नफ़रत करने वाले नफ़रत करते रहेंगे - आइंस्टीन

मेहेर वान

सन 1903 में रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ़ साइंसेज ने पियरे क्युरी, हेनरी बेकेरल और मेरी क्यूरी को रेडियो-एक्टिविटी के क्षेत्र में किये गये महत्वपूर्ण शोध कार्य के लिये नोबेल पुरस्कार की घोषणा की। हेनरी बेकेरल वही वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियेशन यानि विकिरण सम्बन्धी सिद्धान्त की खोज की थी। शुरुआत में नोबेल पुरस्कार चयन समिति पियरे क्यूरी और हेनरी बेकेरल को ही पुरस्कृत करना चाह रही थी, नोबेल के चयन के लिये सूची में मेरी क्यूरी का नाम नहीं था। भौतिकी की उस नोबेल पुरस्कार चयन समिति में एक गणितज्ञ थे, जो कि महिला वैज्ञानिकों के अधिकारों और उन्हें प्रोत्साहन देने की पुरजोर वकालत करते थे। स्वीडन के इन गणितज्ञ का नाम था “मेग्नस गोइस्टा मिटग-लैफ़्लर”। इन्होंने मामले की जानकारी पियरे क्यूरी को दी और बाद में पियरे क्यूरी की शिकायत पर मेरी क्यूरी का नाम भी नोबेल पुरस्कार के लिये नामित किया गया। इस तरह मेरी क्यूरी दुनियाँ की पहली नोबेल पुरस्कार विजेता महिला बनीं।

स्वीडिश एकेडमी ने उन्हें नोबेल पुरस्कार ग्रहण करने स्टॉकहोम आमंत्रित किया। लेकिन मेरी क्यूरी और उनके पति पियरे क्यूरी ने खुद स्टॉकहोम जाकर नोबेल पुरस्कार ग्रहण करने का प्रस्ताव यह कहते हुये ठुकरा दिया कि वह अपने शोधकार्य में बहुत अधिक व्यस्त हैं। असल में पियरे क्यूरी को सामाजिक सभाओं में शामिल होना पसन्द नहीं था और वह बीमार भी थे। चूंकि नोबेल पुरस्कार पाने वाले को स्टॉकहोम में “नोबेल भाषण” भी देना होता है, अतः 1905 में मेरी क्यूरी ने स्टॉकहोम जाकर नोबेल भाषण देते हुये पुरस्कार ग्रहण किया। नोबेल पुरस्कार से मिले पैसों से क्यूरी जोड़े ने अपनी प्रयोगशाला के लिये पहला सहायक कर्मचारी नियुक्त किया। उस समय इन लोगों के पास बहुत संसाधन नहीं थे और यह लोग बहुत गरीबी में अपना शोध कार्य कर रहे थे। नोबेल पुरस्कार के बाद पियरे क्यूरी की शिकायत पर पेरिस विश्वविद्यालय ने उनके लिये एक नयी प्रयोगशाला बनवाने का वादा किया जो कि 1906 तक पूरा नहीं हो सका। सन 1906 में एक सड़क दुर्घटना में पियरे क्यूरी की मृत्यु हो गयी। मेरी क्यूरी को इस घटना से बहुत बड़ धक्का लगा।

 मेरी क्यूरी ने अपना शोधकार्य जारी रखा। वह पेरिस विशवविद्यालय में पढ़ाने वाली पहली महिला प्रोफ़ेसर बनीं। पेरिस विशवविद्यालय में मेरी ने एक विश्व स्तरीय प्रयोगशाला बनाई जिसे उन्होंने अपने स्वर्गीव पति पियरे क्यूरी को समर्पित किया। महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध कार्य के कारण उनकी ख्याति विश्व भर में फैली। सन 1911 में ब्रुसेल्स में एक वैज्ञानिक कॉन्फ़्रेन्स आयोजित की गयी जिनमें दुनियाँ के सबसे महत्वपूर्ण 20 भौतिकशास्त्रियों को आमंत्रित किया गया। इसमें तत्कालीन भौतिक विज्ञान की चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया जाना था। यह वैज्ञानिक कॉन्फ़्रेन्स बहुत प्रसिद्ध है क्योंकि इसमें उस जमाने के सबसे प्रतिभाशाली 20 वैज्ञानिक एक साथ बैठकर विचार विमर्श करने एक साथ जुटे थे। 

मेरी क्यूरी भी इन 20 सबसे प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों में से एक थीं। वह इस वैज्ञानिक कॉन्फ़्रेन्स में शामिल होने ब्रुसेल्स आईं हुईं थीं। उस समय मेरी क्यूरी अपने दूसरे नोबेल पुरस्कार से कुछ ही दूर थीं, जोकि उन्हें रेडियम और पोलोनियम तत्वों की खोज के लिये दिया गया था। यह नोबेल पुरस्कार उन्हें रसायन शास्त्र में दिया गया और इस तरह वह अलग-अलग विज्ञानों एक से अधिक नोबेल पुरस्कार पाने वाली दुनियाँ की पहली वैज्ञानिक हो गयीं। उनका यह रिकार्ड अब तक कायम है।



