डिजिटल प्लेटफॉर्म और हमारी कला यात्रा

सिद्धेश्वर

डायरी: सिद्धेश्वर


यह सच है कि मैं बचपन में कविता, कहानी, लघुकथा के साथ चित्र भी नियमित बनाता रहा। मेरी यह भी आकांक्षा जरूर थी कि देश की तमाम पत्र-पत्रिकाओं में मेरी कलाकृतियाँ भी प्रकाशित हों। मेरी कविता, कहानी, लेख, लघुकथा आदि देश की प्रतिष्ठित रचनाकारों के साथ प्रकाशित हों, यह कल्पना किसे नहीं होती? मेरी सतत सृजनात्मक लेखन और अध्ययन मुझे वहाँ तक जरूर पहुँचाया, जहाँ प्रतिष्ठित रचनाकारों के साथ मेरी कविताएँ, लघुकथा और आलेख प्रकाशित होते रहे।

 मुझे यह भी पता था कि कला महाविद्यालय से प्रशिक्षण लेने के बाद मैं बहुत बड़ा कलाकार बन सकता हूँ! किंतु मेरी कमज़ोर दृष्टि के कारण मैं कला विद्यालय महाविद्यालय से प्रशिक्षण नहीं ले सका! किंतु अपने भीतर की कलात्मक रुचि को मैं मार न सका। और हमेशा पत्र पत्रिकाओं और चित्रकला प्रदर्शनी के माध्यम से रेखाचित्र और कलाकृतियों को देखकर, मैं लगातार रेखाचित्र और रंगीन कलाकृतियाँ बनाता रहा, लगभग 14 वर्ष की उम्र से ही। मुझे लगा शायद यह मेरी जन्मजात प्रतिभा हो। क्योंकि उसी समय से सुपर ब्लेज, हिंदुस्तान,नवभारत टाइम्स एवं तमाम कई पत्र-पत्रिकाओं में नियमित मेरे रेखाचित्र प्रकाशित होने लगे थे।

 मेरी यह भी प्रबल आकांक्षा थी कि मेरी कलाकृति भी हंस जैसी राष्ट्रीय पत्रिका के मुख्यपृष्ठ में प्रकाशित हो। लेकिन यह सिर्फ सपना था मेरा, मुझे अंदर से विश्वास कदापि न था, क्योंकि मैं जानता था कि प्रशिक्षित कलाकारों की कलाकृतियाँ ही बड़ी-बड़ी पत्रिकाओं के मुखपृष्ठ पर तथा पुस्तकों के मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित होती हैं। फिर भी मैं सतत प्रयत्नशील रहा। हर जगह कोशिश करता रहा। मेरी कलाकृतियाँ देशभर की पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही। मैंने अपनी तूलिका को कभी रोका नहीं। और बाल्य अवस्था में ही जब मेरी कलाकृति हिंदुस्तान टाइम्स की लोकप्रिय राष्ट्रीय बाल पत्रिका "नंदन" द्वारा आयोजित अखिल भारतीय चित्र प्रतियोगिता में दो बार प्रथम पुरस्कार से पुरस्कृत हुई, और उस लोकप्रिय पत्रिका नंदन में प्रकाशित भी हुई, तब मेरे भीतर की कला को पंख लग गए।

 मैं बहुत बड़ा कलाकार नहीं। साहित्यकार भी अदना सा हूँ। बस अपने भीतर की भावना को अभिव्यक्त करने का लगातार प्रयास करता रहा हूँ। यह हमारा सौभाग्य है कि देश की तमाम पत्र पत्रिकाओं में मेरी कविताएं, लघुकथाएँ, आलेख आदि नियमित प्रकाशित हो रहें हैं। लेकिन उससे अधिक खुशी तब हुई, जब देश के शीर्षस्थ कलाकारों बादल, संदीप राशिनकर, विज्ञान व्रत, अनुप्रिया, कौशलेश पांडे, शशि भूषण, आदि के साथ मेरे रेखाचित्र भी प्रकाशित होने लगें यहाँ तक कि दैनिक हिंदुस्तान पटना ने अपने साहित्य पेज पर पूरे 20 साल तक, मेरे श्वेत श्याम रेखा चित्र एवं रंगीन कलाकृतियों को, बिना ब्रेक दिए लगातार प्रकाशित करता रहा। इस प्रकार देश भर में, कम से कम 1000 से अधिक रचनाएँ जिसमें कहानी, कविता लघुकथा आदि शामिल थे, के साथ मेरी कलाकृतियाँ और रेखाचित्र प्रकाशित हुए। लगभग 20 वर्षों तक लगातार नई धारा में भी मेरे रेखाचित्र बिना ब्रेक दिए प्रकाशित होते रहे। और देश की मुख्यधारा की पत्र पत्रिकाओं में भी लगातार मेरे रेखाचित्र प्रकाशित होते रहे।

 फिर बस एक ही कल्पना रह गई थी मेरी रंगीन कलाकृति किसी राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका के मुखपृष्ठ पर और पुस्तकों के मुखपृष्ठ पर प्रकाशित हो। समय के साथ-साथ मैंने अपनी रंगीन कलाकृतियों को, डिजिटल बनाना शुरू किया। यानि रेखाचित्र और रंग सब मेरे, किंतु उसकी फिनिशिंग डिजिटल। यह अत्याधुनिक तकनीक मेरी कलाकृतियों के बड़े काम आए। जो भी साहित्यकार या पाठक ने इसे देखा उन्होंने स्वत: ही स्वीकार किया कि मेरी कलाकृतियाँ बेहद ही आकर्षक होती जा रहीं हैं।

