काव्य: चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव

चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव
परिचय

चलो बचा लें
चलो बचा लें
स्वच्छ हवा थोड़ी-सी
थोड़ा-सा साफ़ पानी
और थोड़ी-सी धूप
कल के लिए
बचा लें हम
थोड़ी हँसी
थोड़ी मुस्कान
थोड़ी महक 
थोड़ी चहक
थोड़े सपने
और थोड़ी-सी उम्मीद
चलो बचा लें हम
थोड़ी आस्था, थोड़ा विश्वास
कुछ आक्रोश, कुछ सन्तोष
आओ बचा लें
थोड़े फूल
थोड़ी तितलियाँ
कुछ कबूतर कुछ दरख़्त
चलो बचा लें
पायल की रुनझुन
चूड़ियों की खनक
बिंदिया की चमक
चलो बचा लें
ढोल की ढम-ढम
आल्हा कजरी के स्वर
दादी-नानी के किस्से
तीज-त्योहार
जेवनार
संस्कार
और थोड़े मंगलाचार
चलो बचा लें हम
थोड़े से कबीर
थोड़े महावीर
कुछ अराफ़ात
कुछ मण्डेला
गांधी का चरखा
और उनके तीन बन्दर
बचा लें हम चलो
हीर को देवदास को
मीरा को रैदास को
इस क्रूर समय में
आओ बचा लें
थोड़ी धरती, थोड़ा आसमान
थोड़ा सच थोड़ा ईमान
थोड़ी-सी आदमीयत
कुछ कविताएँ
और कुछ शुभकामनाएँ 
बहुत कुछ शेष है अभी इस दुनिया में
बचाने के लिए
अपने बच्चों की ख़ातिर।
***


हँसी

हमें कब हँसना है
क्यों हँसना है
कहाँ किस तरह हँसना है
हम इसके अभ्यस्त हो गए हैं

हम हँसी तोलकर हँसते हैं
हँसी का मोल सोचकर हँसते हैं
हम जानते हैं 
हँसी और हँसी के बीच का फ़र्क

हँसाने वाली हँसी
रुलाने वाली हँसी 
रिझाने वाली हँसी
खिझाने वाली हँसी
डराने वाली हँसी
उठाने वाली हँसी
गिराने वाली हँसी
गिड़गिड़ाने वाली हँसी 
झेंप मिटाने वाली हँसी
मज़ाक उड़ाने वाली हँसी
सर्द हँसी गर्म हँसी
क्रूर हँसी नरम हँसी
खिसियानी हँसी
दबी दबी हँसी
ठहाकेदार हँसी
और भी कई तरह की हंसी 
जिन्हें हम कोई नाम नहीं देते

हम जानते हैं 
हँसी को होठों से चिपकाना
हँसी को आँखों मे थिरकाना
हँसी को ओढ़ना-बिछाना
हँसी को अस्त्र-शस्त्र की तरह इस्तेमाल करना
हँसी को कवच बनाना

हम हँसते हैं अनायास
बात, बिना बात
कोई फिसल कर गिरता है
तो हम पहले हँस देते हैं
उसे उठाते बाद में हैं
यदा कदा तो हम अपने आप पर भी हँसते हैं
सच पूछिए तो हम
प्रायः हँसते ही रहते हैं

पर कहाँ है हमारी हँसी
हम तो एक युग से नहीं हँसे।
***


तमाशबीन

जो तमाशबीन हैं 
बन जायेंगे कल वे भी तमाशे का हिस्सा 
क्रूर समय के इशारों पर 
उछलेंगे, कूदेंगे, नाचेंगे 
हँसेंगे, गायेंगे, रोयेंगे 
जमूरे की तरह 
लोग तालियाँ पीटेंगे, ठहाके लगायेंगे 
इस बात से बेखबर कि
उन्हें भी नचाएगा मदारी समय 
कल जमूरा बनाकर। 

समय की आँख में 
कैद हो चुकी है 
मज़मे में शामिल हर तमाशबीन की तस्वीर 
समय किसी को नहीं बख्शेगा।

इसलिए मेहरबान कदरदान 
हो जाओ होशियार
कल तुम्हारी बारी है।
***


परिचय: चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव (प्रकाश कायस्थ)
जन्म: सन् 1966, आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) 
शिक्षा: बी.एस-सी. के पश्चात सिविल अभियांत्रिकी में डिप्लोमा
जीविका: भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग (कैग) में सीनियर ऑडिट ऑफिसर
प्रकाशन: पत्रिकाओं तथा समाचार पत्रों में कविताएँ व लेख प्रकाशित। 

प्रसारण: आकाशवाणी तथा दूरदर्शन से कविताएँ प्रसारित।
संकलन: नौ कवियों के संकलन ‘दिशाविद’ में नौ कविताएँ संकलित।
अन्य: प्रतिमान पत्रिका के सम्पादन में बतौर सहयोगी काम किया। अमर उजाला के संपादकीय डेस्क पर कुछ दिन काम किया फिर स्वेच्छा से छोड़ दिया। 
पता: 208 गंगोत्री (हवेलिया) झूँसी, प्रयागराज - 211019
चलभाष: 9451372281, 8318532368 
ईमेल: samaysamvad2022@gmail.com

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