दो शब्द - अनुराग शर्मा

नमस्कार,

हिंदी के लिये सितम्बर का मास विशेष स्थान रखता है। हिंदी दिवस और हिंदी पक्ष के मास में सेतु का चौथा अंक आपके अवलोकन के लिये प्रस्तुत है। समय के साथ सब कुछ बदलता है। हिंदी भी बदल रही है। 14 सितम्बर 1949 में देवनागरी लिपि और अंतर्राष्ट्रीय अंकों में लिखी हिंदी को भारत गणराज्य की राजभाषा बनाने की संस्तुति करना इतना सरल नहीं था जितना आज लगता है।

हिंदी का विस्तार तो कम था ही, देवनागरी की स्वीकार्यता और भी कम थी। सिंधी, कश्मीरी जैसी भाषायें फारसी में लिखी जाती थीं, मराठी की लिपि मौड़ी थी। संस्कृत को तिब्बती और कायथी से लेकर तमिल और तेलुगु लिपियों तक सभी में लिखा जाता था। हिंदी की सहयोगी बोलियां उर्दू और हिंदुस्तानी भी देवनागरी के मुकाबले फारसी की ओर ही झुकी हुई थीं। सेना आदि विभागों के बहुत से अधिकारी हिंदी को देवनागरी में नहीं बल्कि रोमन लिपि में ही पढ सकते थे।

हिंदी के लिये कठिन उस समय में भी देवनागरी में लिखी जाने वाली हिंदी को राजभाषा बनाने का निर्णय संविधान सभा की निष्पक्षता के साथ-साथ दूरदृष्टि का भी प्रतीक है। आज जब हिंदी भारत ही नहीं, अपितु संसार की अग्रणी भाषा है, इसे अपनाना और इसका विस्तार करना उतना कठिन नहीं रहा।

इस अवसर पर मूलतः एक हिंदीभाषी भारतीय होने के नाते मैं उन सब अहिंदीभाषियों को नमन करता हूँ जिन्होंने हिंदी के विकास और विस्तार में सहयोग दिया है। साथ ही इस शुभ अवसर पर सेतु की ओर से मैं एक हिंदी काव्य प्रतियोगिता की घोषणा करता हूँ। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिये अपनी सर्वश्रेष्ठ, मौलिकअप्रकाशित कविता को यूनिकोड देवनागरी में लिखकर सेतु हिंदी को setuhindi@gmail.com पर 31 अक्टूबर, 2016 तक भेज दीजिये। भाग लेने के लिये आयु, राष्ट्रीयता आदि की कोई सीमा नहीं है। प्रतियोगिता के अन्य नियम वही हैं जो सेतु में प्रकाशन के लिये रचना भेजने के नियम हैं। ईमेल भेजते समय विषय में सेतु हिंदी काव्य प्रतियोगिता अवश्य लिखें। विजेताओं के लिये कुछ नकद तथा अन्य पुरस्कार भी हैं। अंतिम तिथि का इंतज़ार मत कीजिये, अपनी रचनाएं ईमेल से हमें जल्दी से जल्दी भेज दीजिये।
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आपसे एक बार फिर अनुरोध है कि इस अंक को पढने के बाद हमें अपनी राय से बिंदास अवगत कराइये। साथ ही यदि आप कोई नया फ़ीचर सेतु में देखना चाहते हैं या किसी विशिष्ट विषय पर जानकारी के उत्सुक हैं तो हमें ज़रूर बताएं।

आभार और शुभकामनाएँ,

अनुराग शर्मा
प्रमुख सम्पादक, सेतु द्वैभाषिक, पिट्सबर्ग (अमेरिका)