काव्यानुवाद: चन्द्र गुरुङ्ग (नेपाली से हिंदी)

चन्द्र गुरुङ्ग
1. जब हम मिलते हैं 

आजकल जब हम मिलते हैं
चेहरे औपचारिकताएँ ओढ़कर आते हैं
दिल मुश्किल से खुलते हैं
ज्यादा ही निपुण बनती हैं इतराती खुशियाँ।

आजकल जब हम मिलते हैं 
होठों पे कागजी हँसी खिलती हैं
दुःख-दर्द चुपचाप छिप जाते हैं
कि, प्रकट हो सकते हैं हमारे अभाव।

आजकल जब हम मिलते हैं
कृत्रिम मुस्कुराहटों की प्रदर्शनी लगती हैं
कुछ देर अपने-अपने गीतों को गाते 
रहती है सब को छूटने की जल्दी। 

आजकल जब हम मिलते हैं
खिलते नही हैं दिलों में फूल।  
***


2. छोटे-छोटे बच्चे खेल रहे हैं

छोटे–छोटे बच्चे मिट्टी में खेल रहे हैं
लकड़ी और तिनकों के घर बने हैं
मिट्टी के ही बर्तन,
थाली–कटोरी, बाल्टी और पतीले हैं।

बच्चे पानी में खेल रहे हैं
पानी के ऊपर कागज की नाव में खुशी चला रहे हैं
तरबतर पानी से भीगे हैं।

बच्चे फूल चुन रहे हैं
कानों में, बालों में रंग-बिरंगे फूल लगा रखे हैं 
दोस्तों के साथ की लड़ाई-झगड़ा भूलकर।

बच्चे वृद्ध-वृद्धा से छेड़खानी कर रहे हैं
साथ में उछलते और नाचते हैं
इनके चेहरे की झुर्रियों में कुछ ढूंढ रहे हैं
देख रहे हैं सफेद बालों का रहस्य।

बच्चे जीवन के नजदीक लगते हैं
किसी डर व चिन्ता से दूर  
रमते हैं ये बच्चे अलग दुनिया में।

अगर
इन बच्चों के पास जाते हैं आप
वे संदेह करते हैं
वे डर जाते हैं
वे चिल्लाते हैं
वे प्रतिरोध करते हैं
वे रोते हैं
उस समय
बच्चे एक सुन्दर दुनिया को बचाना चाहते हैं
जिसको है हम लोगों से डर। 
***


3. बाकी देश

उधर देश की बहुत याद आती है कहकर
जितना हो सका 
कुछ देश को कांधे पे उठाकर ले गए 
देश से दूर, जीना बहुत ही मुश्किल है कहकर
कुछ देश को आँखों में छिपाकर ले गये
परदेश तो दूसरों का है कहकर
कुछ देश को दिलों मे सम्भाल कर ले गये 
उधर तो देश की बहुत याद आती है कहकर
कुछ देश को दिलों में भरकर ले गये
कुछ उपहार बनाकर ले गये
कुछ सीने पे सजाकर ले गये
कुछ  दिमाग की दीवारों पे चिपकाकर ले गये
बहुतेरे, अनेक तरीकों से देश को अपने साथ ले गये।

इधर बाकी बचा देश
दुखता रहता है
इन जाने वालों की याद में।


2 comments :

  1. Each of the poem are very strong.congratulation chandra sir,you are one of the poet,whose poems i love much.

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