... उनके काम-काज ने अनजाने वर्त्तमान खतरे उत्पन्न किये हैं - बर्ट्रेंड रसेल

मेहेर वान

मेहेर वान

बर्ट्रेंड रसेल बीसवीं शताब्दी के महानतम विद्वानों में गिने जाते हैं। उनकी विशेषज्ञता को किसी क्षेत्र-विशेष तक सीमित करना बहुत कठिन है क्योंकि उनके काम ने भाषाविज्ञान, गणित, कंप्यूटर विज्ञान और दर्शन इत्यादि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर प्रभाव छोड़े हैं। उन्होंने नाभिकीय हथियारों के निरस्त्रीकरण के लिए विश्व भर में मजबूत अभियान चलाया था। उनके इस अभियान के कारण, उन्हें 20वीं शताब्दी के महानतम मानवतावादियों में गिना जाता है। सन 1950 में उन्हें साहित्य में किये गए योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया। उन्होंने अपने समकालीन नोबेल विजेता वैज्ञानिक अलबर्ट आइन्स्टीन को एक पत्र लिखा था-


5 अप्रैल, 1955
41, क्वीन्स रोड, 
रिचमंड, सरी

प्रिय आइन्स्टीन,

मेरे दिमाग में यह विचार उमड़-घुमड़ रहा है, और मैंने इस बारे में कई लोगों के साथ विचार-विमर्श किया है कि वैज्ञानिक क्षेत्र के बहुसंख्यक लोगों में युद्ध-विरोधी मनोभाव को प्रभावी बनाने के लिए सबसे बेहतरीन कदम क्या हो सकते हैं। मैं सोचता हूँ कि युद्ध के परिणामस्वरूप अपेक्षित आपदाओं के बारे में एक संयुक्त वक्तव्य जारी करना उच्चतम प्रतिष्ठा वाले, कम्युनिष्टों और कम्युनिष्ट-विरोधियों, पश्चिमी और पूर्वी लोगों का सबसे पहला कदम होना चाहिए।

मैं इस तरह के वक्तव्य का एक प्रारूप यहाँ संलग्न कर रहा हूँ, और मैं बहुत अधिक आशान्वित हूँ कि आप इस पर हस्ताक्षर करने के इच्छुक होंगे। मैं उन लोगों की सूची भी संलग्न कर रहा हूँ जिन्हें मैं हस्ताक्षर करने के लिए कह रहा हूँ। यदि पर्याप्त हस्ताक्षर मिल गए, तो अगला कदम एक अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मलेन का आयोजन होना चाहिए, जिसे हस्ताक्षर करने वाले लोग मेरे द्वारा संलग्न किये गए प्रस्ताव के प्रारूप को पास करने के लिए निमंत्रित करें। मुझे आशा है कि इससे सरकार और जनता दोनों को परिस्थितियों की गंभीरता के बारे में अवगत कराया जा सकेगा।

पूर्ण रूप से, मेरा विचार था कि इस स्तर पर केवल वैज्ञानिक क्षेत्र के लोगों को आमंत्रित किया जाना बेहतर होगा न कि अन्य क्षेत्रों के लोगो को जैसे कि अर्नाल्ड तोयांबी, जिनका कि आपने ज़िक्र किया। वैज्ञानिक यह ज़िम्मेदारी महसूस करते हैं, और यह उनकी विशेष ज़िम्मेदारी भी है क्योंकि उनके काम-काज ने अनजाने वर्त्तमान खतरे उत्पन्न किये हैं। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र को विस्तृत करने पर इसे राजनीति से अलग रखना मुश्किल हो जाएगा।

भवदीय
(बर्ट्रेंड रसेल)


आइन्स्टीन ने इसका त्वरित और संक्षिप्त जवाब दिया था-


प्रिय बर्ट्रेंड रसेल,

5 अप्रेल को लिखे गए पत्र के लिए आपको धन्यवाद। मैं आपके उत्कृष्ट वक्तव्य पर हस्ताक्षर करने के लिए ख़ुशी-ख़ुशी राज़ी हूँ। मैं आपके द्वारा प्रत्याशित हस्ताक्षर करने वालों के चयन पर भी सहमत हूँ।

सादर,
(अलबर्ट आइन्स्टीन)


यह आइन्स्टीन के जीवन का अंतिम पत्र था। इस पत्र को लिखने के मात्र 13 दिन बाद, 18 अप्रैल 1955 को उनकी मृत्यु हो गई। यह संयुक्त वक्तव्य 9 जुलाई, 1955 को आधिकारिक रूप से जारी किया गया। इसे ऐतिहासिक रूप से “रसेल-आइन्स्टीन घोषणापत्र” के रूप में जाना जाता है। इसे नीचे दी गई कड़ी पर पढ़ा जा सकता है-
http://lakes.chebucto.org/GENERAL/PUGWASH/manifesto.pdf
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