आओ हिंदी सीखें - भाग 12

डॉ. सत्यवीर सिंह

सत्यवीर सिंह

सहायक आचार्य (हिंदी)
ला. ब. शा. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोटपूतली (जयपुर) 303108, राजस्थान, भारत
चलभाष: +91 979 996 4305; ईमेल: drsatyavirsingh@gmail.com

अनेक शब्दों या वाक्य के लिए एक सार्थक शब्द

वक्ता अपनी भावाभिव्यक्ति को स्पष्ट करने के लिए भाषा का सहारा लेता है। हमें अपनी बात का स्पष्ट करने के लिए एक शब्द, अनेक शब्दों तथा वाक्य का सहारा लेना पड़ता है।  कभी-कभी एक ही भाव को स्पष्ट करने के लिए एक व्यक्ति अनेक शब्दों का उपयोग करता है, तो उसी भावाभिव्यक्ति को स्पष्ट करने के लिए दूसरा व्यक्ति एक ही शब्द में संपूर्ण अनुभूति को अभिव्यक्त देता है। अतः यह स्पष्ट है कि हम जो बात कहना चाहते हैं उसके लिए एक वाक्य का भी प्रयोग कर सकते हैं तथा एक शब्द का भी।  अनेक शब्दों को एक शब्द में अभिव्यक्त करने की इस पद्धति को व्याकरण शास्त्र में 'अनेक शब्दों या वाक्य के लिए एक सार्थक शब्द' नाम दिया गया है।

अनेक शब्दों, वाक्यांश, वाक्य के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग अभिव्यक्ति की नयी पद्धति नहीं है। प्राचीनकाल में समास या सूत्र शैली के रूप में इसका प्रयोग होता था, जिसे अब हम अनेक शब्दों के स्थान पर एक शब्द नाम देते हैं। इस पद्धति (शैली) का साहित्यकारों ने बहुत प्रयोग किया है। जिसमें  गागर में सागर भरने की क्षमता होती है। लंबे- लंबे वाक्यों के प्रयोग के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग जिसमें समस्त शब्दों का भाव निहित हो, तो इससे बेहतर शैली कदाचित दूसरी नहीं है। इस तरह के शब्दों को निम्नलिखित तालिका में दिया जा रहा है। आइए इस तालिका में इन शब्दों को देखें और अपने लेखन तथा अभिव्यक्ति कौशल को मजबूत बनाएँ-

