बचपन, कैशोर्य एवं यौवन की आहट पर मन से जुड़े घटनाक्रमों को रूपायित करती कथाकृति

समीक्षक: आचार्य नीरज शास्त्री

34/2 गायत्री निवास, लाजपत नगर, एन.एच.-2, मथुरा-281004, चलभाष: +91 925 914 6669


कृति: उम्र की बिसरी गली
रचनाकार: श्रीमती कमल कपूर
प्रकाशक: अयन प्रकाशन, नई दिल्ली -110059
प्रथम संस्करण: सन् 2024, पेपर बैक
पृष्ठ: 152
मूल्य: ₹ 425 रुपये

 'उम्र की बिसरी गली' कलम की जादूगर श्रीमती कमल कपूर द्वारा सद्य प्रणीत कहानी संग्रह है। यह संग्रह समीक्षार्थ प्राप्त हुआ तो मैंने इसे तीन बार पढ़ा। हर बार इसे पढ़ना सुखद एवं रोमांचकारी रहा।

 प्रस्तुत कहानी संग्रह को विदुषी लेखिका ने वर्तमान युग की वाग्देवी श्रीमती चित्रा मुद्गल को समर्पित कर सोने पर सुहागा मला है। आकर्षक आवरण के अंदर उच्च आदर्श को प्रस्तुत करती विशिष्ट कथानक की पन्द्रह कहानियाँ मन को बांध लेती हैं। इन कहानियों में कहानी कला के सभी तत्वों का पूरा समावेश विदुषी लेखिका के अद्भुत कथा-कौशल का प्रमाण है। सभी कहानियों के शीर्षक उपयुक्त हैं, भाषा-शैली विषय के अनुरूप सटीक हैं, जिनमें भाव बोध के साथ-साथ चित्रात्मकता का पूर्ण समावेश है।

आचार्य नीरज शास्त्री
 देश-काल-परिस्थिति को ध्यान में रखकर ही संवाद लिखे गए हैं जो कि किसी कुशल कथाकार का सबसे प्रमुख गुण होता है। सभी कहानियाँ अपने उद्देश्य में सफल हैं और जन-जीवन में प्रेरणा प्रस्फुटित करती हैं। लेखिका ने शब्दों के माध्यम से दृश्य-परिदृश्यों का सफल चित्रांकन किया है।

 पहली कहानी संग्रह का शीर्षक बनी है। 'उम्र की बिसरी गली' में बाल-मन में रंग-बिरंगी गुड़िया को पाने की लालसा और उसके लिए किए गए प्रयासों का चित्रण है।
दूसरी कहानी 'उसके हिस्से की धूप'में बताया गया है कि माता-पिता जब अपनी इच्छाएँ अपने बच्चों पर थोपने लगते हैं तो बच्चे मायूस हो जाते हैं और जब उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार करने का अवसर मिलता है तो उनके हिस्से की धूप उन्हें मिल जाती है।

 तीसरी कहानी 'बिल्लो की बिटिया' में एक सामान्य लड़की के साथ अनुचित बर्ताव पर उसकी प्रगति के अवरोध तथा उचित बर्ताव पर प्रगति में सहयोग का चलचित्र प्रस्तुत किया गया है।

कमल कपूर
 चौथी कहानी 'अस्तराग' में मौत की भयावहता को नकारती लड़की की उत्कट जीवनी शक्ति और बेलौस हंसमुख व्यक्तित्व को शब्दों के रंग से उकेरा गया है। उद्धरण प्रस्तुत है - "परियों सी खूबसूरत और सुबह की शबनम सी निर्मल एक किशोरी समंदर के पानी से छेड़खानी करती हुई बेवजह हँसे जा रही थी। अस्त होते सूरज की संतरी-गुलाबी छाया ने जैसे उसे ढक रखा था। इस माया नगरी में यह मासूम एंजिल कहाँ से चली आई? सोचते हुए उसी के जादू में खोया हुआ था मैं कि वह पानी से निकलकर खरगोश की तरह दौड़ लगाती हुई, अपनी रंग-बिरंगी स्कर्ट फहराती, न जाने कहाँ गायब हो गई।" कहानी क्या रेखाचित्र कहिए, अद्भुत, अनन्य, अनुपम।

 'खंडित ख्वाब' कहानी केवल आकर्षण में बंधकर किसी से भी माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध बिना सोचे-समझे शादी जैसे निर्णय के परिणाम को दर्शाकर वर्तमान पीढ़ी को आगाह करती है।  'अनमोल' कहानी अपनी सबसे अमूल्य निधि के खो जाने और उसी तरह की धूल-धूसरित दूसरी निधि को पाकर धन्य होने की कहानी है।  'सतरंगी' कहानी बताती है कि वे वस्तुएँ जो बालमन को आकर्षित करती हैं, कभी रिश्तों से ऊपर नहीं होतीं। रिश्तों के आगे उनका महत्व नहीं रहता। इसी प्रकार 'प्रिंस की वापसी', 'सिर्फ एक दिन', 'अब घर चल', 'अब कुसुमी खुश है', 'कब आओगी चंदा', 'सपनों से भरे नैना', 'अम्मा मैं बिटिया तेरी' तथा 'अपरिचित' सभी कहानियाँ जीवन के रंगों से सराबोर करने वाली अनुपम कहानियाँ हैं।

 ये सभी कहानियाँ कथा शिल्पी श्रीमती कमल कपूर की कलम की जादूगरी हैं। निश्चित ही लेखिका इस युग की स्वयं सिद्धा हैं। मैं उनकी लेखनी को प्रणाम करता हूँ एवं आशा करता हूं कि यह कृति 'उम्र की बिसरी गली' कथाकारों की अगली पीढ़ी को प्रेरित करेगी तथा विदुषी लेखिका के यश में श्रीवृद्धि करेगी। अनंत हार्दिक शुभकामनाएँ!
 

1 comment :

  1. विदुषी लेखिका श्रीमती कमल कपूर एवं विद्वान संपादक महोदय को सधन्यवाद बधाइयां।

    ReplyDelete

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।