पर्यटन द्वारा उभरता भारत

-धर्मेन्द्र कुमार त्रिपाठी

पर्यटन क्षेत्र में शोधरत। सहायक प्रबंधक, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में आलेख एवं अन्य साहित्यिक सामाग्री प्रकाशित।
पता: गोमती गेस्ट हाउस, तानसेन मार्ग, मंडी हउस, नई दिल्ली-110001
चलभाष: +91 991 063 1043; ईमेल: dktripathi@mail.jnu.ac.in

‘अतुल्य भारत’ वाक्यांश से हमारे मन में भारतीय पर्यटन के सन्दर्भ में अनेक चित्र उभरने लगते है जिनमें पूर्व के धार्मिक स्थलों से पश्चिम में फैला विशाल मरुस्थल और उत्तर के हिमालय की वादियों से दक्षिण के मसालेदार और चटपटे व्यंजन शामिल है। इसके अलावा भी यहाँ बहुत कुछ समझने को है जैसे यहाँ कि संस्कृति जो विविधता में एकता दर्शाती है। “ एक ऐसी जगह जिसे लोग देखना चाहते है और एक बार इसके दर्शन कर लेने के बाद  भले ही उन्होंने इसकी केवल झलक ही देखी हो, दुनिया की  तमाम छवियों को इस एक झलक पर न्योछावर करने को तैयार है “ ऐसा मार्क ट्वेन का कहना था जिन्होंने यह भारत के बारे में कहा था। दुनिया भर के पर्यटक भारत आकर यहाँ कि संस्कृति को जानने की उत्सुकता रखते है क्योंकि यहाँ विभिन्न प्रकार का अनुभव उन्हें प्राप्त होता है जोकि यहाँ के जलवायु, संस्कृति, कला, साहित्य और खानपान संबंधी हो सकती है।
सरकार निरंतर पर्यटन के क्षेत्र में नई नई योजनायें बना रही है जिसका लाभ बीते दशकों में देखने को मिला है। सरकार की  विदेशी नीतियाँ भी पर्यटन को बढ़ावा देने में कारगर साबित हो रही है। भारतीय पर्यटन मंत्रालय ने सरकार की  मदद से वीजा आन अराइवल  ( विदेशियों को स्वदेश आने के बाद वीजा देना ) और ई-पर्यटक वीज़ा की सुविधा की शुरुआत की है इससे विदेशियों को पर्यटन के लिए आने में सुविधा मिलेगी। देश में बढ़ रहे पर्यटकों की संख्या में जो सबसे बड़ा इजाफा देखने को मिला है वह ई-पर्यटक वीजा पर आने वाले पर्यटकों के कारण से सबसे अधिक हुआ है। ई-पर्यटक वीजा का लाभ उठाने वाले विश्व के यदि 15 देशों की सूची देखें तो ब्रिटेन से इस वर्ष 12.1, अमेरिका 10.2, चीन 6.3, ऑस्ट्रेलिया 5.5, जर्मनी 4.9, फ्रांस 4.3, स्पेन 3.9, इसराइल  3.2, कोरिया गणराज्य 3.2, ओमान 3.2, कनाडा 3.1, सिंगापुर 2.6, संयुक अरब अमीरात 2.2, मलेशिया 2.1 और इटली 4.9 प्रतिशत लोग भारत को देखने व समझने भारत आये।

भारतीय पर्यटन में युवाओ को आकर्षित करने के लिए साहसिक पर्यटन ने अपनी जगह बना ली है जिसमें साहसिक खेल शामिल है। इस पर्यटन को बढावा देने के लिए हाल ही में पर्यटन मंत्री ने इसके दिशानिर्देश लागू किये। इससे न सिर्फ हमारे देश के युवा बल्कि दूसरे देश से आने वाले युवा पर्यटकों को भी बहुत कुछ देखने और खेलने को मिलेगा। पर्यटन मंत्रालय ने एडवेंचर टूर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (एटीओआईए) के साथ भारत में साहसिक पर्यटन के लिए सुरक्षा और गुणवत्ता मानदंडो पर दिशानिर्देश तैयार किये है। इन दिशानिर्देशो में भूमि वायु और जल आधारित साहसिक गतिविधियाँ शामिल है।

