'लव नोट्स' से - पल्लवी त्रिवेदी

वो फरवरी का हल्का सर्द और खूबसूरत दिन था। लड़की और लड़का एक पहाड़ी झील के किनारे एक शॉल में बंधे हुए बैठे सूरज को ढलते हुए देख रहे थे। बिखरे बिखरे बादलों को आसमान ने सिन्दूरी रंग में गुलाबी रंग का एक शेड मिलाकर पेंट कर दिया था। पंछी मीठा शोर मचाते हुए कतारों में अपने घरों को लौट रहे थे और जल का मद्धम बजता संगीत मौसम को बेहद रूमानी बना रहा था। आलम ऐसा मानो सारी कुदरत ही प्रेम में डूबी हो।

लड़के ने बेहद मुहब्बत से लड़की को देखा और उसे चूमते हुए कहा,
"यह हमारी ज़िंदगी का सबसे रूमानी पल है।"

लड़की ने भी लड़के की गर्दन को हौले से चूमा और अलसायी सी बोली "ऊं हूँ ... अगर यह सबसे रूमानी पल हो गया तो बाकी सारी ज़िन्दगी हम किस पल के लिए जियेंगे"

"मतलब?"

लड़की ने शॉल हटाया और लड़के का चेहरा अपने सामने लाकर आँखों में झांकती हुई कहने लगी, "जानां ... जब जीवन के सफ़र के आखिरी पड़ाव पर हम किसी सरसों के खेत में या फिर किसी उजले पहाड़ पर या फिर किसी बहते दरिया के किनारे विश्राम करने रुकेंगे, जब थकी साँसें शब्दों के बीच में जगह बनाया करेंगी, जब कच्ची नींदें और पक्के तज़ुर्बे दोनों एक साथ आँखों को बांटेंगे, जब मेरे माथे के पसीने को तुम्हारी कांपती हथेली सोखेगी और तुम्हारे माथे को उचककर चूमते हुए मेरे पैर लड़खड़ाएंगे, जब जज़्बात अल्फ़ाज़ों के मोहताज़ नहीं होंगे ...  तब तुम्हारी हथेली थामे एकटक आसमान को देखते हुए प्रेम हमारी पलकों पर आनंद के आंसू बन उतर आएगा और दो आत्माएं देहों के परे ख़ुशी से थिरक उठेंगी ... वो पल हम दोनों की ज़िंदगी का सबसे रूमानी पल होगा!"
लड़का बोला, "आमीन" और लड़की को लाड़ से दोबारा शाल में समेट लिया।

सूरज की रौशनी थोड़ी देर में बुझ गयी थी,पंछियों का शोर खामोश हो गया था सिर्फ हवा और झील की लहरों का धीमा धीमा कोरस था और एक ही ताल और लय पर धड़कते दो दिल थे।