दीपक: कविताओं के पंचदीप (आशीष मोहन)

आशीष मोहन
1.
नन्हे दीपक की
ताकत का बयाँ
नीचे दुबके
अंधेरे से पूछो

दीपक के नन्हे पंजों में
दुबका पड़ा है बेचारा!


2.
हवाओं से घृणा
दीपक से प्रेम है मुझे

बेशक हवाएँ ताकत 
का पर्याय
दीपक मानो नन्हा सा 
बालक

हवाओं में धुंध है 
ताकत है
बुराई है...

दीपक के पास 
ज्योति है
प्रकाश है

हवाओं में विनाश
दीपक सृजन का साथी

मैं सृजन के साथ हूँ!


3.
दीप के जैसे जलना है तो
बाती के संग चलना होगा

तानाशाहों की जिद है कि
वे जो चाहें करना होगा

उमर कहाँ लंबी 
होती तानाशाही की
कदम नहीं मिल पाए 
तो समझो मारना होगा

वे कहते हैं दीपक को सरकार
तो कहने दो न
दीपक में भी अपना हिस्सा है
दीपक बाती तेल का अपना किस्सा है

तेल है जनता
बाती शासन
उसकी ज्योति उसका सुशासन

चाहो दीपक रहे दीप्तिमय
हमें तेल सा जलना होगा!


4.
एक अकेला दीपक नहीं हकदार
सारे के सारे प्रकाश का

वह कुम्हार भी हकदार है
जिसने इस दीपक को बनाया

उस किसान का भी हिस्सा है
जिसने उगाया कपास जिससे बाती बनी दीपक की

वह तेली जिसने निकाला होगा तेल
कि जल सके दीपक



5.
दीपक का मन 
बाती का तन
तेल का जलता धन

तब हटता है घोर अंधेरा
होता प्रकाशमय जन!
***


परिचय: आशीष मोहन
आरक्षक मध्य प्रदेश पुलिस
जन्मतिथि  26 मई
शिक्षा - एमए (इंग्लिश), पीजीडीसीए

समाचार पत्र, साहित्यिक पत्रिकाओं व साझा संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित। आकाशवाणी छिंदवाड़ा से कविताओं का प्रसारण। पंजाबी, अंग्रेजी व उड़िया आदि भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद। आंचलिक साहित्यकार परिषद छिंदवाड़ा, साहित्य की बात विदिशा, किस्सा कोताह, सृजन पक्ष जैसे अनेक साहित्यिक समूहों से संबद्ध। 2021 से लगातार साहित्यिक पोस्टर सृजन में रत।
पुरस्कार: अक्षत सम्मान (आंचलिक साहित्यकार परिषद छिंदवाड़ा) तथा 'साहित्य की बात' कविता प्रसार सम्मान, विदिशा

पता: ग्राम -पोस्ट: झिरी, छपारा; जिला - सिवनी (मध्य प्रदेश), पिन - 480887
चलभाष: 9406706752
ईमेल: thakuraasheesh123@gmail.com

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