(अ से औ सभी स्वर)
● जिसका कोई शत्रु न जन्मा/उत्पन्न हुआ हो- अजातशत्रु
● जिसके आने की तिथि ज्ञात न हो- अतिथि
● जिसका जन्म पहले हुआ है-  अग्रज
● अपनी बात पर से मुकरे नहीं- अटल
● इंद्रियों की पहुँच से दूर- अतींद्रिय
● मध्यमा और कनिष्ठा के मध्य की उँगली- अनामिका
● निम्न वर्ग में जन्मा हुआ- अंत्यज
● मुख्य कथा के मध्य लघु कथा- अंतः कथा
● परंपरा से चल रही कथा- अनुश्रुति
● अविवाहित स्त्री- अनूढ़ा
● जिसका ज्ञान नेत्रों तथा इंद्रियों द्वारा न हो- अगोचर
● वह, जो कभी बूढ़ा न हो- अजर
● जिसे जाना न जा सके- अज्ञेय
● एक दूसरे राष्ट्रों के मध्य- अंतरराष्ट्रीय
● जिसका कोई स्वामी न हो- अनाथ
● जिसके शरीर की केवल हड्डियाँ शेष रह गई हैं- अस्थिशेष
● एक दूसरे पर परस्पर आश्रित- अन्योन्याश्रित
● किसी को प्राप्त करने की प्रबल इच्छा- अभीप्सा
● दूसरे देश से सामान क्रय कर मँगवाना- आयात
● विचारों के ऐसा प्रवेग जिसमें निर्णय न निकाल सके- ऊहापोह
● पदार्थ का सबसे लघु इंद्रिय ग्राह्य भाग या मात्रा- अणु
● आवश्यकता से अधिक वर्षा/वृष्टि होना- अतिवृष्टि
● वह, जो इंद्रियों की पहुँच से बाहर है- अतींद्रिय
● किसी बात या कथन का बढ़ा चढ़ाकर वर्णन करना- अतिशयोक्ति/ अत्युक्ति
● जिसको न जीता जा सके- अजेय
● धरती और आकाश के बीच की जगह- अंतरीक्ष
● विधान मंडल द्वारा पारित या स्वीकृत नियम- अधिनियम
● सरकार द्वारा प्रकाशित अथवा सरकारी गजट में छपी सूचना- अधिसूचना
● जिस स्त्री के पति ने दूसरा विवाह कर लिया है- अध्यूढ़ा
● जिसमें दूसरों के दोष ढूंढने की आदत न हो- अनसूया
● दुपहर के पश्चात का समय- अपराह्न
● कानून के विरुद्ध कार्य- अवैध
● बिना बुलाएँ आया है- अनाहूत
● जो सबके मन की बात जानता है- अंतर्यामी
● नीचे की तरफ ले जाना- अपकर्ष
● जो कुछ नहीं जानता- अज्ञ
● व्यर्थ में धन खर्च करना- अपव्यय
● जो कभी पूर्व में नहीं हुआ- अभूतपूर्व
● बहुत कम जानने वाला- अल्पज्ञ
● बिना चाहे मिल जाना- अयाचित
● मृत्यु के समीप होना- आसन्नमृत्यु
● बारिश न होना-  अनावृष्टि
● वित्तीय कार्यों की जाँच करने लाला- अंकेक्षक
● जिस पत्र में किसी को कार्य करने का अधिकार सौंपना- अधिपत्र
● घर के दरवाजे तथा आँगन में रंगोली बनाने की कला- अल्पना
● फेंककर चलाये जाने वाला हथियार- अस्त्र
● वह स्त्री जो कभी सूर्य के भी दर्शन नहीं कर पाती- असूर्यपश्या
● जो शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं- आशुतोष
● अतिथि का सत्कार करने वाला- आतिथेय/मेजबान
● गुरु के नजदीक, समीप रहने वाला शिष्य- अंतेवासी
● जिस स्त्री का पति परदेश से वापस आया है- आगतपतिका
● जिस स्त्री का पति परदेश से आने वाला है- आगमिष्यतपतिका
● जो तत्काल कविता करने वाला कवि- आशुकवि
● पैरों से लेकर मस्तक तक- आपादमस्तक
● वह शिशु जो जन्म लेते ही मृत्यु को प्राप्त हो गया- आदंडपात
● जो अपने आचरण से पवित्र है- आचारपूत
● देश के वे मूल रहवासी जो बहुत पहले से निवास कर रहे हैं-  आदिवासी
● संकेत लिपि (शीघ्र लिपि) को जानकर लिखने वाला- आशुलिपिक
● माँ-बाप द्वारा त्यागा व किसी अन्य द्वारा स्वीकार किया गया पुत्र- अपविद्ध पुत्र
● जिस स्त्री के पति और पुत्र दोनों न हो- अवीरा
● राजा के महलों का आंतरिक भाग- अंतपुर
● अंडे से उत्पन्न होने वाला- अंडज
● जिसकी बाँहें घुटने तक पहुँचती है- आजानुबाहु
● पर्वत का ऊपरी भाग- अधित्यका
● पर्वत के नीचे समतल भूमि- उपत्यका
● मकान का उत्तर-पूर्व दिशा/भाग- ईशान
● ईश्वर की सत्ता में विश्वास करने वाला- आस्तिक
● जिसका मन किसी अभिष्ट काम से हटकर अन्य कार्य में लग जाए- अन्यमनस्क
● वेतन के बिना कार्य करना- अवैतनिक
● उर/छाती के बल रेंगकर चलने वाला- उरग (साँप)
● भोजन करने बाद थाल में शेष/बचा भोजन- उच्छिष्ट
● उपजाऊ भूमि- उर्वरा
● बंजर या अनुपजाऊ भूमि- ऊसर
● ऊसर भूमि को उर्वर बनाने वाले पदार्थ- उर्वरक (खाद)
● सूर्योदय से पहले का समय--उषाकाल (ब्रह्ममुहूर्त)
● इस लोक से संबंधित- इहलौकिक, ऐहिक
● जो खाने योग्य न हो- अखाद्य
● प्रेमी-प्रेमिका की छुपकर  मिलन क्रिया- अभिसार
● वह स्त्री जो छुपकर प्रेमी से मिलती है- अभिसारिका
● वह पुरुष जो रंगमंच पर अभिनय करता है- अभिनेता
● वह स्त्री जो रंगमंच पर अभिनय करती है- अभिनेत्री
● आँखों की दृश्य सीमा से दूर  होना- परोक्ष/अप्रत्यक्ष
● आदि से लेकर अंत तक की स्थिति- आद्योपांत
● विवाहित पत्नी से उत्पन्न पुत्र- औरस
● विश्व के सभी देशों की सर्वोच्च खेल प्रतियोगिता- ओलम्पिक
● विशेष अवसर पर विशिष्ट लोगों के बीच दिया गया भाषण- अभिभाषण
● विशेष कार्य के लिए दी जाने वाली सरकारी आर्थिक सहायता- अनुदान
● आत्मा और परमात्मा के बीच अभेद संबंध- अद्वैतवाद
● जिस पद्य के अंत में तुक न मिलती है- अतुकांत
● जो आक्रमण से रहित है- अनाक्रांत
● धरती को फोड़कर जन्मा हुआ- उद्भिज
● आकाश भेदी स्वर- अभ्रभेदी
● जो परिणय सूत्र में बँधा हुआ नहीं है- अपरिणीत
● स्वयं द्वारा उत्साह और परिश्रमपूर्वक किया गया कार्य- अध्यवसायी
● सांसारिक वस्तुओं के आकर्षक- आसक्ति
● जिस वस्त्र को पहना न गया हो- अप्रहत
● देखरेख रहित जानवर- अनेर

