कविताएँ: अनुभव राज

अनुभव राज
चलते चलते रहना है

मुझको चलना हरदम चलना
चलते चलते रहना है

मैं ज़िद्दी हूँ तूफानों में
दीप जलाना चाहूँ
पंख हैं कोमल फिर भी नभ में
मैं तो उड़ना चाहूँ
डिगूँ न पथ से मुश्किल को ये
कहते कहते रहना है
मुझको बहना हरदम बहना
बहते बहते रहना है।

साँसों की माला में जाने
कितनी उलझन आयी
बिखरे हैं सब ख्वाब सुहाने
हृदय कली मुरझायी
फिर भी आँधी तूफानों से
लड़ते लड़ते रहना है
मुझको तपना हरदम तपना
तपते तपते रहना है।
***

बल बुद्धि और हिम्मत दो

मेरे भगवन मुझको ऐसी
बल बुद्धि और हिम्मत दो

चल न पाऊँ पैर से तो क्या
हृदय तरंगित हो मुझमें
मिले सभी को मंज़िल अपनी
ऐसा रस्ता हो मुझमें

कभी शिथिल न होने पाऊँ
ऐसी गति और बरकत दो।
मेरे भगवन मुझको ऐसी
बल, बुद्धि और हिम्मत दो।।

किसी के तीखे वचनों को सुन
घृणा न मुझमें आये
अति प्रशंसा सुनकर मन में
अहंकार न छाए

दिलों पे सबके राज करूँ मैं
ऐसी करुणा किस्मत दो।
मेरे भगवन मुझको ऐसी
बल, बुद्धि और हिम्मत दो।।

अपनी शर्तों पर जीने की
आज़ादी हो जीवन में
सम्बन्धों उम्मीदों के भी
फूल खिले हो गुलशन में

सपने पूरे करूँ सभी के
ऐसी युक्ति, शोहरत दो।
मेरे भगवन मुझको ऐसी
बल, बुद्धि और हिम्मत दो।।
***

मुज़फ़्फ़रपुर निवासी अनुभव राज ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थी हैं। कई  कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं, सेतु में यह प्रथम प्रकाशन है।
ईमेल: anubhvraj808@gmail.com
चलभाष: +91 808 450 5505

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