शुभागमन 2019, विदा 2018



बीती बातें छोडें अब तो, आगत का सम्मान करें हम ... 

सेतु के पाठकों, उनके परिजनों, और मित्रों को नववर्ष 2019 की मंगलकामनाएँ!

कितना खोया कितना पाया,
उसका क्या हिसाब करें हम?

दर्पण पर जो धूल जमा है,
उसको कैसे साफ करें हम?

सपने भी अपने भी बिछड़े,
कब तक यह संताप करें हम?

नश्वर सृष्टि नष्ट हुई तो,
नूतन जग निर्माण करें हम।

भूल चूक और लेना-देना,
कर्ज-उधारी माफ़ करें हम।

बीती बातें छोडें और अब,
आगत का सम्मान करें हम॥

एक गीत है, मौसम आयेंगे जायेंगे ... सच है, ऋतुयें आती-जाती रहेंगी, ... लेकिन ऋत सदा रहेगा। ऋत क्या, ऋत कौन? अरे वही, 'सत्यमेव जयते, नानृतम्' वाला ऋत, संस्कृत का वही ऋतम् जिससे अंग्रेज़ी का रिदम (rhythm) निकला है। ऋतम् हमारे ज्ञात-अज्ञात जगत की शाश्वत लय है। यह ऋत ही है जो ऋतुयें लाता है, वर्षा करता है, गुरुत्वाकर्षण और ग्रहों की गति को संतुलित रखता है। सत्यमेव जयते, नानृतम् में सत्य की जय और अनृत की हार की बात है, ऋत के पक्ष में प्रकृति है ही, सत्य का समर्थन हमारा दायित्व है। और इन दोनों की लय में मानवता की विजय है। श्रीमद्भग्वद्गीता के शब्दों में कहें तो -
यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः। तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥

नववर्ष का हमारा संकल्प संसार को पहले से अच्छा बनाने का है। सेतु के माध्यम से - साहित्य, और कला के माध्यम से हम भी आपके साथ मिलकर अपने समय और प्रयास के रूप में अपना अल्प सहयोग दे रहे हैं। इस अंक को मिलाकर सेतु के 31 अंक आ चुके हैं, जिनमें अब तक 660 लेखकों की 2,800 से अधिक 'उत्कृष्ट' रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। अभिव्यक्ति वार्धक्य के युग में, सोशल मीडिया तथा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं की भीड़ के बीच सेतु की गुणवत्ता बनाये रखने के लिये मैं उन सभी विचारशील रचनाकारों का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जो यह मानते हैं कि अच्छा लिखने वाले अच्छा पढ़ते भी हैं, विशेषकर अन्य लेखकों की उत्कृष्ट रचनाओं को।

वर्ष 2019 से हम सेतु के हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों संस्करणों में अतिथि सम्पादकों को सामने लाने को उत्सुक हैं। इस क्रम में आने वाले अतिथि सम्पादकों के नामों की सूचना समयानुसार प्रस्तुत की जायेगी। यदि आप कोई उपयुक्त नाम सुझाना चाहें तो स्वागत है।

नववर्ष के उल्लास के बीच विश्व पुस्तक मेला तथा विश्व हिंदी दिवस के वार्षिक आयोजनों का भी समय है। आपमें से जिनकी भी नई पुस्तकें इन अवसरों पर लोकार्पित हो रही हैं, उन्हें मेरी ओर से हार्दिक बधाई।

सभी स्थाई स्तम्भों के साथ, यह अंक सेतु के अब तक के सबसे भारी-भरकम अंकों में से एक है। सामग्री चयन में गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए भी हमारे सम्पादकों द्वारा इस बार कुछ अधिक उदारता बरती गयी है। पढ़िये, और अपनी राय से अवगत कराइये।

नववर्ष 2019 की शुभकामनाओं सहित,

अनुराग शर्मा

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