहे और वहीं मैं और मेरी छोटी बहन बड़े हुए। मेरे माँ-बाप बहुत परंपरागत हैं। "काम अच्छा करो, ज़्यादा दोस्त नहीं बनाओ, बहुत पढ़ो"। बार बार, वे एक ही सलाह देते आए हैं। उन्होंने मुझे बहुत काम करना सिखाया है।  

सिर्फ बीस मिनट दफ्तर से होकर, मैं मेट्रो से बेगल खरीदने जाता हूँ। आज दुकानदार बहुत खुश लगता है और वह चिल्लाया: "शुक्रिया! फिर मिलेंगे!" मैंने बेगल लिया और दुकान से चला गया। 

बारिश में, मेरा दफ्तर ज़्यादा सुंदर लगता है। इमारत क्रांति के दौरान बनी थी, यह लाल ईंट और पत्थर से बनाई गई। जैसे कैफे में इस इमारत में भी इतिहास दिख सकता है। लेकिन इमारत के अंदर, ज्यादातर व्यस्त लोग बहुत व्यस्त ज़िंदगी के साथ काम करते हैं। मैं काम करने के लिए इमारत में जाता हूँ। 

सारे दिन में, जब मैं मेज़ों पर काम करता हूँ और प्रिंटर के पास इंतज़ार करता हूँ और मैं सड़क पर दोपहर के खाने के लिए पैदल जाता हूँ, बार बार मैं सोचता हूँ कि "मैं क्यों दौड़ा था?"। मैं जवाब नहीं जानता हूँ। उसी वक्त, शायद मैंने एक लड़की को देखा और तुरंत, मैंने सिर नीचे कर लिया जैसे, प्रार्थना कर रहा था, या मैंने नहीं देखा। "क्यों मुझे डर लगता है?।

काम खत्म हुआ करके मैं दफ्तर से निकलकर बारिश में जाता हूँ। अभी रात है, और सड़क की बत्तियाँ जल चुकी थीं। मैं स्टेशन पैदल जाता हूँ। मेरे आसपास, बहुत लोग छाता लेकर जाते हैं। फुटपाथ के किनारे, बहुत से फव्वारे हैं। फव्वारे से एक अजनबी मुझे देख रहा था। मैं मेट्रो से अपने-मकान वापस जाता। मैं इयर-फोन पहनने जाता हूँ लेकिन मैं रुकता हूँ। मैं अपने कान खोलता हूँ। 

पहले, मुझे लगता है कि रेल गाड़ी खामोश है। लेकिन धीरे धीरे, थोड़ी आवाज़ें मुझे आईं: पहले रेल गाड़ी अपनी आवाज "चक, चक, चक" और फिर लोगों की आवाज आई। कुछ बातचीत की आवाजों आती हैं और कुछ अखबार भी सरसराते हैं। मैं खिड़की से बाहर देखता हूँ, तो बहुत से सितारे दिखते हैं। बॉस्टन की उस रेलगाड़ी में, उस रात को, मैं रोना शुरू करता हूँ। 

हफ्ता धीरे-धीरे बीतता है। हर दिन, एक ही दिनचर्या है लेकिन धीरे-धीरे नए अनुभव मेरी ज़िंदगी में जुड़ रहे हैं। मैं बेगलवाले को छोटी मुस्कान देता। मैं नयी चीजें भी देखता हूँ। लेकिन, मेरा बहुत काम करने के लिए बाकी है। ज्यादातर, मैं रात को देर तक काम करता हूँ और मेरी आँखों के नीचे काले गहरे बन जाते है। मैंने फिर उस लड़की को नहीं देखा। 

अंत में, एक दिन मेरे पास कोई काम नहीं है। जैसे हर दिन, मैं दिनचर्या की चीजें शुरू करता हूँ। लेकिन आज अलग हैं। जरूर, मैं बहुत थका हूँ। लेकिन जैसे मैं दरवाजा पर खड़ा हूँ मुझे चिड़ियों की आवाज़ें आईं और मैं थोड़ा काम से थका था। मैं कैफे जाता हूँ। एथ ऐवन्यू पर खड़े होकर मैंने दुकान देखी। मैं  कैफे में प्रवेश करता हूँ और एक कॉफी खरीदता हूँ। मैं कॉफी पीकर इंतज़ार करता हूँ। 

कुछ देर के बाद, आवाज सुनाई दी, "हाय"। मैं ऊपर देखता हूँ, सामने वही लड़की रुद्र खड़ी थी। मेरा दिल धड़कने लगा। मेरी साँस ज़्यादा तेज थी। मैं अपनी आँखें बंद करता हूँ, लेकिन, मैं नहीं भागा। एक मिनट, दो मिनट, तीन मिनट हुआ। धीरे धीरे, मैं अपनी आँखें खोलता हूँ। और वह अभी भी अपनी मुस्कान के साथ मेरे सामने बैठी थी। 

"हाय!" और फिर, धीरे धीरे, हम बात करते हैं। 

अभी भी मुझे थोड़ा डर लग रहा है। कुछ वक्त, बातचीत के दौरान, मैं खिड़की से देखता हूँ। दस बजे, मौसम खूबसूरत हो गया था। बड़े सफेद बादल बरसने के लिए तरस रहे थे। और हवा हमें गुदगुदा रही थी। यह शहर जीवन से भरपूर है। 

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