मार्गरेट ओड्रिस्कॉल की अंग्रेज़ी कविताएँ - अशोक भाटिया अकुभा

मार्गरेट ओड्रिस्कॉल की दो अंग्रेज़ी कविताओं का अनुवाद अशोक भाटिया 'अकुभा' द्वारा 

Margaret O'Driscoll (कवयित्री)

मेरा काव्य शुभंकर 

(My Poetry mascot)

बैठ ऊँचाई पर एक पंछी
पूँछ है जिसकी मोरपंखी
तन है रंग गुलाबी जिसका
रौशन करे शुभंकर मन का

कलगी जिसके शीश पर लगी
इंद्रधनुषी रंगों से पूँछ है सजी
प्रेरित करता रहता हमेशा
बन प्रतीक मेरे लेखन का।

अशोक कुमार भाटिया "अकुभा"

अनत

(Forever Wild)

उगने दो पेड़ों को जहाँ वे उगना चाहें
रहने दो पहाड़ों के इन जंगली पेड़ों को
झरनों को चलने दो मदमस्त राहों पर
चुनने दो प्रकृति को अपना रास्ता

स्वत अंकुरित होते रहें ये पौधे
पक्षी हों स्वतंत्र खुले में चुगने को
प्रकृति के दामन को अविकृत रहने दो
दृश्य सदैव जंगली ही रहने दो।

(Two poems written by Margaret O’Driscoll and translated by Ashok Bhatia 'Akubha')

2 comments :

  1. अनुवादिक कविताओं से गुजरना अच्छा लगा,पढ़ते वक्त लगा ही नहीं कि अनुवादित रचना पढ़ रहा हूँ.अशोक भाटिया 'अकुभा'जी को बधाई देता हूँ.
    अशोक आंद्रे

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    1. यह जान कर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा प्रयत्न अच्छा लगा। प्रोत्साहन के लिये धन्यवाद।

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