अब तक छत्तीस ...

अनुराग शर्मा
आपके प्रेम और सहयोग से सेतु ने अपने तीन वर्ष, अर्थात 36 अंक पूरे कर लिये हैं। और इस उपलब्धि का श्रेय पूरी तरह से हमारे पाठकों को ही जाता है। हिंदी साहित्य और कला के क्षेत्र में मील के इस पत्थर को हमने एक उल्लासमय पर्व की तरह मनाया, 25 मई, 2019 को टोरण्टो (कैनेडा) में एक-दिवसीय गोष्ठी और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के रूप में, जिसमें अमेरिका, कैनैडा, और भारत से हिंदी और अंग्रेज़ी के साहित्यकारों और शिक्षकों ने भाग लिया। सम्मेलन में भाग लेने वाले हिंदी साहित्यकारों में हंसा दीप, अखिल भण्डारी, सरन घई, सुमन घई, समीर लाल, अजय गुप्ता, तथा धर्मपाल महेंद्र जैन के नाम प्रमुख हैं। जो मित्र इस आयोजन में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न हो सके, उनके लिये समारोह की एक चित्रावली इस अंंक में प्रस्तुत है।

सेतु अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन में हिंदी और अंग्रेज़ी काव्यपाठ तथा पत्र-वाचन के अतिरिक्त तीन पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ। अनेक मित्र जो अब तक एक दूसरे को पढ़ते, सुनते रहे थे, इस आयोजन में पहली बार एक दूसरे से मुखातिब हुए। इससे पहले मैत्रेयी पुष्पा जी की उपस्थिति में सेतु ने 2017 में लखनऊ में एक साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया था जो मुख्यतः हिंदी-केंद्रित था। हमारी योजना संसार के विभिन्न क्षेत्रों में इस प्रकार के आयोजन भविष्य में भी जारी रखने की है।

सेतु साहित्य सम्मेलन में श्री सुमन घई
इस अंक में भारत से ऋचा जोशी की लघुकथा, तथा रवींद्र कुमार यादव की कहानी के साथ ब्रिटेन की दो प्रसिद्ध लेखिकाओं कादम्बरी मेहरा तथा उषा राजे सक्सेना की रचनाएँ एक साथ उपस्थित हैं। काव्य, यात्रा, समीक्षा, धरोहर, कला और शोधपत्रों के साथ-साथ विज्ञान इस अंक में भी पहले अंकों जैसे ही विद्यमान है।

इस अंक में एक बार फिर हिंदी लेखन में गुणवत्ता बनाये रखने की ओर आपका ध्यान दिलाना चाहता हूँ। हमें मिल रही सामग्री में अभी भी त्रुटियों का बाहुल्य है। दुःख इस बात का है कि अंग्रेज़ी प्रेषणों की तुलना में हिंदी में यह लापरवाही कई गुणा अधिक दिख रही है, जबकि अनेक प्रेषक रचनाकार हिंदी के व्याख्याता, आचार्य तथा बहु-प्रकाशित लेखक हैं। बेशक़ सेतु में प्रकाशन से पहले हर रचना के हर शब्द को जाँचने और सुधारने का प्रयास किया जाता रहा है, लेखकों की असावधानी इस कार्य को अत्यंत श्रमसाध्य बना देती है। कृपया हिंदी लेखन में भी वैसी ही सावधानी बरतें जैसी आप अंग्रेज़ी बोलने और लिखने में बरतते हैं और सेतु में कुछ भेजने से पहले कृपया 'लेखकों से अनुरोध' तथा उसमें लिंकित आलेख अवश्य पढ़ें।

सेतु के इस अंक के बारे में भी आपकी राय और सुझावों का स्वागत है। हमारे पाठक ही हमारे मार्गदर्शक हैं, संवाद बनाये रखिये। धन्यवाद!

शुभाकांक्षी,
अनुराग शर्मा



3 comments :

  1. अनुराग जी, एक सुझाव है कि सम्‍पादकीय को भी इटेलिक की बजाय नियमित फांट में ही दें। फिलहाल इसमें जो फांट प्रयुक्‍त किया जा रहा है, वह पढ़ने में असुविधाजनक है। - राजेश उत्‍साही

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  2. प्रिय अनुराग जी,

    सेतु अंतर्राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन का सफल आयोजन सेतु की साहित्य-यात्रा की ही एक कड़ी है मील का पत्थर है।यों सामान्यतया तीन वर्ष किसी पत्रिका के जीवन-काल में बहुत नहीं होते, पर शैशव का यह छोटा समय भी भविष्यपथ-निर्धारण में बड़ी भूमिका निभा सकता है। जिस तरह संयुक्त-राज्य अमेरिका अपने मात्र तीन सौ सालों के लघु जीवन-काल में सबसे पुराना लोकतंत्र बन गया वह परिपक्वता एवं परिवर्तन की गतिकी (dynamics) की विशेषता को चित्रित करता है। सेतु के जीवनकाल का यह अपेक्षाकृत छोटा समय भी आने वाले समय में उसी तरह प्रभावी होगा ऐसी कामना है और इसके लिये सेतु के पाठकों व लेखकों की भूमिका सार्थक होनी होगी इसमें संदेह नहीं परन्तु संपादक व संपादन-मंडल की भूमिका निर्विवाद एवं अद्वितीय है। यह एक अभियान होगा एवं चुनौती भी (कवि मुक्तिबोध के शब्दों में)-
    मेरी एक चुनौती के सौ अभिप्राय
    मालूम मुझे क्या था
    कि खड़ा मेरे अंदर-
    फावड़ा टेक कर
    विश्व-युगांतर महाकाय।

    चन्द्रमोहन भंडारी

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