लघुकथा: उत्तर-आधुनिक चरण-स्पर्श

नीरज दइया

- नीरज दइया

मैंने अपने पोते से पूछा, "चरण शब्द से तुम क्या समझते हो?"
उसने कहा, "दादा चरण या चारण, मेरे एक फ्रेंड का सरनेम चारण है। यू नो मूल शब्द चरण नहीं चरन है और चरन का मतलब पैर भी होता है।"
अब सवाल करने की बारी उसकी थी, उसने कहा, "लेकिन आप यह पूछ क्यों रहे हैं?"
मैंने कहा, "ऐसे ही, क्योंकि तुम आजकल चरण-स्पर्श करना भूल गए हो?"
- "नहीं, नहीं। किसने कहा आपसे? मैंने सब के चरण-स्पर्श कर लिए थे आज। मैं तो हमेशा करता हूँ।"
- "हें, मैंने तो नहीं देखा!"
- "आप कैसे देखते, जब मैं बेडरूम में था, तब कर लिए थे।"
- "कैसे?"
- "अरे आप सब के चरणों की फोटो खींच कर मैंने अपने मोबाइल में रख ली है। रोज सुबह उठ कर मैं चरण स्पर्श कर लेता हूँ, इसलिए आपको लग रहा है कि नहीं किए चरण-स्पर्श। मैंने तो सब के किए, मेरे पास सब के चरणों की फोटो है- आपकी, दादी जी की और पापा-मम्मी की भी। यह देखिए..."

वह अपने मोबाइल में हम सब के चरणों के चित्र दिखा रहा था।
००००

पता: सी-107, वल्लभ गार्डन, पवनपुरी, बीकानेर- 334003 राज.
चलभाष: 9461375668
 

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