कविताएँ

डॉ. कन्हैया त्रिपाठी

- कन्हैया त्रिपाठी

लेखक भारत गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति जी के विशेष कार्य अधिकारी का दायित्व निभा चुके हैं एवं सेतु संपादन मंडल के सम्मानित सदस्य हैं। आप अहिंसा आयोग के समर्थक एवं अहिंसक सभ्यता के पैरोकार भी हैं।

मुस्कराने की क्लास

मुँह, गाल और आँख की त्योरियाँ
सिकुड़ रही हैं
सिकुड़ रहीं हैं हमारे जीवन की मुस्कराहटें।

शायद मुस्कराहटें इतनी सस्ती भी नहीं
जो किलकारियों से आ जाती थीं
सीटियों पर फूट पड़ती थीं
डिप्रेशन से भरी कौमें,
नहीं जी सकतीं मुस्कुराहटें

कैसे मुस्कराएँ?
कब मुस्कराएँ?
क्यों मुस्कराएँ?
कैसा हो मुस्कराने का सलीका?
खोज में है आदमी
क्या मुस्कराना आदमी के लिए
इतना कठिन हो गया है?
टीवी के हास्य सीरियल
कॉमेडी शो, या नौटंकी
जोकर के जुमलों या
बेवड़ों की गपशप फीके पड़ गए अब
आर्टिफिसियल हैपीनेस से
कहाँ आती हैं मुस्कराहटें

राजनीतिज्ञों के झूठ से,
पेड़ों की ठूँठ से नहीं मिलते छाँव
सखियों सहेलियों, दादी-दादा
चौपालों से खाली होते गाँव
नहीं देते अपना होने का एहसास

बृद्धाश्रम या नारी निकेतन में
अपनों से निकाले
निराश बूढ़े बापू और बूढ़ी माँएँ
कामकाजी स्मार्ट मम्मी-डैडी से
अकेले पड़े बच्चों को नहीं मिलती सदायें
फिर कैसे होंगी होठों पर मुस्कान
सच यही है
पैसों और दया में बसर कर रहीं
जिंदगियों में नहीं दीखता अपना खास
लोग जीने को मजबूर हैं बस अपनी साँस

मुस्कराने पर लगती क्लासेज़
खा गई हैं अब असल आदमी
मुस्कराहटें शायद
अपने खोने पर कर रहीं हैं मृत्युशोक
आदमी, आदमी नहीं बन गया है धोखा
सोचो क्या जमाना आ गया है
मुस्कराना इतना कठिन हो गया है
मुस्कराहटों की क्लासेस
आर्टिफिशियल हँसी
अब हँसने का ठिकाना हो गया है।
***


पानी वाले

युद्ध के लिए
निकला योद्धा
पानी में डूबा गोताखोर
अपनी चिंता नहीं करता
चिंता करता अगर तो
वह सबका पसंदीदा नहीं होता

कब्रों में पड़े
सही सलामत कंकाल
जिंदगी के जंजाल से
आदमी खुश नहीं होता
खुश होता है अगर तो
वह आदमी नहीं होता

जिंदगी में जोखिम
हिम्मत दिखने वाला आदमी
जी लेता है एक बार में
दस-बीस जिंदगानियाँ

अपनी बात से पलटने वाला
बेशर्म, बेहया, कुटिल
धोखेबाज आदमी
मरता है बार-बार, वह नहीं जीता।
***

वक्त बौना कर देता है

सेक्रेट्री, डॉक्टर, पायलट बनीं सुपरवुमन
गाँव देहात की फ्रेम में फिट नहीं होतीं
उनकी निगाहों में
असीमित क्षमता वाली गाँव की औरतें
सुपरवुमन नहीं होतीं।

उनका सहज और देहातीपन
उनके भीतर की निश्छलता
उनके सीमित सपने और गृहस्थी
उन्हें नहीं बनने देते सुपरवुमन।

सुपरवुमन अब अपने लंबे पैर,
ततैया जैसी पतली कमर,
सुडौल और सुगठित शरीर से
पूंजीवादी दुनिया में प्रदर्शन करतीं
फैशन से अपने मुह लीप लेतीं
नेचुरल ब्यूटी को नकारती नहीं थकतीं
लेकिन सुपरवुमन
अब अपने आउटडेटेड होने
अपने नकारे जाने पर चिंता में हैं।

अब तो रूथ हैंडलर की बनाई गई डॉल
दुनिया में
सबसे ज्यादा बिकने वाली डॉल
शरारत भरे लहजे में
सफेद फ्रेम में
कैट आई वाले धूप के चश्मे में रिझा रही हैं
स्वघोषित आत्मविश्वासी, आकर्षक
और लंबी, मोहक अंदाज़ में चलने वाली
सुपरवुमन को खिझा रही हैं

देहाती औरतों ने कुछ नहीं कहा
पर निर्मोही खिलंदड़ा वक्त
उड़ते आसमान के सितारों को भी छोड़ता नहीं
यह वक्त है, वक़्त बौना कर देता है।
***


जरा बचके रहना!

रोबोट हँसने लगे हैं
रोबोट को पसीना भी आने लगा है
साँसें भी ले रहे हैं रोबोट
एआई या ये रोबोट
रोकेंगे तुम्हारा स्वत्व

मनीषियों ने कहा-
तकनीक ठीक नहीं है
सभ्यता के नए प्रतिमान
गढ़ती कृत्रिम न्याय,
स्वांग रचती
एआई कर रही है पीछा
जरा बचके रहना!
***

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