(क वर्ग)
● किसी काम को किया जाए या नहीं यह निर्णय न कर सकने वाला- किंकर्तव्यविमूढ़
● किए गए उपकार को नहीं मानने वाला- कृतघ्न
● किसी के द्वारा किए गए उपकार को मानने वाला- कृतज्ञ
● कृष्ण पक्ष (अँधेरी रात) में अभिसार (छुपकर मिलना) करने वाली स्त्री- कृष्णाभिसारिका
● जिस व्यक्ति को बाहरी दुनिया का ज्ञान न हो- कूपमंडूक
● जिसका जीवन सदैव कष्टों से भरा हुआ रहा है- कंटकाकीर्ण
● जिसका जन्म उच्च कुल हुआ है- कुलीन
● सजातीय पुत्र को स्वीकार कर लेना- कृत्रिम पुत्र
● कन्या से उत्पन्न पुत्र - कानीन
● खरीदा गया पुत्र- क्रीतक
● शराब बनाने वाला- कलवार
● कान के नीचे लटकता हुआ कोमल भाग- कर्णपाली
● सुंदर लंबे केशों वाली स्त्री- केशिनी
● वह स्त्री जिसका पति रात्रिकाल में पर स्त्री गमन करके घर आता है- खंडिता
● जिस ग्रहण में सूर्य या चंद्रमा का दिखाई न देना- खग्रास
● संध्या और रात्रि के मध्य का समय- गोधूलि वेला
● गुप्त रखने योग्य- गोपनीय
● अज्ञात पुरुष की धातु से उत्पन्न पुत्र- गूढ़ज पुत्र
● अरुण कमल (लाल कमल)- कोकनद
● व्यभिचारिणी, दुश्चारिणी स्त्री- कुलटा/ स्वैरिणी
● गुप्त रूप में रहकर सूचना देने वाला- गुप्तचर
● घास काटकर निर्वाह करने वाला- घसियारा
● गंजे सिर वावा- खलवाट
● हाथी जैसी चिल वाली स्त्री- गजगामिनी

