फ़रवरी: अश्वेत इतिहास मास

अनुराग शर्मा
फ़रवरी का मास अमेरिका में ब्लैक हिस्ट्री मंथ के रूप में मनाया जाता है। दासत्व का इतिहास बहुत पुराना है। ईसा से 1800 वर्ष पूर्व के बेबीलोन में भी दासत्व की उपस्थिति और स्वीकार्यता दृष्टिगोचर होती है। रोमन समाज की कहानियाँ हों या अरबों की दास टुकड़ियों की दास्ताँ, तब से अब तक अनेक तथाकथित 'सभ्यताओं' की नींव दासों के रक्त-स्वेद पर आधारित रही है। आधुनिक काल में यूरोपीय साम्राज्यवाद के उदय से लेकर औद्योगिक क्रांति तक संसार के समस्त विकास के मूल में दासों का शोषण निहित था।

कार्ल मार्क्स की श्वेत-महत्ता की पक्षधरता तो जगजाहिर है लेकिन सन् 1846 में लिखे उसके पत्र में दासत्व को अति-महत्त्वपूर्ण बताया गया है

स्वर्गीय कृष्ण बलदेव वैद
(27 जुलाई 1927 - 6 फ़रवरी 2020)
"दास प्रथा एक अत्यधिक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है। दास प्रथा के बिना तो विश्व का सबसे प्रगतिशील देश अमेरिका पुरातनपंथी हो जाएगा। दास प्रथा को मिटाना विश्व के नक़्शे से अमेरिका को हटाने जैसा होगा। अगर नक़्शे से आधुनिक अमेरिका को हटा दो तो आधुनिक सभ्यता और व्यापार नष्ट हो जायेंगे और दुनिया में अराजकता छा जायेगी। एक आर्थिक गतिविधि के रूप में दास प्रथा अनादिकाल से सारी दुनिया में रही है।"
- कार्ल मार्क्स

भारतीय संस्कृति और सभ्यता का आधार प्राणिमात्र की समानता, पुनर्जन्म का चक्र और कर्म-फल का सिद्धांत रहे हैं। निहित स्वार्थी तत्त्व वहाँ भी छिटपुट प्रकट होते रहे लेकिन अन्य समाजों की तरह मानव को पशुओं की भाँति खरीदने, बेचने, लाभ कमाने के लिये संख्या-वृद्धि कराने से लेकर कुत्सित आनंद के लिये मार देने जैसे कृत्यों को न कभी सामाजिक स्वीकृति मिली न उनका सामान्यीकरण ही किया गया। आश्चर्य नहीं कि चाहे अमेरिका के मार्टिन लूथर किंग जूनियर हों चाहे दक्षिण अफ़्रीका के नेल्सन माण्डेला, उनके आदर्श भारत के महात्मा गांधी रहे। बेशक समानता का मार्ग कठिन रहा है लेकिन सत्य यही है कि कितनी भी कठिन परिस्थिति में अंततः 'सत्यमेव जयते' ही उजागर होता है। दासत्व को समाप्त होना ही था, सो हुआ। मानवता को बधाई!

