कविताएँ: नूपुर अशोक

नूपुर अशोक
[1] विदेश में पतझड़ 

हरीतिमा में लिपटे वृक्ष 
महसूस करते हैं बदलती हुई हवाओं को
समझने लगते हैं कि
उनका समय गुज़र चुका है

मन का उच्छ्वास 
धूमिल कर देता है उन्हें
भूरे पड़ जाते हैं पत्ते

जूझते अन्तरद्वन्द्व से
पा लेते हैं अपने उत्तर
उल्लसित हो उठते लालिमा से भर
हो जाते प्रस्तुत उत्तर जीवन के लिए
कर देते निस्तार अपना सर्वस्व 

उठाकर अपनी निर्वसन बाँहें
हो जाते हैं एकाकार
असीम शून्याकार में।
***


[2] एक पीला फूल 

चीखते हुए अलार्मों
भागती हुई गाड़ियों 
और दौड़ते हुए लोगों से बेखबर 
एक पीला फूल
पंखुड़ियों की मुट्ठी बाँधे
पूरे मनोयोग से
कर रहा है प्रतीक्षा 
सूरज के उगने की,
जब वह खोल कर अपनी उंगलियाँ
समर्पित कर देगा अपना प्रेमपूर्ण हृदय
रहेगा संतुष्ट 
और प्रफुल्लित
एक दिवस के जीवन में!
****


[3] अपने बगीचे में घूमते हुए 

उसकी चुनरी का चटक गुलाबी सितारा
यहाँ मेरे गुड़हल में अटक गया है
लटक रहा है उसका झूमर, गुड़हल के बीच

उसकी नीली आँखों का जादू
झाँक रहा है अपराजिता की बेल से

छिटकी पड़ी हैं
उसके केशों से टपकी पानी की बूँदें
फूल बनकर सदाबहार में

उसकी मदहोशी भरी खुशबू
दोलन चम्पा में हुमस रही है

चुपके चुपके मुस्कुरा रहे हैं
हरे-हरे पत्ते डालों पर
याद में उसकी खोए,
झूम रहे हैं हौले हौले

रात जाने कौन परी आई थी!
***


परिचय: नूपुर अशोक

चलभाष - 983 117 1151 
ईमेल – nupurashok@gmail.com
पता – बॉलखम हिल्स, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया 
शिक्षा – एम.ए. (हिन्दी), पीएचडी (शोधकार्य - शिवानी के उपन्यास कथ्य और शिल्प)
संप्रति – सॉफ्ट स्किल्स ट्रेनर, स्वतंत्र लेखन व चित्रांकन, सह-सम्पादक  ‘काव्यालय’, निदेशक ‘साहित्यिकी’ , 

साप्ताहिक व्यंग्य स्तम्भ लेखन – दास मलूका कह गए (1990-91, प्रभात खबर) 

प्रकाशित पुस्तकें:-
कविता संग्रह - मेरे मन का शहर
व्यंग्य संग्रह - पचहत्तर वाली भिण्डी 
कविता संग्रह – दस्तक (शृंखला की दूसरी किताब) (संपादन)
संस्मरण संग्रह – यह, वह प्रदेश तो नहीं (संपादन)

अन्य: कई साझा संकलन, पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। साहित्योदय पर लगभग 40 लेखकों के साक्षात्कार। स्पॉटिफ़ाई व अन्य प्लैटफ़ार्म्स पर  पॉडकास्ट। इनके चित्रों की प्रदर्शनी अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स कोलकाता में हो चुकी है। 1984 से 2004 तक आकाशवाणी पर प्रस्तुतकर्ता।

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