(च वर्ग)
● लंबी अवधि तक जीने वाला- चिरंजीवी
● बरसात ऋतु के चार माह- चौमासा, चतुर्मास
● जिसकी शिखा में चंद्रमा विराजित है- चंद्रचूड़
● गद्य-पद्य मिश्रित रचना- चंपू
● जो आँखों से सुनता है- चक्षुश्रुवा
● कर्म करने की तीव्र इच्छा/कामना- चिक्कीर्षा
● जिस पर चिह्न या संकेत बना दिया गया हो- चिह्नित
● संपूर्ण भू-भाग  का नरेश/ राजा- चक्रवर्ती
● चित्सवरूप  परमेश्वर की माया/ आत्मा या ब्रह्मस्वरूप में रमण- चिद्विलास
● लंबी अवधि/ समय तक कायम रहना- चिरस्थायी
● कला निपुण और बनाव सिंगार की शौकीन स्त्री- चित्रिणी
● तेल का मैल, सलार मिट्टी- चीकट
● चुंगल भर चीज, अनाज आदि बेचने वाले से लिया जाने वाला महसूल- चुंगी
● चुनाई का काम करने वाला राजमिस्त्री- चेजारा
● बेवजह दोष ढूंढने का कार्य- छिद्रान्वेषण
●जो जल और थल दोनों जगह रहता है- जलभूमिया
● उदर (पेट) के अंदर अन्न पचाने के लिए उत्पन्न अग्नि- जठरानल/ जठराग्नि
● जीवन जीने की तीव्र इच्छा- जिजीविषा
● वह प्राणी जो झिल्ली में लिपटा हुआ पैदा हो- जरायुज
● जिसने इंद्रियों को जीत लिया है- जितेंद्रिय
● प्रकाश के लिए दीवार में बनी खिड़कियाँ- झरोखा (गवाक्ष)
● लंबे-लंबे बिखरे बालों वाला- झबरा
● लोगों द्वारा सुनी गई बात- जनश्रुति
● जानने की कामना/इच्छा- जिज्ञासा
● जेठ का पुत्र- जेठोत
● नकली (छद्म) वेश में रहने वाला व्यक्ति- छद्मवेषी
◆ बौद्ध भिक्षुओं द्वारा धारण वस्त्र- चीवर

(ट वर्ग)
● सिक्के/मुद्रा बनाने का कारखाना- टकसाल
● चारों तरफ जल से घिरा हुआ भाग- द्वीप (टापू)
● युवराज जो राजा के बाद तिलक का अधिकारी हो- टिकैत
● स्वामी को प्रिय लगने वाली बात- ठकुरसुहाती
● धातु के बर्तन बनाने वाला- ठठेरा
● दिन-रात खड़े रहने वाले साधु- ठाढ़ेश्वरी
● बिना डाल-पात का सूखा पेड़- ठुंठ
● सभी रागों से मिश्रित मधुर छोटा राग- ठुमरी
● डाक वितरित करने वाला- डाकिया
● बहायी हुई मिट्टी जो नदियों के मुहाने पर बनी तिकोनी भूमि जो धाराओं से घिरी होती है- डेलटा
● जम्मू आदि अंचल की भाषा- डोगरी
● स्त्रियों को विवाह के समय बैठाकर ले जाने वाली शिविका- डोली

(त वर्ग)
●किसी भी पक्ष का समर्थन न करने वाला/ सभी पक्षों को समान भाव से देखने वाला- तटस्थ/ निरपेक्ष
● ऋण के रूप में आर्थिक सहायता करना- तकाबी
● तल्लीन होकर काम करना- दत्तचित्त
● पति-पत्नी का जोड़ा- दम्पती
● जंगल में लगने वाली अग्नि- दावाग्नि/दावानल
● जिसका जन्म दो बार होता है- द्विज ( ब्राह्मण, पक्षी, नाखून और दाँत को द्विज कहते हैं)
● जो स्त्री दिवसकाल में प्रेमी से अभिसार करती है- दिवसाभिसारिका
● शादी के बाद वधू का ससुराल में दूसरी बार जाना- द्विरागमन
● ऐसा रोग जिसमें किसी को दिन में दिखाई न देता है- दिनौंधी
● दशरथ का पुत्र- दाशरथि
● गोद लिया हुआ पुत्र- दत्तक पुत्र
● जिसका दमन किया गया हैं- दलित
● गलत नियत से किसी की पीठ पीछे उसके शत्रु आपस में मिलकर साजिश या मंत्रणा करते हैं- दुरभिसंधि
● वह नायक जो बलवान, दयालु तथा शूरवीर योद्धा है- धीरोदात्त
● दुष्ट, कपटी, दुराचारी, अधर्मी, उद्दंड तथा खलनायकी करने वाला- धीरोद्धत
● ऐसा नायक, जो कला प्रेमी तथा सदैव प्रसन्न रहता है- धीरललित
● कोई वस्तु जो दूसरे के पास रखी हैं- धरोहर
● एक ऐसी जाति जो मछली बेचकर आजीविका अर्जन करते हैं- धीवर/ मछुआरा
● वह व्यक्ति जिसको अक्षर ज्ञान भी नहीं है- निरक्षर/अनपढ़
● जो ईश्वर की सत्ता में विश्वास न करता है- नास्तिक
● नव उदित होने वाला- नवोदित
● जिसका जन्म अभी-अभी हुआ है- नवजात/ सद्यः प्रसूत
● आसमान में विचरण करने वाले- नभचर/खग
● जिस दम्पती के कोई संतान न हो- निःसंतान
● रात्री में विचरण करनेवाला- निशाचर
● कभी नष्ट न होने वाला- नश्वर
● तैरकर पार करने की इच्छा-तितीर्षा
● जिस स्त्री के पुत्र पैदा न होता है- निपूती
● मांस-मछली से रहित भोजन- निरामिष
● मध्यरात्रि का समय- निशीथ
● वह राजकीय धन जो किसानों को सहायता हेतु दिया जाए- तकाबी
● ज्ञानमार्ग का प्रवेश का मार्ग दर्शक- तीर्थंकर
● संकीर्ण विचार रखने वाला- दकियानूस
● जिस मार्ग में आवागमन कठिन होता है- दुर्गम
● पुत्री का पुत्र- दौहित्र
● पुत्री की पुत्री- दोहित्री
● दूर भविष्य की बात सोच लेने वाला- दूरदर्शी
● अपने स्थान पर अटल रहने वाला- ध्रुव
● शिव की तांडव नृत्य मुद्रा- नटराज
● वस्तुओं को दूसरे देश को विक्रय हेतु भेजना- निर्यात
● रंगमंच के पर्दे के पीछे का भाग- नेपथ्य

