श्रद्धांजलि प्राण शर्मा

प्राण शर्मा
दुखद समाचार मिला है कि ब्रिटेन निवासी वरिष्ठ लेखक और प्रसिद्ध शायर प्राण शर्मा का देहावसान हो गया है। ग़ज़ल के क्षेत्र में विशेष प्रसिद्धि पाने वाले प्राण जी की रचनायें आपने सेतु में भी पढ़ी हैं। उनके 'गज़ल कहता हूँ' और 'सुराही' संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। 13 जून 1937 को वज़ीराबाद (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मे प्राण जी 1965 से ब्रिटेन में निवास कर रहे थे और कुछ समय से अस्वस्थ थे। सेतु सम्पादन मण्डल की ओर से प्राण जी को विनम्र श्रद्धांजलि।

ब्लॉगर, कवि और कथाकार विजय कुमार सप्पत्ति के इसी महीने कैंसर से अपना युद्ध हारने की बुरी खबर भी उजागर हुई है, उन्हें भी विनम्र श्रद्धांजलि।

सेतु के मार्च 2018 अंक में लघुकथा प्रतियोगिता के परिणाम प्रकाशित होने के बाद से अब तक एलेगेनी और मॉनोंगहेला नदियों में बहुत जल बह चुका है। सभी विजेताओं को एक बार फिर हार्दिक बधाई। चुने हुए अंतिम नामों में से दो के तकनीकी कारणों से प्रतियोगिता से बाहर होने के बावजूद हमें यह याद रहे कि वे दोनों ही रचनाएँ अपनी गुणवत्ता के कारण ही निर्णायकों द्वारा पसंद की गई हैं।

इस प्रतियोगिता के अनुभवों के बाद जिस पहली बात पर फिर से ज़ोर देना चाहता हूँ वह यही है कि प्रतियोगिता हो या सामान्य प्रकाशन, रचनाएँ भेजते समय लेखकों से निवेदन तथा अन्य नियमावली पर ध्यान अवश्य दीजिये। दूसरा अवलोकन व्याकरण तथा भाषाई शुद्धता का है जो लेखन के लिये एक अनिवार्य तत्व है। अगर लिख ही रहे हैं तो वर्तनी, विरामचिह्न आदि के नियमों पर भी ध्यान दीजिये और हर प्रकार से अच्छा ही लिखिये ताकि पढ़ने वाले को भी वह किसी सज़ा के बजाय एक आनंददायक गतिविधि लगे। सेतु में पूर्व प्रकाशित आलेख 'कृपया सही लिखें – हिंदी लिखना सरल है' इस विषय से सम्बंधित कई भ्रमों को चुटकियों में दूर करने में उपयोगी सिद्ध हुआ है। यदि समय मिले तो उसे एक बार अवश्य पढ़िये।

लगभग 25 रचनाओं के साथ सेतु का अप्रैल 2018 अंक आपके सामने है। अपनी टिप्पणी देकर रचनाकारों को और हमें अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराइये, धन्यवाद। आप सभी को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक बधाई।

शुभकामनाओं सहित,
अनुराग शर्मा


1 comment :

  1. अप्रैल अंक का स्वागत। आदरणीय प्राण शर्मा जी व विजय कुमार सप्पत्ति को श्रद्धांजलि।

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