अगर हम पर्यटन से फायदे की बात करे तो इससे हमारा मनोरंजन होता है नयी नयी जगहों के भ्रमण से ज्ञान के साथ-साथ आनंद की भी अनुभूति होती है और हमें यह भी जानने को मिलता है कि इस धरती पर कितनी विलक्षण उपहार हैं। दूसरी बात करे तो पर्यटन के बढ़ने से रोजगार में बढ़ोत्तरी हुई है स्थानीय लोगों को गाइड के रूप में काम करने के अवसर प्राप्त हो रहे है और पर्यटकों के लिए कैम्पिंग स्थलों का संचालन करने में भी स्थानीय लोगों को रोजगार प्राप्त हुए है। पर्यटन गरीबी दूर करने, रोजगार पैदा करने और सामाजिक सदभाव बढ़ाने का साधन है। पर्यटन सेवा के क्षेत्र में एक उभरता उद्योग है जिसमे हमें अपार संभावनाएँ है। अकेलापन व मानसिक तनाव को दूर करने के लिए लोग घर से दूर दूसरी जगह समय बिताने जाते है चूँकि हमारे देश में एकल परिवार का चलन बढ़ा है इसलिए लोग अपने काम से  समय निकाल के कुछ अलग सोचना और देखना चाहते हैं।

भारत में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में दिन प्रतिदिन वृद्धि ही भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढाने का एक प्रमाण है। आज़ादी के बाद कुछ वर्षो तक इस क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया लेकिन विगत कुछ वर्षो के बाद 1966 ईस्वी में भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) का गठन किया गया जोकि आज के दिन में पर्यटन को बढावा देने में सहायक संस्था साबित हुई है और इसी तरह की  संस्था राज्यों में भी बननी शुरू हो चुकी है।

पर्यटन आकड़ों के अनुसार जून 2016 से जून 2017 तक भारत आये विदेशी पर्यटकों की संख्या 6.25 लाख पहुँच चुकी थी जबकि जून 2016 तक यह 5 लाख थी। पर्यटन के क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में अगर ऐसी ही बढ़ोत्तरी रही तो हम 2025 तक 25 लाख का आकड़ा पार कर जायेंगे।

आधुनिक भारत में पर्यटन के क्षेत्र में मेडिकल पर्यटन और धार्मिक पर्यटन ने अपनी अच्छी जगह बनायीं है। जहाँ यूरोप और मध्यपूर्व से आने वाले मेडिकल पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है वही भारतीय तीर्थ स्थलों में भी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई  है। ‘स्वदेश दर्शन’ नामक योजना ने पर्यटन के प्रत्येक क्षेत्र को अपने अन्दर निहित किया है और इस योजना से पर्यटकों को अत्यंत लाभ भी हुआ है। भारत में पर्यटन विभाग के विकास और इसे बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मंत्रालय नोडल एजेंसी के रूप में कार्यरत है।

अगर ऐतिहासिक स्मारक की बात करे तो भारत के प्राचीनकाल से लेकर आधुनिक भारत की धरोहर पर्यटकों को देखने पे मजबूर करती है और यदि प्रकृति पर्यटन में झांके तो इस देश में भौगोलिक विविधता है जोकि पर्यटन की किस्मों में प्रतिफलित है। भारत में वन्यजीव, पहाड़ी सैरगाह, समुद्रतट, पर्यटन को आगे ले जाने में योगदान दे रहे है। भारत के पर्यटन में स्वास्थपद पर्यटन मुहैया कराने की दृष्टि से भारत का विश्व में पाँचवाँ स्थान है। पर्यटकों के लिए भारतीय बाज़ार विविधता से भरा हुआ स्थान है। आज के नए पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का विकास कर पर्यटन को बढावा मिला है।

विश्व कि आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में भारत का पर्यटन उद्योग अत्यंत कारगर साबित हो रहा  है और ऐसी उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले वर्षो में यहाँ आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी ही इस देश को  महाशक्ति बनाने में मददगार साबित होगी। पर्यटन से हमारा मनोरंजन तो होता ही है, साथ ही साथ अनेक नई-नई जानकारियाँ मिलती है और हमारे ज्ञान में भी वृद्धि होती है। इसलिए हम सभी को पर्यटन के लिए जाना चाहिये।

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