(प वर्ग)
● जो पृथ्वी से संबंध रखता है- पार्थिव
● किसी बात को बार-बार दुहराना- पिष्टपेषण
● किसी कथन का बार-बार कहा जाए- पुनरुक्ति
● जो आँखों के सामने उपस्थित है- प्रत्यक्ष
● जो आँखों की दृष्टि से दूर है- परोक्ष/ अप्रत्यक्ष
● जिस स्त्री का उसके पति ने परित्याग कर दिया है- परित्यक्ता
● किसी बात के प्रत्युतर स्वरूप शीघ्र समाधान खोज बुद्धि- प्रत्युत्पन्नमति
● जिस स्त्री का पति विदेश जाने वाला है- प्रवत्स्यपतिका
● जीवन/प्राण देने वाली दवा/ओषधि- प्राणद
● अपना देश छोड़कर विदेश में रहने वाले- प्रवासी
●विधवा से उत्पन्न पुत्र- पौनभर्व पुत्र
● वह स्त्री जिसके पति और पुत्र दोनों हैं- पुरंध्रि
● स्वेत कमल- पुण्डरीक
● किसी के उपकार के प्रति किया गया उपकार- प्रत्युपकार
● छत के निचले तल पर सुंदर आकृष्ट शीशों से निर्मित झूमर, जिसमें रोशनी भी हो- फानूस
● दूसरों में दोष ढूंढ़ने वाला- परछिद्रान्वेषी
● जिसकी इच्छाएं समाप्त हो गई हैं- बीतकाम
● पानी में लगने वाली आग-बड़वानल/बड़वाग्नि
● काव्य में बारहमहीनों की प्रकृति वर्णन- बारहमासा
● बुद्ध का अवतार- बोधिसत्व
● अनेक रूप धारण करने वाला- बहुरूपिया
● वह स्त्री जिसके संतान उत्पन्न न होती है- बाँझ/ वंध्या
● लघु कद का आदमी- बौना/ वामन
● वह जो बहुत कुछ जानता है- बहुज्ञ
● जिसने बहुत कुछ सुन रखा है- बहुश्रुत
● भित्ति (दीवार) पर बने बने हुए चित्र- भित्तिचित्र
● जो भूमि (पृथ्वी) के अंदर की जानकारी रखता है- भूगर्भवेत्ता
●जिसका आहार मछली है- मत्स्याहारी
● मरने की इच्छा/कामना- मुमुर्षा
● मोक्ष की इच्छा/कामना रखने वाला- मुमुक्षु
● दही, घी, चीनी, जल और शहद मिश्रित पंचामृत- मधुपर्क
● बात का मर्म/ रहस्य जानने वाला- मर्मज्ञ
● जिसने मृत्यु पर विजय प्राप्त कल ली है- मृत्युंजय
● मद्यपान करने वाला- मद्यप
● अर्द्ध विकसित पुष्प- मुकुल
● राजा के अभिषेक प्राप्त रानी- महिषी
● कमलनाल- मृणाल
● वह कन्या जो पति के चयन की इच्छा रखती है- पतिम्वरा
● दूध ही केआहार फर जिवित रहने वाला- पयोहारी
● माह के पंद्रह दिन का समय- पाक्षिक
● हस्तलिखित पुस्तक- पांडुलिपि
● अन्य पुरुष से प्रेम करने वाली स्त्री- परकीया
● शारीरीक दृष्टि से हृष्टपुष्ट- पेशल
● घर छोड़कर चतुर्थ आश्रम में प्रविष्ट संन्यासी- परिव्राजक
● चारों ओर घूमकर भिक्षा माँगते हुए जीवन निर्वाह का व्रत- परिव्रज्या
● पाप करने के बाद स्वयं दु:ख पाना- प्रायश्चित
● संध्या और रात के मध्य का समय- प्रदोष
● जिस स्त्री से अभी पुत्र जन्मा है- प्रसूता
● अनेक विषयों का जानकार- बहुज्ञ
● रात्रि का भोजन- ब्यालू
● पथ में किया जाने वाला भोजन- पाथेय
● ओषधियों का जानकार- भेषज
● वह राग जो प्रातः काल गाया जाता है- भैरवी
● सुख-दुख में एक समान रहने वाला- मनस्वी
● यज्ञों का रक्षक- मखत्राता
● माता की हत्या करने वाला- मातृहंता
● एक विधवा स्त्री जिसका पुनः विवाह हुआ है- पूनर्भू
● ऐसा काव्य या नाटक जिसमें किसी की हँसी, मजाक की जाए- प्रहसन
● जिसे दिखाई न देता है- प्रज्ञाचक्षु
● युद्ध में जाने वाले वीरों का प्रचलन गीत- प्रयाणगीत
● वस्तु भेजने वाला- प्रेषक
● भेजी गई वस्तु को पाने वाला- प्रेषिति

