मालक्ष्मी बरठाकुर (प्रतिनिधि कवयित्रियाँ 2020)

अंग्रेजी साहित्य एवं भारतीय शास्त्रीय गायन संगीत में स्नातकोत्तर, श्रीमती मालक्ष्मी बरठाकुर एक कहानीकार व कवियित्री है और लेखन में अंग्रेजी, हिंदी तथा उनकी मातृभाषा असमिया में समान रूप से पारदर्शिता रखती है। उनकी कई कविताएँ प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तम्भों में प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी कविताओं व कहानियों के लिए उन्हें देश-विदेश से कई सम्मान प्राप्त हुआ है। असम प्रदेश के सांस्कृतिक राजधानी जोरहाट शहर में जन्मी श्रीमती बरठाकुर वर्तमान लखनऊ शहर, उत्तर प्रदेश के निवासी है। 


मालक्ष्मी बरठाकुर
हमारी बेटियाँ

ईश्वर ने उन्हें बनाया और कहा,
"जाओ धरती पर, मेरे सबसे सुंदर सृष्टि पर!
और सबके जीवन में बिखेरो खुशियाँ!"
चंचल, चुलबुली हमारी बेटियाँ - 'लक्ष्मी', 'सरस्वती' और 'दुर्गा'
'गार्गी', 'मैत्री', 'रानी पद्मिनी', 'लक्ष्मी बाई' और 'रज़िया'!

पर अधूरी रह गई ईश्वर की इच्छा
इस सुंदर सृष्टि में आकर बेटियाँ बन कर रह गयी महज कठपुतलियाँ!
कठपुतलियाँ नाचती रही, बचपन से बेटियाँ सुनती रही,
"चुप रहो, आँखें नीची करके चलो!
किसी भी बात पर बस सहमति का सिर हिलाओ, कुछ न बोलो!"

बेटी से बहू, बेटी से पत्नी, पत्नी से माँ!
एक ही जीवन में बेटियों को न जाने कितने किरदार निभाने पड़े
पहले पिता, फिर पति और अंत में उनको रहना पड़ा बेटों के इच्छाओं के आधीन बनके!

कभी मान के नाम, पर कभी सम्मान के नाम पर शोषण उनका होता रहा
बेबस बेटियाँ, मजबूर बेटियाँ, अस्तित्व उनका दबता रहा!

पर एक दिन ये कड़ी टूटनी थी, इस शोषण के विरुद्ध आवाज उठनी थी
जो बीत गया वो वाकिया कल का था, आज जो उगा वो सुरज दूजा था!
गार्गी', 'मैत्री', 'रानी पद्मिनी', 'लक्ष्मी बाई' और 'रज़िया' को
इतिहास के पन्नों के दायरे से बाहर आना था!

सड़क पर एक मुहिम निकला, निशब्द और निहत्था
कॉपियाँ-किताबें और कलम के दम पर मुहिम ने अपना कमाल दिखाया!
एक नयी सुबह, एक नयी किरण, एक नयी पहल, एक नयी दिशा!
सदियों पुराने सोच की बेड़ियों को तोड़ उभर कर आयी हमारी बेटियाँ
हमारी बेटियाँ - किरण, कल्पना, टैसी, छवि, मिताली और नीरजा ...!

नोट:
किरण बेदी - आईपीएस अधिकारी बननेवाली भारत की पहली बेटी।
कल्पना चावला - अंतरिक्ष की यात्रा करनेवाली भारत की पहली बेटी।
मिताली मधुमिता - सेना पदक प्राप्त करनेवाली पहली महिला अधिकारी।
टैसी थॉमस - भारत में मिसाइल परियोजना का नेतृत्व करनेवाली भारत की पहली महिला वैज्ञानिक।
छवि रजावत - एमबीए डिग्री प्राप्त भारत की पहली महिला सरपंच।
नीरजा भनोट- सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र प्राप्त करनेवाली भारत की सबसे कम उम्रवाली बेटी।


1 comment :

  1. Financial independence is basic to uplift the social and familial honour of a woman. If she has money in her purse, she is not subservient to the male, be it father, husband, or son.

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