ता ता थय्या - ता प्रत्यय का दुरुपयोग

- अनुराग शर्मा


अर्थ की जगह सार्थकता लिखने में कई अक्षर व्यर्थ होते हैं।
सृजनात्मक अभिव्यक्ति में सुंदर, अनूठे, और अल्पप्रयुक्त शब्दों का अपना महत्व है। लेकिन कई बार बात सही शब्द के अभाव में अटक सी जाती है। सही समय पर  सही शब्द याद न आने पर कभी-कभी ध्वनि, या अर्थ के मामले में मिलते-जुलते शब्दों का प्रयोग हो जाना सामान्य बात है। लेखक कभी-कभार अन्य भाषाओं से शब्द उधार ले लेते हैं और कभी-कभी नवोन्मेष भी करते हैं। यह प्रक्रिया कई बार हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न कर देती है। इस आलेख में हम बात करेंगे 'ता' पर समाप्त होने वाले कुछ प्रयोगों पर।

आधुनिक ऑनलाइन हिंदी लेखन में ता पर समाप्त होने वाले शब्द बहुतायत में दिखते हैं। कई तो पहली नज़र में ही असामान्य से लगते हैं, और कुछ के प्रयोग के बारे में शंका होती है। सेतु में नवोदित लेखकों की सहायता के उद्देश्य से प्रस्तुत किये गये आलेख 'कृपया सही लिखें' में हिंदी के प्रचलित शब्दों के अंत में अनावश्यक रूप से ता जोड़ने की प्रवृति का एक त्वरित संदर्भ आया था। लगता है कि उस पर एक विस्तृत आलेख की आवश्यकता थी, जो अब यहाँ प्रस्तुत है।

किसी शब्द के अंत में 'ता' जोड़कर उसका अर्थ परिवर्तन करने वाला तद्धित प्रत्यय 'ता' सामान्यतः किसी संज्ञा, सर्वनाम, या विशेषण पद में जुड़कर उसे भाववाचक संज्ञा में बदल देता है। लेकिन यह मनमर्ज़ी से न होकर एक स्थापित व्यवस्था के नियमों के अनुसार ही होता है, जिसका सम्मान लेखकों से अपेक्षित है। ता का दुरुपयोग दो प्रकार से हो रहा है। पहली स्थिति वह जहाँ किसी भी शब्द के अंत में 'ता' चिपकाकर एक नया निरर्थक शब्द बनाकर किसी सार्थक शब्द के स्थान पर प्रयोग किया जा रहा है। ऐसा करना बिल्कुल ग़लत है, इसे तुरंत रोकिये। दूसरी स्थिति वह है जहाँ ता वाला शब्द तो वास्तविक है परंतु वाक्य में जिस प्रकार उसका प्रयोग हुआ है वह सही नहीं है। ऐसे दुरुपयोग से भी हम सबको सायास बचना चाहिये। उदाहरण के लिये 'संतुष्टता' जैसा शब्द बनाने के स्थान पर 'संतोष', 'तुष्टि', या 'संतुष्टि' जैसे किसी शब्द का प्रयोग उचित है। 'महसूसता है' लिखने वाला लेखक वास्तव में महसूस होता है' या 'महसूस करता है' जैसा कुछ लिखना चाहता है। स्वाबलंबिता की जगह स्वावलम्बन का प्रयोग किया जा सकता है।  यदि सार्थकता एक मानक शब्द है तो भी, अर्थ की जगह सार्थकता लिखना सही नहीं है, ऐसा करने में कई अक्षर भी व्यर्थ होते हैं। क्षमता के स्थान पर सक्षमता लिखना एकदम अनावश्यक है, भले ही किसी शब्दकोश में ये दोनों शब्द समानार्थी के रूप में दिये गये हों। सत्यता शब्द का प्रयोग भी कई जगह देखा लेकिन एक भी उदाहरण ऐसा नहीं मिला जहाँ सत्यता को सत्य से हटाया न जा सके। मतलब यह कि सत्यता के उन सभी प्रयोगों में दरअसल 'सत्य' का प्रयोग किया जाना चाहिये था। सबसे मज़ेदार प्रयोग उचितता का मिला, ऐसा कोई शब्द नहीं, उसकी आवश्यकता भी नहीं है।