(य, र, ल, व)
● निरंतर भ्रमण या यात्रा करने वाला- यायावर
● जो युद्ध में स्थिर रहता है- युधिष्ठिर
● युद्ध करने की तीव्र इच्छा रखने वाला- युयुत्सा
● रंगमंच का पर्दा- यवनिका
● यज्ञ में रोपा जाने वाला स्तम्भ- यूप
● काव्य कथा में पाठकों का मनोरंजन करने वाला पात्र- विदूषक
● रात्रीकाल में कुछ दिखाई न देने वाला रोग - रतौंधी
● संपत्ति के रूप में जमा पूँजी- रिक्थ
● तारों भरी रात- विभावरी
● माता पिता का संतान के प्रति प्रेम- वात्सल्य
● इस लोक से संबंधित- लौकिक/ इह लौकिक
● यज्ञों का आयोजन करने वाला- यजमान
● बचपन और यौवन के बीच का समय- वयःसंधि
● वसुदेव का पुत्र- वासुदेव
● वह स्त्री जिसका पति जीवित नहीं है- विधवा
● जिस पुरुष की पत्नी जीवित नहीं है- विधुर
● धर्म के विपरीत आचरण करने वाला- विधर्मी
● पूर्ण रूप से बहरा- वज्रबधिर
● जिस पुरुष की पत्नी साथ में नहीं है- विपत्नीक
● व्याकरण शास्त्र का ज्ञाता- वैयाकरण
● जिसके शरीर का कोई अंग विकृत हो गया है- विकलांग/ दिव्यांग
● जिसका विश्वास किया जा सकता है- विश्वसनीय
● विद्युत के समान गतिमान वेग वाला- विद्युत्वेग
● जीवनपर्यंत- यावज्जीवन
● इंद्रियों को नियंत्रण रखना- यम
● भाषण कला में चतुर- वाग्मी
● कन्या के विवाह करने का वचन देना- वाग्दान
● कन्या के विवाह करने का वचन देने वाला- वाग्दत्ता
● वीणा है हाथ में जिसके- वीणापाणि/सरस्वती
● जिसे उसके मूल स्थान से अलग कर दिया गया है- विस्थापित
● प्रशंसा के बहाने निंदा करना- व्याज स्तुति
● दो दिशाओं के बीच की दिशा- विदिशा
● मालिक रहित प्राणी या पदार्थ- लावारिस
● संसार को मोहित करने वाली- विश्व मोहिनी

