गणतंत्र, जनतंत्र, लोकतंत्र, अनुशासन, प्रशासन और अराजकता

अनुराग शर्मा
नमस्कार!

मकर संक्रांति के आगमन के साथ दिन बड़े होने आरम्भ हो गये हैं। पिट्सबर्ग इस समय हिम से ढँका हुआ है लेकिन विश्वास है कि आगामी सप्ताह तापक्रम को सामान्य करेंगे। 

संसारभर में करोना के टीकों के प्रति उत्साह तो है ही, संसार के सबसे बड़े टीका-उत्पादक देश के रूप में भारत ने नेपाल, म्यानमार, बांग्लादेश, भूटान, और श्रीलंका के साथ मॉरिशस, कुवैत, ब्राज़ील तथा मेक्सिको जैसे देशों को करोना के टीकों की आपूर्ति करने के लिये विशेष सम्मान पाया है। यह हम सब भारतवंशियों के लिये अत्यंत गौरव का विषय है। देश में शांति की स्थिति देश की आंतरिक प्रगति के साथ-साथ विश्वभर के स्थायित्व के लिये एक अनिवार्यता है। प्रशासन को इस दिशा में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

गत 26 जनवरी को संसार के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत ने जहाँ अपना गणतंत्र दिवस मनाया वहीं एक बड़े अराजक झुण्ड ने ट्रैक्टर किसान परेड के नाम पर दिल्ली में खुलकर हिंसक ताण्डव किया। यहाँ तक कि लालकिले पर चढ़कर वहाँ फहरते तिरंगे के मुकाबले साम्प्रदायिक ध्वजा फहरायी गयी।

इस घटना से कुछ ही दिन पहले संसार के एक अन्य बड़े लोकतंत्र अमेरिका के संसद भवन में एक हिंसक भीड़ ने आक्रमण कर दिया। ये दोनों ही घटनाएँ लोकतंत्र में आपराधिक मनोवृत्ति के हिंसक झुण्डों द्वारा, लोकतंत्र में सामान्य समझी जाने वाली नागरिक स्वतंत्रता के निकृष्टतम दुरुपयोग के उदाहरण हैं।  

दोनों ही स्थितियों में घटनास्थल पर उपस्थित छोटे और अप्रभावी पुलिस दलों ने अति संयम का प्रदर्शन करते हुए खुद हानि झेलते हुए भी, किसी भारी टकराव और बाद में उसके सम्भावित राजनैतिक दुरुपयोग की समस्त सम्भावनाओं को निरस्त कर दिया। लेकिन ऐसी घटनाएँ शांतिप्रिय देशभक्त नागरिकों को चिंतित करती रही हैं। ऐसी अनुशासनहीनता को दण्डित न करना लोकतंत्र को कमज़ोर करता है और दुष्ट मनोवृत्ति के अराजक झुण्डों के आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी करता है। इसे यथाशीघ्र रोका जाना चाहिये।

सेतु के 2021 के इस पहले अंक में आपका स्वागत है। अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवश्य अवगत कराइये।
 
शुभाकांक्षी,   

सेतु, पिट्सबर्ग
31 जनवरी 2021 ✍️

2 comments :

  1. प्रिय अनुराग जी,नमस्कार। सेतु के मंच का सृजन करके आपने मकरसंक्रांति पर बहुत अच्छा संकल्प लिया है।मैं आकाशवाणी लखनऊ से कार्यक्रम अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हूं,वरिष्ठ नागरिक(67+)हूं,लखनऊ में रहता हूं।कुछेक पुस्तकें छप चुकी हैं,लिखता पढ़ता रहता हूं।आपसे जुड़ रहा हूं।
    प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी

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