जब वह ब्रुसेल्स की वैज्ञानिक कॉन्फ़्रेन्स में शामिल हो रहीं थीं तब फ्राँस के समाचार पत्रों ने मेरी क्यूरी के कुछ प्रेम-पत्र प्रकाशित किये, जोकि उन्होंने एक अन्य प्रतिभाशाली वैज्ञानिक पॉल लेन्जेविन को लिखे थे। पॉल लेन्जेविन एक समय में पियरे क्यूरी के शोधछात्र रहे थे। 1906 में पियरे क्यूरी के मृत्यु के बाद मेरी क्यूरी की लेन्जेविन से नज़दीकियाँ बढ़ गयीं थीं। पॉल लेन्जेविन भी अपनी पत्नी से अलग रह रहे थे, पर तकनीकी रूप से उनका तलाक नहीं हुआ था। जब मेरी क्यूरी ब्रुसेल्स में कॉन्फ़्रेन्स में शामिल हो रही थीं तब पॉल लेन्जेविन की पत्नी ने इनके प्रेम पत्रों को अखबारों में प्रकाशित होने के लिये दे दिया। उस समय अखबारों ने मेरी क्यूरी को “घर तोड़ने वाली डायन” के रूप में छवि बनाई। जिसने देश की जनता भड़क दिया और जब मेरी क्यूरी दुनियाँ की सबसे महान कॉन्फ़्रेंस में शामिल होने के बाद अपने घर वापस पहुँचीं तो उनका स्वागत भीड़ ने पत्थरों और गन्दी गालियों के साथ किया। लोगों को मेरी क्यूरी की वैज्ञानिक उपलब्धियों से कोई मतलब नहीं था , उन्हें क्यूरी की व्यक्तिगत ज़िंदगी में ज़्यादा मतलब था। पथराव और शोरगुल से मेरी की बच्चियाँ बहुत भयभीत हो गयीं जो उस समय मात्र 7 और 14 साल की ही थीं। किसी तरह भीड़ से बचकर मेरी क्यूरी अपने बच्चों के साथ अपने एक दोस्त के पास चलीं गयीं थीं और तब तक नहीं लौटीं जब तक कि मामला शान्त नहीं हो गया। इस घटना के कुछ ही सप्ताह बाद उन्हें दूसरा नोबेल पुरस्कार रसायन शास्त्र में मिला।



अल्बर्ट आइंस्टीन से मेरी क्यूरी की मुलाकात ब्रुसेल्स की कॉन्फ़्रेन्स हुई थी। अल्बर्ट आइंस्टाइन को मेरी क्यूरी बेलागलपेट रूप से ईमानदार महिला लगीं थी जिसका उन्होंने कुछ अन्य जगहों पर ज़िक्र भी किया है। समाचार-पत्रों और भीड़ की इन कारगुज़ारियों से अल्बर्ट आइंस्टाइन मेरी क्यूरी को पत्र लिखने को बाध्य कर दिया था। अल्बर्ट आइंस्टाइन ने मेरी क्यूरी से एकजुटता दिखाते हुये यह पत्र लिखा था-



माननीय श्रीमती क्यूरी,
कोई अर्थपूर्ण बात होने के बग़ैर आपको पत्र लिखने के लिये मुझपर हँसियेगा नहीं। लेकिन हाल में जनता द्वारा आपके (अत्यंत व्यक्तिगत) मामलों में दिलचस्पी लेने के तौर-तरीकों से मैं इस तरह नाराज़ हूँ कि मुझे इस मनोभावना को ज़रूर बाहर निकालना चाहिये। यद्यपि मुझे विश्वास है कि आप इस भीड़ से दृढ़तापूर्वक घृणा करती हैं, चाहे वह आपपर चापलूसीपूर्ण भव्य सम्मान बरसाये या अपनी किसी सनसनीखेज लालसा को तृप्त करने का प्रयास करती हो! मैं आपको यह कहने के लिये बाध्य हुँ कि मैं आपकी बुद्धिमत्ता, आपके जुनून, और आपकी ईमानदारी के लिये आपकी बहुत प्रशंसा करता हूँ, और इस बात के लिये मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूँ कि ब्रुसेल्स में हमारी व्यक्तिगत पहचान हुयी। जो भी इन (भीड़ वाले) तुच्छ लोगों में अपनी गणना नहीं करता वह निश्चित ही यह सोचकर खुद को पहले की तरह अब भी ख़ुश महसूस करता होगा कि हमारे बीच में आप और लेन्जेविन की तरह श्रेष्ठ लोग मौजूद हैं, ऐसे सच्चे लोग जिनके संपर्क में रहना किसी का विशेष सौभाग्य होता है। यदि भीड़ आपको परेशान करना जारी रखती है, तो आप इनकी अनाप-शनाप बेतुकी बातों पर बिल्कुल ध्यान मत दीजिये, बल्कि इसे उस तुच्छ प्राणी के लिये छोड़ दीजिये जिसके लिये यह बेतुकी बातें बुनी गयीं हैं।
आपके, लेन्जेविन और पेर्रिन के लिये सर्वोत्कृष्ट मैत्रीपूर्ण आदर के साथ,
भवदीय
अल्बर्ट आइन्सटीन