मेडिकल टूरिज्म: पर्यटन की दिशा में एक नयी सोच

-धर्मेन्द्र कुमार त्रिपाठी

पर्यटन क्षेत्र में शोधरत। सहायक प्रबंधक, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में आलेख एवं अन्य साहित्यिक सामग्री प्रकाशित।
पता: गोमती गेस्ट हाउस, तानसेन मार्ग, मंडी हाउस, नई दिल्ली-110001
चलभाष: +91 991 063 1043; ईमेल: dktripathi@mail.jnu.ac.in

चिकित्‍सा पर्यटन या स्वास्थ्य पर्यटन के लिए भारत एक असीम संभावना वाला देश है जिसमें स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के साथ-साथ भारत की खूबसूरत जगहों को भ्रमण करने का मौका मिलता है। इसमें ऐसी चिकित्सा शामिल है जो आपातकालीन नहीं होती है। चिकित्सा पर्यटन के लिए भारत आकर ऐतिहासिक धरोहरों को देखने के साथ-साथ अपना इलाज कराना विदेशियों को खूब भा रहा है। भारत में बड़ी बीमारियों का इलाज अमेरिका व यूरोप के देशों की तुलना में लगभग 80% सस्ता है। जिससे विदेशी मरीज भारत की ओर रुख कर रहे हैं। भारतीय अस्पताल बेहद कम खर्च पर अमेरिका व यूरोप की तरह आधुनिक चिकित्सा मुहैया करा रहे हैं। विदेशी मरीजों को अपनी ओर खींचने का एक और कारण कम समय में बेहतर इलाज़ भी है। अगर हम अमेरिका की बात करें तो वहाँ जरूरतमंद मरीजों को हफ्ते व महीने भर की  प्रतीक्षा सूची में डाल दिया जाता है बल्कि भारत में इन मरीजों के लिए सिंगल विंडो काउंटर सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। पिछले कुछ सालो में भारत के मैट्रोसिटी जैसे दिल्ली, मुंबई, बेगळूरु व चेन्नई के अस्पतालों ने खूब मुनाफा कमाया है जिसका कारण रहा मेडिकल टूरिज्म।

आधुनिक चिकित्सा से परिपूर्ण भारतीय अस्पतालों के कारण विश्व मानचित्र पर भारत इस क्षेत्र में अपनी जगह तेजी से बना रहा है। यही नहीं चिकित्सा पर्यटन कारोबार में भारत 60 अरब का आंकड़ा पार कर चुका है। एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत को मेडिकल टूरिज्म से प्रति वर्ष हजारों करोड़ रुपयों का मुनाफा होता है। भारत सरकार ने 18 दिसम्बर, 2017 को संसद में कहा था कि भारत में चिकित्सा-पर्यटन का मूल्य वर्ष 2020 तक नौ अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है जो 2015 में तीन अरब डॉलर थी। पर्यटन राज्य मंत्री ने लोकसभा को एक प्रश्न के लिखित जवाब में यह जानकारी दी थी कि भारत पिछले कुछ वर्षों में एक प्रमुख चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र के रूप में उभरा है। वाणिज्य मंत्रालय की 2016 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत शीर्ष छह चिकित्सा गंतव्यों में शामिल है। पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर विकास को देखते हुए 2020 तक हम एक नए पायदान पर खड़े होंगे और पर्यटकों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी से 2025 तक पर्यटकों की संख्या लगभग 49 लाख के पार हो जाएगी। इससे न केवल भारत को आर्थिक रूप से लाभ होगा बल्कि नए रोजगार की संभावनाएँ भी पैदा होगी।

पिछले कुछ सालों में सस्ती कीमत के कारण भारत आने वाले पर्यटकों की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। भारत में कई सारे इलाज  जैसे बाइपास सर्जरी, घुटने की सर्जरी, व अन्य प्रत्यारोपण पश्चिमी देशों के मुकाबले बेहद कम खर्च में हो जाते हैं। विदेश से इलाज़ कराने भारत आयी एक महिला से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उनके नाक की जो सर्जरी उनके देश में 70-80 हज़ार में होती है उसके लिए यहाँ मात्र 35 हज़ार रुपये देने पड़े। ऐसे ही अनेक प्रत्यारोपण व सर्जरी जो पश्चिम के देशों में लाखों में पड़ते है वे भारत के अस्पतालों में हज़ारों में हो जाते हैं।

पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत में आने वाले चिकित्सा पर्यटकों की संख्या में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह भारत आने-जाने में विमान खर्च सहित इलाज पर होने वाले कुल खर्च विदेशों में होने वाले इलाज की तुलना में काफी कम है। ब्यूरो ऑफ़ इमीग्रेशन के आंकड़ों के अनुसार भारत आने वाले चिकित्सा पर्यटकों में शीर्ष पाँच देशों में बांग्लादेश पहले स्थान पर, अफगानिस्तान दूसरे, इराक तीसरे, ओमान चौथे और मालदीव पाँचवें स्थान पर है। भारत में चिकित्सा पर्यटन के विकास का मुख्य जरिया बेहतर चिकित्सा और कम कीमत को माना जा रहा है इसके साथ-साथ इस देश के आदर-सत्कार करने का तरीका भी विदेशियों को खूब भा रहा है। पर्यटन मंडल को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मंत्रालय नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रही है व अतुल्य भारत इसकी देखरेख कर रहा है।

एशियाई देशों में मेडिकल टूरिज्म के लिहाज़ से भारत पहले नंबर पर है। भारत के बढ़ते व्यापर को देखकर अब थाईलैंड, सिंगापुर, चीन और जापान जैसे देश भी पर्यटकों को लुभाने की कोशिश में लग गये हैं। पिछले कुछ सालों की बात करें तो भारत आने वाले विदेशी मेडिकल पर्यटक मेडिकल के विभिन्न क्षेत्रों की सुविधाएं ले रहे हैं। जिसमें होमियोपैथी में 8%, आयुर्वेदिक एंड स्पा में 7%, मैडिटेशन एंड योग में 16%, नेचुरोपैथी में 11%, एलोपैथी में 58% विदेशी मरीजों ने अपना इलाज़ कराया। इससे यह देखने को मिला कि विदेशी पर्यटक ने एलोपैथी को ज्यादा महत्व दिया है क्योंकि एलोपैथी ने भारत के अस्पतालों में अपनी जड़ मजबूत की हुई है जिसका कारण है कि एलोपैथी में तुरंत आराम और बहुत सारी सर्जरी व प्रत्यारोपण शामिल है। अगर मैडिटेशन व योग की बात करें तो पिछले कुछ वर्षो में इस क्षेत्र ने भी अपनी अच्छी जगह बनायी है। भारत आयुर्वेद व योग एंड मैडिटेशन के मामले में काफी धनी है जो बड़ी संख्या में इलाज़ करने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है।

भारत के पाँच मुख्य वायुपत्तन, जैसे मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद, बेगळूरु व चेन्नई में पर्यटन विभाग द्वारा  फैसिलिटेशन सेंटर खोला गया है जिससे दूसरे देश से आने वाले मेडिकल पर्यटकों को मेडिकल से जुड़ी जानकारियां मुहैया करायी जाएगी। यहाँ वीजा ऑन-अराइवल की सुविधा होने के कारण मरीजों को काफी सहूलियत हुई है और दूसरी जो बड़ी समस्या देखने में सामने आई थी वह भाषा समझने और समझाने की दिक्क़त थी।  इससे निपटने के लिए सभी अस्पतालों ने लैंग्वेज इन्टरप्रेटर और अनुवादकों को काम पर रखा है। इससे न केवल पर्यटकों को अच्छी सुविधा मिलेगी बल्कि नए रोजगार भी पैदा होंगे। प्रत्येक अस्पताल जो मेडिकल टूरिज्म की सुविधा प्रदान कर रहे हैं उन्होंने पर्यटकों के सुविधा के लिए गेस्ट रिलेशन ऑफिसर की भी नियुक्ति की है जिनका काम मरीजों के पूरी देखरेख करना व सारी सुविधाएँ दिलाना है।

आज के युवा मेडिकल पर्यटन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में लगे हैं और इसका मुख्य कारण है कौशल भारत कुशल भारत योजना। इस योजना की मदद से युवा पर्यटन के क्षेत्र में अपना रोजगार शुरू कर रहे हैं और विदेश से आने वाले पर्यटकों को उनकी बीमारी के हिसाब से मेडिकल ट्रीटमेंट पैकेज उपलब्ध करवा रहे हैं। इस पैकेज के अन्दर पर्यटकों को न केवल मेडिकल ट्रीटमेंट दिया जाता है बल्कि उनके रहने की व्यवस्था, उनके मनपसंद खाने की सुविधा व पर्यटन करने के लिए पूरा इंतजाम भी कराया जाता है। पिछले दिनों मैक्स से लैब डिप्लोमा कर रही मोनिका से बातचीत में पता चला कि वह मेडिकल के साथ साथ इगनू दिल्ली से पर्यटन में स्नातक भी कर रही हैं। इस क्षेत्र में युवा मेडिकल कोर्सेस के साथ-साथ पर्यटन के क्षेत्र वाले कोर्स कर रहे हैं और उसके बाद अपना स्वरोजगार स्थापित कर रहे हैं। यह क्षेत्र आने वाले दिनों में एक अच्छा  रोजगार उपलब्ध कराने का क्षेत्र साबित होगा। यदि हम पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करना जारी रखें तो इस क्षेत्र में भारत काफी आगे जा सकता है।

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