 आधुनिक तकनीक के इस दौर में, बहुत आसानी से मेरी ये रंगीन आकृतियाँ देशभर की पत्र-पत्रिकाओं तक पहुँचने लगी। और पिछले 40 साल का मेरा सपना तब साकार हो गया, जब मेरी कलाकृति पहली बार देश की सर्वाधिक चर्चित राष्ट्रीय मासिक पत्रिका "हंस" के मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित हुई। वह भी एक बार नहीं दो दो बार। यहाँ तक कि इंदौर की सबसे पुरानी मासिक पत्रिका वीणा के मुखपृष्ठ पर भी मेरी कलाकृति प्रकाशित हुई। और तब मुझे लगा, देश का बहुत बड़ा कलाकार न होने के बावजूद भी मेरी कलाकृतियाँ, देश के बड़े कलाकारों के समकक्ष प्रकाशित होने लगी है। और देश भर में मेरी पहचान साहित्यकार से अधिक एक कलाकार के रूप में फैल गया है। इसे भी मैं अपना सौभाग्य मानता हूँ और देश के तमाम पाठकों दर्शकों और साहित्यकारों का स्नेह आशीर्वाद! वरना मुझसे भी बड़ी बड़ी प्रतिभाएँ इस देश में हैं, जिनकी सृजनात्मकता पूरी उम्र सामने नहीं आ पाती। या फिर यह सब महज संयोग होता है और अपनी किस्मत।

 इसके साथ ही साथ लगातार लगन परिश्रम और अपने भीतर का जुनून बहुत काम आया। बगैर लाभ की प्राप्ति की कल्पना किए, लगातार प्रयास करना मेरी प्रकृति बनी रही। हो सकता है इसका ही परिणाम हो, अपनी मंजिल के इस मुकाम तक पहुँचने का। देशभर में अनेक कला प्रदर्शनियाँ आयोजित की जा रही है। मेरे कई प्रशंसक चाहते हैं कि मेरी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगे। लेकिन न तो मेरे पास कोई ऐसा संसाधन है, न ही इतनी धनराशि, और न ही कोई प्रायोजक। जो कुछ भी है बस सब कुछ व्यक्तिगत संसाधन और प्रयास। इसलिए मेरे मस्तिष्क में यह आया कि, जब पत्र पत्रिकाओं के पाठक भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भाग रहे हैं, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कलाकृतियों या रेखा चित्रों की प्रदर्शनी क्यों नहीं लगाई जा सकती? और मैंने अपने लिए जब भी कुछ सोचा, उसके साथ साथ अपने संग साथियों एवं समाज की प्रतिभाओं के बारे में भी लगातार सोचता रहा।बस ऐसा मेरा सोचना था और मैंने इसे कार्य रूप दिया यानि साकार रूप दिया। शायद यही कारण है कि देश भर के एक दर्जन से अधिक कलाकारों को हमने इस प्लेटफार्म पर खड़ा किया। और कई नामी-बेनामी कलाकारों को आम पाठकों तक रूबरू कराने का प्रयास भी किया।

 इस क्रम में ही, इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर, मेरी कला प्रदर्शनी, इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर, दूसरी बार आयोजित है। इससे कोई हमें आर्थिक लाभ तो प्राप्त नहीं हो रहा किंतु हमारे भीतर का जो उद्देश्य था वह पूरा होता दिख रहा है। क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी में स्थानीय लोग ही भाग ले पाते हैं और देख पाते हैं। हम अपनी कलाओं से स्थानीय दर्शकों को ही रूबरू कराते हैं। देश भर के कला समीक्षक, कलाकार, साहित्यकारों के अतिरिक्त कई आम पाठक (दर्शक) भी हमारी कलाकृतियों और रेखाचित्रों को काफी पसंद कर रहे हैं और उनके प्रशंसा भरे पत्र (संदेश) हमें लगातार मिल रहे हैं। इससे बड़ा सम्मान और पुरस्कार भी कुछ और और हो सकता है क्या?

 किंतु आधुनिक दौर में डिजिटल प्लेटफॉर्म दूर-दूर तक अपने सृजन को पहुँचाने का सशक्त माध्यम साबित हुआ है। और इस कारण ही सोशल मीडिया पर के प्लेटफार्म पर प्रस्तुत किया गया हमारी चित्रकला प्रदर्शनी भी देशभर के दर्शकों, पाठकों, साहित्यकारों और आम लोगों तक आसानी से पहुँच जा रही है। शायद इसलिए मेरी कलाकृतियों को देखने वाले अधिक संख्या में मिल रहे हैं। और हमारे व्हाट्सएप पर की कला यात्रा पेज, फेसबुक पर सिद्धेश्वर आर्ट वर्ल्ड अपनी अलग पहचान बना पाने में पूर्णत: सफल रहे, तो यह भी आप लोगों का स्नेह, आत्मीयता और शुभकामनाओं की देन है। आप सभी के प्रति हार्दिक आभार। आपका स्नेह आत्मीयता और आशीर्वाद इसी प्रकार हमें मिलती रहेगी इसका पूरा विश्वास है।
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सम्पर्क: "सिद्धेश् सदन", अवसर प्रकाशन, (किड्स कार्मल स्कूल के बाएँ) 
पोस्ट: बीएससी, द्वारिकापुरी रोड नंबर 2, हनुमाननगर, कंकड़बाग, पटना 800026 (बिहार)
चलभाष:92347 60365 
ईमेल:sidheshwarpoet.art@gmail.com

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