सत्या शर्मा 'कीर्ति' की कविता

* बस कुछ पल *

सत्या शर्मा 'कीर्ति' 
कल कहा मृत्यु ने मुझसे
जल्द आऊँगा मिलने तुमसे ।।

ले जाऊँगा अपने ही संग
रंग कर अपने प्रीत के रंग ।।

कितना सुखद कितना मधुर
होगा तेरा और मेरा मिलन ।।

हँस कर कहा मैंने उससे
थोड़ा अभी सँवर तो लूँ ।।

बालों में सफेदी आने वाली है
चेहरे पर झुर्रियाँ छाने वाली है ।।

हाथों में कँपकँपाहट आ जाएगी
शब्दों में थरथराहट छा जाएगी ।।

पावों को थोड़ा लड़खड़ाने तो दो
आँखों में धुंधलापन छाने तो दो ।।

बस चल दूँगी तेरे ही संग...

कमर भी थोड़ा झुक जाएगी
भावों में ठहराव आ जाएगी ।।

मन के दीप धुँधला जायेंगे
हृदय स्पंदन भी थक जाएंगे ।।

सपनो का भंवर टूटने लगेगा
अपनों का संग छूटने लगेगा ।।

चल दूँगी उस अस्ताचल नभ में
दूर क्षितिज धुंधलाने तो दो ।।

गोधूलि बेला के संग में
डूबते सूरज के मद्धम रंग में ।।

साँसों की पकड़ छूटने लगेगी
मन भी तृप्ति से भरने लगेगी ।।

तब चल दूँगी तेरे ही संग....

बस इंतजार क्षण भर का कर लो
आती हूँ बस थोड़ा ठहर लो ।।