(श, ष, स, ह)
● शत्रु का नाश करने वाला- शत्रुघ्न
● सदा से रहने वाला- शाश्वत
● शिव का उपासक- शैव
● शाक सब्जी तथा अन्न का आहार करने वाला- शाकाहारी
● कुछ शर्तों के साथ काम कराने के लिए तैयार समझौता- संविदा
● जिस स्त्री का पति जीवित है- सधवा
● एक ही जाति से संबंधित- सजातीय
● सभी को जीतने वाला- सर्वजीत
● जहाँ  मुफ्त में खाना खिलाया जाता है- सदावर्त
● जिसकी गर्दन सुंदर है- सुग्रीव
● स्त्रियों जैसा स्वभाव रखने वाला या जो सदैव स्त्रियों के वश में रहता है- स्त्रैण
● जिसका जन्म स्वयं हुआ है- स्वयंभू
● सप्ताह में होने वाली क्रियाएं- साप्ताहिक
● किसी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजना- स्थानांतरण
● किसी अन्य के स्थान पर कार्य करने वाला- स्थानापन्न
● स्वेद (पसीना) से उत्पन्न (जन्म लेना) होना- स्वेदज
● शुक्ल पक्ष (चाँदनीरात) में अभिसार (छुपकर मिलना) करने वाली स्त्री- शुक्लाभिसारिका
● मांस-मछली निर्मित भोजन- सामिष/ आमिष
● ऊँट पर रखकर चलाई जाने वाली तोप- शुतुरनाल
● हाथ से लिखा गया लेख- हस्तलिखित
● हंस की गति से चलने वाली नायिका- हंसगामिनी
● चाँदनी रात- शर्वरी
● सोलह वर्षीय किशोरी- षोड़शी
● सुंदर नेत्रों वाली स्त्री- सुनयना
● सुस्पष्ट और बोधगम्य- हस्तामलक
● भला चाहने की कामना- हितैषिता
● साठ वर्ष पूर्ण होने पर होने वाला उत्सव- हीरक जयंती
● विष्णु के उपासक- वैष्णव
● शक्ति (दुर्गा) के उपासक- शाक्त
● जिसे साफ-साफ पढ़ा जा सके- सुवाच्य
● शूल (त्रिशूल) है हाथ में जिसके- शूलपाणि
● एक शब्द के अनेक अर्थ निकलते हैं- श्लेष/श्लिष्ट
● एक ही उदर अर्थात् माँ से उत्पन्न भाई- सहोदर
● एक ही उदर अर्थात् माँ से उत्पन्न बहिन- सहोदरा
● जो स्वयं भोजन पकाकर खाता है- स्वयंपाकी
● जिस स्त्री ने अभी बच्चा को जन्म दिया है- सद्यप्रसूता
● सृजन करने की इच्छा/कामना- सिसृक्षा
● सव्य (बाएँ) हाथ से काम करने वाला- सव्यसाची
● जिसको एक स्थान से अन्य स्थान पर नहीं ले जा सके- स्थावर/जड़

(क्ष, त्र, ज्ञ, श्र, द्य)
● भूख (क्षुधा) से व्याकुल- क्षुधातुर
● जो क्षणभर में नष्ट हो जाता है - क्षणभंगुर
● नियोग विधि से उत्पन्न पुत्र- क्षेत्रज पुत्र
● जहाँ धरती और आकाश मिलते प्रतीत होते हैं- क्षितिज
● पृथ्वी, चंद्रमा, सूर्य आदि लोकों के मध्य का लोक- द्युलोक
● तीनों कालों (भूत, भविष्य और वर्तमान) को देखने वाला- त्रिकालदर्शी
● सेना का सबसे अग्रिम हिस्सा- हरावल
● जिसने दूसरों के लिए अपना बलिदान दे दिया है- शहीद/ हुतात्म
● हाथ से कार्य करने का कौशल- हस्तलाघव
● हवन से संबंधी सामग्री- हवि
● न टलने वाली घटना- होनी
● यज्ञ कराने वाला पुरोहित- होता
● किसी पुस्तक में  लेखक के अलावा अन्य व्यक्ति द्वारा जोड़ा गया भाग- क्षेपक

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