लघुकथा: दुनिया बदल गयी प्यारे

- कपिल शास्त्री

प्रॉपर्टी बिल्डर व कॉलेज के मित्र दीपक का फ़ोन अक्सर दीपा के पास आ जाता है। आज भी आ गया, "हेलो, कैसी हो?"
"बढ़िया हूँ।"
"सुशील जी निकल गए काम से?"
"हाँ, निकल गए। कोई काम था?"
"नहीं, ऐसे ही।"
"मैं समझ रही हूँ दीपक, क्यों  पूछ रहे हो। अरे मैं उनके सामने भी तुमसे बात कर सकती हूँ। हम दोनों एक-दूसरे से कुछ नहीं छुपाते।"
"अच्छी बात है। पर मेघा तो सवालों की झड़ी लगा देती है। इसलिए मैं उसके सामने बात ही नहीं करता हूँ।... अच्छा ये पुराना गाना सुनो 'दुनिया बदल गयी प्यारे, आगे निकल गयी प्यारे'... और बताओ... आजकल की यंग जेनेरेशन के बारे में तुम क्या सोचती हो?" बातों ही बातों में दीपक ने एक सवाल रख दिया।
"अच्छी है ये जेनेरेशन। कुछ भी छुपाती नहीं है। अपने रिश्तों को लेकर स्पष्ट बात करती है। जो फ़्रेंड है फ़्रेंड है, जो बॉय फ्रेंड गर्ल फ्रेंड हैं वो वो हैं। वो तो मेरे भाई जैसा है, वो तो मेरी बहन जैसी है। कम से कम ये पाखंड तो अब नहीं रहा।" दीपा ने अपना नजरिया स्पष्ट किया।
"हूँ, गुड। तुम तो जानती हो कि मेघा और मेरी लव मैरिज थी।"
"हाँ, पता है।"
"आज तुम्हें एक राज की बात बताता हूँ। शादी से पहले हम दोनों फिजिकल हो गए थे।"
"ओ, रियअली?"
"हाँ, और मैं सेंटिमेंटल भी था तो शादी भी कर ली थी।" दीपक ने खुद को महान जताते हुए कहा।
"तो क्या नहीं करना चाहते थे?" दीपा ने उसकी नीयत पर सवाल उठाया।
"नहीं वह बात नहीं है। अब देखो न, मेरे बेटे की तीन गर्ल फ्रेंड्स हैं। आज हो सकता है वो तीनों के साथ फिजिकल हो जाये। लेकिन हो सकता है शादी किसी के साथ न करे।" दीपक की आवाज़ बेबसी झलकी।
"मतलब कि ये लोग सिर्फ मौज-मस्ती में ही विश्वास रखते हैं और वर्जिनिटी, शादी-वादी तो ब्लडी शिट ऐसा कुछ!" दीपा ने उसके दिल की बात उगलवाई।
"एग्ज़ेक्टली!" दीपक ने हामी भरी।
"वैसे हर पुरुष अपने और अपने बेटे के फिजिकल होने को बड़ी शान से बताता है। तुमने भी ऐसे बताया जैसे तुमने मेघा पर फिजिकल होने के बाद कोई अहसान किया है!"
"अरे नहीं!"
"अच्छाह यह बताओ, तुम्हारी एक बेटी भी तो है, क्या यही बात उसके बारे में भी बोल सकते हो!" दीपा ने तीखा सवाल पूछा।
जवाब में उधर से पर चीखती हुई आवाज़ आयी, "जस्ट शट अप।"
लेकिन दीपा ने अपना आपा नहीं खोया, वह बोली, "दुनिया बिलकुल नहीं बदली प्यारे।

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