डाॅ. मृदुल कीर्ति की पुस्तक ‘पतंजलि योग-दर्शन’ का विमोचन

       14 मार्च, 2017 को भारतीय संसद भवन, नई दिल्ली में सुबह 1:30 बजे वैदिक साहित्य की प्रकांड विद्वान एवं विख्यात प्रवासी भारतीय लेखिका डॉ. मृदुलकीर्ति की पुस्तक ‘पतंजलि योग-दर्शन’ का विमोचन भारत की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी का प्रतिनिधित्व करने वाले एवं भारतीय गणराज्य के लोकप्रिय प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्रमोदीजी के कर कमलों द्वारा किया गया और साथ ही इसी अवसर पर पुस्तक की प्रथम प्रति भी माननीय प्रधानमंत्री महोदय को लेखिका द्वारा भेंट की गयी।

माननीय प्रधानमंत्री महोदय पुस्तक का विमोचन करते हुए

    पतंजलि योग-दर्शन ऋषि पतंजलि द्वारा गणितीय भाषा में सूत्रों में रचित सृष्टि का एक अद्वितीय एवं यौगिक विज्ञान का आश्चर्यवत ग्रंथ है, जिसमें मनुष्य के प्राण से लेकर महाप्राण तक की अंतर्यात्रा, मृण्मय से चिन्मय तक जाने का यौगिक ज्ञान, मूलाधार से सहस्रार तक ब्रह्मैक्य का आंतरिक ज्ञान, मर्म और दर्शन समाहित है। पतंजलि योग-दर्शन को काव्य चैपाई छंद में अनुवादित कर डॉ. मृदुलकीर्ति ने रामचरित मानस की तरह गेय बना दिया है।

डाॅ. मृदुलकीर्ति माननीय प्रधानमंत्रीजी के साथ

   ‘वेदों में राजनीतिक व्यवस्था’ पर अनुसंधान करने वाली डॉ. मृदुलकीर्ति वेदों की प्रकांड पंडिता हैं। अब तक तीन वैदिक सम्मेलनों में सहभागिता कर चुकीं डॉ. कीर्ति ने अपने अथक प्रयास से वैदिक ग्रंथों का जैसा सरल और बोधगम्य काव्यानुवाद व्याख्यासहित कर उसे आमजन के लिए गेय बना दिया है, वह अपने आप में एक कीर्तिमान है और उनके नाम को चरितार्थ करता है। प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित 216 पृष्ठीय यह पुस्तक (आईएसएसएन: 978-93-86300-26-3) पतंजलि योगदर्शन का व्याख्या सहित काव्यानुवाद है और और आमजन के लिए एक अद्भुत दिव्य प्रसाद है।

   पुस्तक विमोचन के बाद माननीय प्रधानमंत्री महोदय ने लेखिका के प्रयास की सराहना की और अपनी शुभकामनाएॅ देते हुए कहा कि भारतीय वाङ्मय में एक से बढ़कर एक ग्रंथ रत्न भरे पड़े हैं। आवश्यकता है सरल और सुबोध भाषा में उन्हें पाठकों को उपलब्ध कराने की और यह पुस्तक इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है और लेखिका का प्रयास प्रसंशनीय है। माननीय प्रधानमंत्री महोदय डॉ. मृदुलकीर्ति के प्रयास और व्यक्तित्व से काफी हद तक प्रभावित हुए और इस बात का प्रमाण इसी से मिल जाता है कि इस पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के लिए निर्धारित समय 15 मिनट की जगह 25 मिनट समय माननीय प्रधानमंत्री महोदय ने दिया था।
(डाॅ. राकेश कुमार दूबे, वाराणसी)