नीचे कुछ ऐसे अजीबोगरीब शब्दों के और उनके प्रयोग के वास्तविक उदाहरण दिये जा रहे हैं जो इंटरनैट पर बिखरे हुए हैं, और कई बार आलस्यवश लेखकों द्वारा प्रयुक्त भी कर लिये जाते हैं। इन का प्रयोग न किया जाना अच्छा है। यदि आप स्वयं को एक लेखक मानते हैं, या बनना चाहते हैं तो शब्दालस्य त्यागकर अच्छा लिखने की आदत डालिये। और हाँ, नये लेखकों के लिये एक आवश्यक सुझाव और: अच्छा पढ़ने-सुनने वालों के लिये अच्छा लिखना सरल होता है। केवल अपना ही लिखा पढ़कर अच्छा लेखन असम्भव सी बात है। आपकी सहायता के लिये अंतरजाल पर पाये गये कुछ उदाहरण और उनके सम्भावित मंतव्य पर आधारित विकल्प नीचे दिये जा रहे हैं: उनके उपयोगी विकल्पों के सुझाव भी साथ ही दे दिये गये हैं। इनका प्रयोग आप संदर्भ की तरह भी कर सकते हैं।

आइये देखें कुछ उदाहरण
मूल वाक्य: मौसम की कंपकंपी और शीतलता से हमारी सुबह की क्रियाशीलता देर से शुरू होती है
संशोधित: मौसम की कंपकंपी और शीत से हमारी सुबह की गति देर से शुरू होती है

मूल वाक्य: दोनों ही अनुचित हैं और अपने उचितता को स्थापित करने में गतिशील भी
संशोधित: अनुचित होते हुए भी दोनों अपना औचित्य स्थापित करने में गतिशील हैं

मूल वाक्य: समय की उचितता-अनुचितता भी कुछ मायने रखती है
संशोधित: समय का औचित्य-अनौचित्य भी कुछ मायने रखता है

सर्वाधिक दुरुपयोग सार्थकता का हो रहा है। नीचे सार्थकता के इंटरनैट से लिये गये कुछ उदाहरण और सम्बंधित सुझाव दिये जा रहे हैं:

मूल वाक्य: अपने अंदर के अहंकार को समाप्त करने मे ही दशहरा की सच्ची सार्थकता है
संशोधित: अपने अंदर के अहंकार को समाप्त करके ही दशहरा सार्थक है

मूल वाक्य: बुल-मदर फार्म की सार्थकता तभी जब गायो की उन्नत नस्ल बढ़े
संशोधित 1: बुल-मदर फार्म की उद्देश्य-पूर्ति गायों की उन्नत नस्ल की वृद्धि में ही है
संशोधित 2: गायों की उन्नत नस्ल की वृद्धि ही बुल-मदर फार्म का उद्देश्य है

मूल वाक्य: बाँधों की सार्थकता पर विचार किया जाना चाहिए
संशोधित: बांधों की उपयोगिता पर विचार किया जाना चाहिए

मूल वाक्य: उसके बयान से निवेदन मार्च की सार्थकता प्रमाणित
संशोधित: उसके बयान से निवेदन मार्च की सफलता सिद्ध

मूल वाक्य: नारी दिवस की सार्थकता
संशोधित: नारी दिवस का अर्थ, उद्देश्य, या प्रासंगिकता

मूल वाक्य: प्रश्न अनुकरण का नहीं, सार्थकता का है
संशोधित: प्रश्न अनुकरण का नहीं, अर्थ/औचित्य का हैै

मूल वाक्य: केवल फ़ोटो खींचना किसी स्मार्टफोन कैमरे की सार्थकता नहीं हो सकती इससे आगे बढ़कर स्मार्टफोन चिकित्सा विज्ञान में अपनी बेहतर सार्थकता साबित कर सकते है।
संशोधित: किसी स्मार्टफोन कैमरे का उद्देश्य केवल फ़ोटो खींचना नहीं हो सकता। इससे आगे बढ़कर स्मार्टफोन चिकित्सा विज्ञान में अपना बेहतर उपयोग/मूल्य साबित कर सकते हैं।

मूल वाक्य: यह अभियान अगर लोगों के इस कुटैव पर लगाम लगा पाया तो इसकी सार्थकता सिद्ध हो जायेगी।
संशोधित: यह अभियान अगर लोगों के इस कुटैव पर लगाम लगा पाया तो ही सार्थक सिद्ध होगा।
संशोधित: लोगों के इस कुटैव पर लगाम लगा पाने पर ही यह अभियान सार्थक सिद्ध होगा।

