ब्रज के पौराणिक, ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं धार्मिक व सांस्कृतिक वैभव से परिचित कराती, पर्यटन के महत्व को समेटती ‘चल मन वृन्दावन’


समीक्षक: दिनेश पाठक ‘शशि’

28, सारंग विहार, मथुरा-6; चलभाष: +91 987 063 1805; ईमेल: drdinesh57@gmail.com

समीक्ष्य पुस्तक: चल मन वृन्दावन (काफी टेबल बुक)
सम्पादक: डॉ. अशोक बंसल
मुख्य सम्पादक: श्रीमती हेमा मालिनी (सिने तारिका एवं सांसद मथुरा-वृन्दावन)
पृष्ठ: 228
मूल्य: अंकित नहीं
प्रकाशन वर्ष: 2023
प्रकाशक: बिमटैक फाउण्डेशन, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

ब्रज के पौराणिक, ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं धार्मिक व सांस्कृतिक वैभव से परिचित कराती, पर्यटन के महत्व को समेटती काफी टेबल बुक ‘चल मन वृन्दावन’

दिनेश पाठक ‘शशि’
प्रख्यात सिने तारिका एवं मथुरा-वृन्दावन की सांसद श्रीमती हेमा मालिनी जी के प्रधान सम्पादन में तथा अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर रहे, यायावरी स्वभाव के डॉ. अशोक बंसल के सम्पादन में तैयार की गई कॉफी टेबल बुक -‘चल मन वृन्दावन’ 12 बाई 12 इंच के मोटे आर्ट पेपर पर कलर्ड प्रिंटिंग सहित 228 पृष्ठों में अपने अन्दर ब्रज के वैभव की प्रचुर सामग्री समाहित किए हुए है।

पुस्तक को छह खण्डों में विभाजित किया गया है। प्रारम्भ में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का संदेश उसके बाद 11 पृष्ठों में हेमा मालिनी जी का सम्पादकीय जिसमें वे लिखती हैं कि -


‘सच तो यह है कि मुझे मथुरा-वृन्दावन के भागवताचार्यों और विद्वानों से श्री राधा-कृष्ण के जीवन-प्रसंगों का श्रवण करने और अपनी जिज्ञासाओं को शान्त करने के सुखद अवसर अनेक बार मिले हैं। मैं विस्मय-विमुगध हूँ कि यह सब कान्हा के ब्रज में ही सम्भव है।’

 दूसरे खण्ड पृष्ठ 12 से 73 के बीच ब्रज के देवालयों के बारे में बड़े और भव्य रंगीन चित्रों सहित जानकारी प्रस्तुत की गई है। वृन्दावन के सप्त देवालय के अन्तर्गत-मदन मोहन मंदिर, गोविंद देव मंदिर, गोपीनाथ मंदिर, राधा दामोदर मंदिर, राधा रमण मंदिर, राधा गोकुलानन्द मंदिर और राधा श्यामसुंदर मंदिर के साथ-साथ जुगल किशोर जी का मंदिर,राधा बल्लभ जी मंदिर,श्री रंग जी मंदिर, शाह जी मंदिर, जयपुर मंदिर, प्रेम मंदिर आदि के बारे में विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है।

इसी खण्ड में मथुरा के श्री कृष्ण जन्म स्थान, द्वारिकाधीश मंदिर एवं शत्रुघ्न मंदिर के बारे में तथा बल्देव के दाऊजी मंदिर, बरसाना के श्री राधा रानी मंदिर, नन्दगांव के नन्दबाबा मंदिर, गोकुल-महावन के मंदिर, राधा की जन्म स्थली रावल का मंदिर आदि का सजीव चित्रण किया गया है।

अगले खण्ड-ब्रज की होली और अन्य उत्सव’ को पृष्ठ 74 से 121 के बीच समाहित किया गया है जिसमें ब्रज में होली की ठिठोली, बरसाने की लठामार होली, फालेन की होली, दाऊ जी का हुरंगा, ठाकुर जी के छप्पन भोग, ब्रज में परिक्रमा 84 कोस की, गोवर्धन-परिक्रमा के पड़ाव एवं मंदिर, रासलीला, मथुरा में यम द्वितीया का विलक्षण पर्व, मथुरा में अनूठा कंस मेला, ब्रज में चरकुला नृत्य, मथुरा में नृसिंह लीला, आदि का मनोहारी वर्णन किया गया है।

पृष्ठ -122 से 139 के बीच अगले खण्ड-‘ब्रज की धरोहर’ के अन्तर्गत-मथुरा का राजकीय संग्रहालय, मथुरा की विलक्षण इमारत होलीगेट, रास स्थली वंशीवट, मानसरोवर,सती बुर्ज के बारे में तथा अगले खण्ड- ‘महान विभूतियाँ और ब्रज’ के अन्तर्गत पृष्ठ -140 से 213 के बीच महात्मा बुद्ध और ब्रज, जैन धर्म और मथुरा, चैतन्य महाप्रभु की ब्रज को देन, महाप्रभु चैतन्य के षड-आचार्य, महाप्रभु बल्लभाचार्य तथा गोस्वामी विट्ठलनाथ की ब्रज को देन, रसिकाचार्य श्रीहित हरिवंश , स्वामी हरिदास, अष्ट छाप के आठ कवि, ब्रज के पाँच सम्प्रदाय, ब्रज की अमूल्य निधि रसखान, कृष्ण भक्त कवयित्री-ताज बीबी, राजस्थान की बणी-ठणी वृन्दावन में, वृन्दावन में मीराबाई, इस्कान संस्थापक- श्रील प्रभुपाद, गुरु नानक का मथुरा-प्रवास, मथुरा में स्वामी विरजानंद, नाथद्वारा में एक लघु ब्रज तथा ब्रज का वानस्पतिक सौन्दर्य और श्री कृष्ण आदि शीर्षकों से बहुत ही शोधपरक आलेख समाहित किए गये हैं।

पुस्तक के छठे खण्ड में ब्रज के विविध प्रसंगों यथा- मथुरा के पेड़े, मथुरा के पहलवान आदि की जानकारी दी गई है।

कॉफी टेबल बुक ‘चल मन वृन्दावन’ को अद्भुत, आकर्षक और मनोहारी रूप प्रदान करने में बिमटैक फाउण्डेशन के अध्यक्ष डा. हरिवंश चतुर्वेदी जी का सहयोग तो प्रशंसनीय हैं ही साथ ही श्रीमती हेमा मालिनी जी के सांसद प्रतिनिधि श्री जनार्दन शर्मा जी एवं सुनील आचार्य जी का सहयोग भी प्रशंसनीय रहा है।

पुस्तक की उपयोगिता के विषय में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा संदेश में लिखे ये शब्द सत्य ही प्रतीत होते हैं-
‘हमारी समृद्ध चिंतन परम्परा में भगवान श्री कृष्ण एक प्रकाश पुज के समान हैं। उनकी लीलाओं की साक्षी मथुरा नगरी से जुड़े विभिन्न स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखते हैं।’

निश्चित ही पुस्तक श्रद्धालुओं ,पर्यटकों एवं शोधार्थियों तथा जिज्ञासुओं को मनोवांछित सामग्री प्रदान करने वाली विकीपीडिया सिद्ध होगी, ऐसी आशा है।

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