स्वर्गीय गिरिराज किशोर
(8 जुलाई 1937 - 9 फरवरी 2020)
संसार इस समय मारक कोरोना विषाणु से भयभीत है। चीन के वुहान प्रांत से फैले इस विषाणु ने अल्पसमय में ही सरकारी आँकड़ों के अनुसार दो हज़ार से अधिक लोगों को मार दिया तथा हज़ारों अन्य को संक्रमित किया है। विषाणु जीवित और निर्जीव के बीच की कड़ी जैसे होते हैं और प्रतिकूल वातावरण में निष्क्रिय पड़े रहकर अनुकूल वातावरण की प्रतीक्षा कर सकते हैं। भारतीय सभ्यता के शुचिता के आग्रह, तथा हाथ मिलाने के बजाय दूर से नमस्कार करने जैसी प्रथाएँ कठिन परिस्थितियों में भी रोग के प्रसार को रोकती हैं - दाह संस्कार जैसी उन्नत प्रथा उस विषाणु को तुरंत नष्ट करके समाज को सुरक्षित करती है। तेरहवीं, सूतक, सौर आदि जैसी रीतियाँ किसी सम्भावित रोग के प्रसार में अवरोध का कार्य करती हैं। आधुनिक सभ्यता जिस प्रकार अहिंसा, योग, शाकाहार, और वैविध्य की स्वीकार्यता जैसे भारतीय विचारों को अपना रही है, उसी प्रकार यह काल दाह-संस्कार जैसे अनूठे भारतीय विचार की वैश्विक स्वीकार्यता का भी है ताकि भविष्य की संतति को वर्तमान की विभीषिकाओं से यथासम्भव बचाया जा सके।

स्वर्गीय पंढरी जूकर
जीवन-मरण पर भारतीय संस्कृति, संस्कृत, और साहित्य में बहुत चिंतन हुआ है। पुनर्जन्म का भारतीय विचार हो चाहे क़यामत के दिन के पुनर्जागरण की अभारतीय धारणाएँ, चाहे अमृत्व की वैश्विक आकांक्षा - दीर्घायु की इच्छा मानव की मूल इच्छाओं में से एक है। तो भी जीवन की नश्वरता को स्वीकारने के अतिरिक्त हमारे पास कोई चारा नहीं है। इसी मास हमने साहित्य के दो ख्यातनामों को खोया है - अमेरिका में कृष्ण बलदेव वैद और भारत में गिरिराज किशोर। इनके अतिरिक्त भारतीय सिनेमा के सबसे वरिष्ठ और प्रसिद्ध मेकअप कलाकार पंढरी "दादा" जूकर ने भी 17 फ़रवरी 2020 को इस पार्थिव संसार से विदा ली। दिवंगत आत्माओं को सेतु परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।


सेतु पत्रिका के प्रकाशन के आरम्भ से ही सेतु परिवार को पुस्तक प्रकाशन के प्रस्ताव मिलने लगे थे। आरम्भिक झिझक के बाद सेतु ने चुनी हुई पुस्तकों के प्रकाशन का निर्णय लिया। इस कड़ी में नवीनतम पुस्तक ग्लोरी शशिकला की अंग्रेज़ी उपन्यासिका "She Spoke in Tongues" है जो मार्च 2020 के प्रथम सप्ताह में विश्वभर में उपलब्ध करायी जा रही है। सेतु द्वारा प्रकाशित पुस्तकों के डिजिटल संस्करण (ईबुक्स) किंडल अनलिमिटेड के पाठकों के लिये सदा निःशुल्क हैं। लेकिन सम्पादक मण्डल ने समय समय पर उनमें से कुछ चुनी हुई पुस्तकों को अन्य पाठकों के लिये भी अल्पकाल के लिये निःशुल्क प्रदान करने का निर्णय किया है जिसके अंतर्गत इस माह कथा संग्रह "अनुरागी मन" की ईबुक गुरुवार, 5 मार्च 2020 से सोमवार 9 मार्च 2020 तक सभी पाठकों के लिये एमेज़ॉन पर डाउनलोड हेतु निःशुल्क उपलब्ध रहेगी।

अनुरागी मन कथा संग्रह :: लेखक: अनुराग शर्मा
हिंदी ही नहीं, इस मास अंग्रेज़ी की भी एक सेतु पुस्तक निःशुल्क डाउनलोड के लिये उपलब्ध होगी। सेतु के अंग्रेज़ी संस्करण के सम्पादक सुनील शर्मा का अंग्रेज़ी कथा-संग्रह Ps-Fs (Prompts and Fictions) गुरुवार, मार्च 19, 2020 से सोमवार, मार्च 23, 2020 तक किंडल पर निःशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है।

