पुस्तक समीक्षा: रोचक विज्ञान कथाएँ (नीलम राकेश)

समीक्षक: दिनेश पाठक ‘शशि’

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समीक्ष्य पुस्तक: रोचक विज्ञान कथाएँ (बाल कहानी संग्रह)    
लेखिका: श्रीमती नीलम राकेश
आईएसबीएन: 978.81.962517.2.7                 
संस्करण: 2023
प्रकाशक: अद्विक पब्लिकेशन, दिल्ली-110092
मूल्य: ₹ 200 रुपये
पृष्ठ: 52

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान लखनऊ के सुभद्रा कुमारी चौहान बाल सम्मान एवं पं. हरप्रसाद पाठक-स्मृति बाल साहित्य भूषण सम्मान सहित अनेक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत लेखिका श्रीमती नीलम राकेश जी ने दो दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखकर हिन्दी साहित्य की श्रीवृद्धि की है।
दिनेश पाठक ‘शशि’
रोचक विज्ञान कथाएँ नीलम जी की विज्ञान कथाओं की प्रथम कृति है जिसमें कुल ग्यारह बाल-कहानियाँ समाहित की गई हैं। विज्ञान कथाएँ होने के बावजूद संग्रह की सभी कहानियाँ सहज एवं सरल भाषा में बहुत ही रोचक ढंग से लिखी गई कहानियाँ हैं जो बाल एवं किशोर वय के बच्चों को तो पसन्द आने के साथ-साथ उन्हें विज्ञान सम्बन्धी रोचक जानकारियाँ भी प्रदान करेंगी। इतना ही नहीं, बड़े लोग भी इन कहानियों से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते।
रात में रोशनी करने वाला खद्योत जिसे जुगनू भी कहते हैं, सभी ने देखा होगा पर वह रोशनी किस तरह करता है यह बात सबको नहीं पता होती। नीलम जी ने संग्रह की पहली कहानी है "चम चम चमके जुगनू भैया में इस बात को बहुत ही सरल रूप से समझा दिया है-
"जुगनू के पेट के निचले भाग में ही प्रकाश पैदा करने वाले अंग होते हैं। इन अंगों में ल्युसीफेरस और ल्यूसीफेरीन नाम के दो पदार्थ होते हैं। ल्यूफेरीन आक्सीजन से क्रिया करके प्रकाश उत्पन्न करता है। ल्यूसीफेरस इस काम में उसकी मदद करता है। बस, इन्हीं दोनों पदार्थों के कारण तुम्हारे जुगनू भइया चमकते हैं।" (पृष्ठ-4)

'हरियाली की खोज’ कहानी में पेड़-पौधे अपनी पत्तियों से भोजन किस प्रकार बनाते हैं, यह समझाया गया है तो हिच-हिच-हिचकी कहानी के माध्यम से हिचकी आने के कारण बतलाये गये हैं। स्कूल जाना प्रारम्भ करते ही बच्चों को पेंसिल का प्रयोग करना पड़ता है। संग्रह की कहानी-‘इला की पेंसिल’ में बड़े ही रोचक तरीके से नीलम जी ने  पेंसिल क्या है और इसे कैसे बनाया जाता है, की जानकारी प्रदान की है।
अक्सर बच्चे जब किसी कारण से अपनी परीक्षा की तैयारी ठीक से नहीं कर पाते तो परीक्षा में फेल हो जाने के डर से उनका आत्म विश्वास डगमगाने लगता है और फिर वे कोई ऐसा शॉर्टकट खोजने का प्रयास करते हैं जिससे परीक्षा में पास हो जायें। नीलम जी ने बड़ी ही बुद्धिमानी से संग्रह की कहानी-‘जादुई अक्षरों का कमाल’ का ताना-बाना बुना है। वह बीमारी के कारण आत्मविश्वास खोते बच्चे कौशल का आत्मविश्वास किस तरह पुनः वापस लाती हैं, यह दृष्टव्य है-
"मतलब ये बेटा कि तुम्हारा आत्मविश्वास डगमगा रहा था। उसे बचाने के लिए मैंने अपने एक रसायन विज्ञान के प्रोफेसर मित्र का सहारा लिया था। उस दिन साधु वेश में मैं ही अपने मि़ को वहाँ बैठाकर आया था।" (पृष्ठ-21)
‘कहाँ से आये बादल’ कहानी में बादलों के बारे में अच्छी जानकारी दी गई है तो कहानी ‘खुल गई पाल’ में बच्चों को कार के निर्माण और उसमें प्रयोग होने वाले ईधन व पानी की उपयोगिता के बारे में उत्तम जानकारी प्रदान की गई है।
 कहानी-‘नहले पर दहला’ तथा ‘चारुप्रिया का चमत्कार’ में अनपढ़ ग्रामीणों को बेवकूफ बनाकर धन ऐंठने वाले ढोंगियों की पोल खोली गई है तो कहानी-‘सूर्य किरणों के सात रंग’ में सूर्य से निकलने वाले सात रंगों के बारे में जानकारी दी गई है।
‘अंतरिक्ष की सैर’ कहानी संग्रह की अंतिम कहानी है जिसमें प्रबुद्ध लेखिका नीलम राकेश जी ने बहुत ही रोचक ढंग से अंतरिक्ष की सैर कराते हुए अंतरिक्ष के बारे में जानकारी प्रदान की है।
         कुल मिलाकर संग्रह की सभी कहानियाँ रोचक एवं ज्ञानवर्द्धक हैं। पुस्तक का मुद्रण साफ-सुथरा एवं त्रुटिहीन है। गेटअप बहुत ही लुभावना एवं प्रयुक्त कागज उच्च स्तरीय है। हिन्दी साहित्य जगत में पुस्तक का सर्वत्र स्वागत होगा, ऐसी  आशा है।

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