मूल वाक्य: मदर्स डे की सार्थकता तभी है जब आप आज ही से अपनी माँ की माँ बन जाओ।
संशोधित: आप आज से ही अपनी माँ की माँ बन जायें तब ही मदर्स डे सार्थक / अर्थपूर्ण / अर्थवान है।
संशोधित: मदर्स डे तभी सार्थक है जब आप आज से ही अपनी माँ की माँ बन जायें।

मूल वाक्य: निरर्थक बातों से बवाल मचाकर पोस्ट के रस-उद्देश्य, सार्थकता से वंचित रह जानेवाले फुफ्फा लोग फेसबुक पर भी कम नहीं हैं।
संशोधित: निरर्थक बातों से बवाल मचाकर पोस्ट के रस, उद्देश्य, और अर्थ से वंचित रह जानेवाले फुफ्फा लोग फेसबुक पर भी कम नहीं हैं।

मूल वाक्य: इस बेहद सुलझे हुए व्यक्तित्व के पीछे की सार्थकता क्या है?
संशोधित: इस बेहद सुलझे हुए व्यक्तित्व का यथार्थ क्या है?
संशोधित: इस बेहद सुलझे हुए व्यक्तित्व की वास्तविकता क्या है?

मूल वाक्य: एक पूरे पृष्ठ पर केवल नाम लिख कर छोड़ देना ही उस अध्याय के लिखे जाने की सार्थकता होगी।
संशोधित: एक पूरे पृष्ठ पर केवल नाम लिख कर छोड़ देने से ही वह अध्याय सार्थक हो जायेगा।

मूल वाक्य: प्रयाग प्रवास की सार्थकता और बढ़ गई जब वहाँ संतो को रामकथा की प्रेमधारा में तिरते देखा।
संशोधित: संतो को रामकथा की प्रेमधारा में तरते देखकर प्रयाग प्रवास सार्थक हो गया।

मूल वाक्य: अनेक लेखकों ने शब्द की सार्थकता मार्मिकता प्रमाणित की है।
संशोधित: शब्द का मर्म और अर्थ अनेक लेखकों द्वारा प्रमाणित है।

ता पर अंत होने वाले कुछ सोशल-मीडिया-प्रिय शब्द और उनके विकल्पों की एक सीमित सूची नीचे दी जा रही है जो कि न तो सम्पूर्ण है और न हर मामले के लिये समुचित। लेकिन फिर भी उपरोक्त सीमित उद्धरणों के सम्बंध में आपको सही दिशा की ओर ले जा सकती है:

अनुचित शब्द सही विकल्प / सुझाव
मुग्धता मोह
संबद्धता सम्बन्ध
अभावग्रस्तता अभाव
जीवंतता जीवन
जीवटता जीवट
उद्विग्नता उद्वेग
विरक्तता विरक्ति
रिक्तता रिक्ति
क्षुब्धता क्षोभ
प्रस्तुतता प्रस्तुति
संतुष्टता संतोष, संतुष्टि, तुष्टि
सत्यता सत्य, सच्चाई
शृंखलाबद्धता शृंखलाबंधन
सार्थकता औचित्य, अर्थपूर्ण, उद्देश्य, अर्थ,
सार्थक, (उदाहरण देखिये)
सक्षमता क्षमता
सततता सातत्य
उचितता औचित्य
क्रियाशीलता क्रिया, या गति
शीतलता शीत, ठंडक
समर्थता सामर्थ्य
विशिष्टता विशेषता

लेखन का अर्थ (यहाँ पर कई लोग अर्थ की जगह सार्थकता का प्रयोग करते, आप कृपया ऐसा न करें) लम्बे चौड़े निरर्थक और सारहीन वाक्य जमाने में नहीं बल्कि कम से कम शब्दों में किये गये स्पष्ट उद्गार में है। आपके शब्द सामर्थ्य और ज्ञान-क्षेत्र जितने अधिक विस्तृत होंगे, आपकी अभिव्यक्ति उतनी ही प्रभावी होगी। शब्दों के दुरुपयोग के अधिकांश उदाहरण वे हैं जहाँ भारी-भरकम शब्द ज़बरदस्ती जमाने का प्रयास किया गया है। दूसरे वर्ग में वे उदाहरण आते हैं जहाँ लेखक को पता ही नहीं कि वह कहना क्या चाहता है। इसलिये लिखने या कहने से पहले सोचिये कि आप क्या कहना चाहते हैं, और उसे कम से कम शब्दों में, सरल भाषा में,  स्पष्ट रूप में कैसे कह सकते हैं।

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