Ps-Fs :: Sunil Sharma
कथा, काव्य, समीक्षा, तथा स्थायी स्तम्भों के अतिरिक्त सेतु के इस अंक में हम आपके सामने ला रहे हैं हिंदी की एक अनूठी लेखिका जिनकी अब तक सैकड़ों रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं, 19 कथा संग्रह आ चुके हैं लेकिन फिर भी किसी कारणवश उनके लेखन पर वैसी चर्चा होती नहीं दिखती जिसकी वे अधिकारी हैं। जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ, लखनऊ क्रिश्चियन कालेज के अँग्रेज़ी विभाग के अध्यक्ष पद से सेवा-निवृत्त विख्यात लेखिका 'दीपक शर्मा' की, जिनकी दो कहानियाँ हिंदी संस्करण में, और एक कहानी का अनुवाद अंग्रेज़ी संस्करण में प्रकाशित किये जा रहे हैं।

इस अंक के साथ सेतु ने 750 लेखक, 4,100 आलेख, 1,250,501 हिट्स, दो साहित्यिक मिलन, 90 अंक, और नौ प्रकाशित पुस्तकों का शिखर स्पर्श किया है। डुओट्रोप तथा कॉमनवैल्थ ऑथर्स सहित हिंदी और अंग्रेज़ी की प्रतिष्ठित सूचियों व निर्देशिकाओं में धीरे-धीरे सेतु अपना स्थान पा रही है। एक छोटी सी झलक निम्न सूची में:
वैविध्य और सहिष्णुता की परम्परा के लिये विख्यात भारत की राजधानी में हुए हालिया दंगे में अपराधी मनोवृत्ति के नृशंस गिरोहों ने वाहन और सम्पत्ति को तो भारी हानि पहुँचायी ही, दो सेवारत पुलिसकर्मियों श्रीयुत रतन लाल, व अंकित शर्मा सहित लगभग 30 नागरिकों की क्रूर हत्या की है। कमज़ोर लोकतांत्रिक ढाँचे और कमज़ोर न्याय और प्रशासन व्यवस्था के चलते देश में आपराधिक वर्ग का दुस्साहस बढ़ता जा रहा है। प्रशासन व्यवस्था का दायित्व तो सरकारों को और चुने हुये जन-प्रतिनिधियों को ही लेना पड़ेगा, परंतु देश के जागरूक नागरिक के नाते हम कम से कम अपना इतना कर्त्तव्य तो निभा ही सकते हैं कि हिंसा, द्वेष, घृणा, के प्रसार का भरसक विरोध करें और व्यक्तिगत या राजनैतिक लाभ के लिये उसका दुरुपयोग करके देश को बदनाम करने वालों को रोकें। इस अंक के धरोहर स्थायी स्तम्भ में हम प्रसिद्ध गीतकार पंडित नरेंद्र शर्मा की सम सामयिक, विचारणीय रचना "मैं हिंदू तुम मुसलमान" प्रस्तुत कर रहे हैं।

लिखने बैठा तो अंदाज़ नहीं था कि बात इतनी लम्बी हो जायेगी इसलिये अब यह संदेश सम्पन्न करते हुये स्थायी स्तम्भों सहित कुल 40 रचनाओं वाला यह अंक आपको समर्पित करता हूँ। इस अंक पर अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवश्य अवगत कराइये।

धन्यवाद और शुभकामनाएँ!

आपका,





सेतु, पिट्सबर्ग ✍️


1 comment :

  1. अनुराग जी , आपका लेख पढ़ा . वर्गभेद के प्रबल विरोधी कार्लमार्क्स के विचार जानकर आश्चर्य हुआ . पढ़ रही हूँ कविताएं अच्छी है . विवेक मिश्र जी की कहानी और बहुत सी पठनीय सामग्री है . चयन के लिये धन्यवाद .

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