भारतीय पर्यटन पर कोरोना का प्रभाव

-धर्मेन्द्र कुमार त्रिपाठी

सहायक प्रबंधक, जेएनयू (चलभाष: +919910631043) 


भारत अपनी भौगोलिक सांस्कृतिक और कला में विविधता के कारण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। इस देश की संस्कृति के दीवाने आपको नाही सिर्फ यूरोप में बल्कि प्रत्येक महाद्वीपों पर देखने को मिलेंगे। गुप्तकाल में सोने की चिड़िया कहे जाने वाले इस देश को देखने की चाह प्रत्येक प्राणी में होती है। इसलिए भारतीय पर्यटन इस देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होता रहा है।
कोरोना वायरस जोकि आज सम्पूर्ण विश्व में भय का पर्याय बना हुआ है एक विषाणु है। वैज्ञानिकों की मानें तो यह मानव द्वारा निर्मित विषाणु है जिसने न केवल भारत में बल्कि पुरे विश्व में कोहराम मचाया हुआ है। इस वायरस ने भारत में जनवरी 2020 में अपना पहला कदम रखा और देखते ही देखते इस से ग्रसित लोगों की संख्या में ऐसे बढ़ोत्तरी हुई जैसे हम बहुस्तरीय बाज़ारों में एजेंटों की देखते है और अगले कुछ दिनों में इस वायरस ने एक महामारी का रूप ले लिया। वर्तमान समय की बात करें तो भारत में कोरोना की यह दूसरी लहर है जिसमे एक बार फिर लॉकडाउन का जन्म हुआ अभी हम पिछले संपूर्ण लॉकडाउन से नहीं उबरे थे कि पुनः इसकी दस्तक राज्यस्तरीय के रूप में हुई। विशेषज्ञों की माने तो आगे ऐसी और लहरें देखने को मिल सकती हैं जिससे भारतीय पर्यटन के साथ साथ अर्थव्यवस्था पर भी भारी नुक्सान देखने को मिल सकता है।
अगर पर्यटन क्षेत्र की बात करें तो लॉकडाउन के दिन इस क्षेत्र के लिए काले दिनों के रूप में इतिहास के पन्नों में दर्ज हो रहें  है।  इस महामारी की रोकथाम के लिए लॉकडाउन ही भारत के लिए एकमात्र सहारा दिखा जिससे इस वायरस के फैलने की चेन को तोड़ा जा सकता था।  परन्तु इससे पर्यटन पूर्ण रूप से ठप्प हो गया पूरे देश में पर्यटन उद्योग व् इस के सहायक क्षेत्र जिसमे होटल परिवहन ट्रेवल एजेंसीज व गाइड्स एजेंसीज जैसी संस्थाएं शामिल है सब अनिश्चितकाल के लिए बंद हो गई। कोरोना नामक यह विषाणु वर्तमान में प्रत्येक संस्था पर अपना जलवा बिखेर रहा है।  यह वायरस पर्यटन क्षेत्र के लिए ऐसा दुश्मन बन के आया है जैसे अगले कुछ वर्षों तक इस क्षेत्र को इस वायरस के आगे घुटने पर ही रहना होगा। भारतीय पर्यटन जब कली से फूल बनने की राह में था तभी इस वायरस ने इस फूल को खाने की कोशिश की और अभी भी धीरे धीरे कुतर रहा है। इस वायरस ने अपने प्रकोप से कई निजी व सरकारी क्षेत्रों को बहुत क्षति पहुँचायी है परन्तु जिस प्रकार पर्यटन का क्षेत्र डूबा है, मानो जाके बरमूडा ट्रायंगल के चक्रव्यूह में फँस गया हो। भारतीय पर्यटन ने पिछले दशक में खूब वाहवाहियाँ बटोरी है और विदेशों से अवार्ड भी अपने नाम किया परन्तु वर्ष 2020 में होली पर्व के बाद यह क्षेत्र  होली के भांग के नशे में ऐसे डूबा कि आज तक उठ नहीं पाया और विशेषज्ञों की मानें तो अगर समय पर कुछ न किया गया तो यह क्षेत्र अगले कुछ वर्षों तक ऐसे ही एक काल कोठरी में बंद होने की ओर अग्रसर है। 
यह महामारी लोगों से सामाजिक दूरी बनाने की सलाह दे रही है जबकि पर्यटन क्षेत्र आदर सत्कार वाली इंडस्ट्री है इस क्षेत्र का प्रमुख उद्देश्य ही जनसम्पर्क रहा है। अगर आप से यह पूछा जाय कि लोग पर्यटन कब करना चाहते है तब शायद आपका यही जवाब होता है कि जब कोई भी  प्रत्येक कार्य से मुक्त होकर अपने आपको थोड़ा आराम देने के लिए अपने स्थान पानी व वातावरण को बदलता है वही उनका पर्यटन है परन्तु आज की  स्थिति में क्या यह सोच पाना संभव है शायद जवाब होगा नहीं। इस समय तो ऐसी भयावह स्थिति है कि लोग एक दूसरे के घर जाना पसंद नहीं कर रहे तो अंतरराष्ट्रीय क्या घरेलू पर्यटन भी अभी दूर की बात है। २१वीं सदी जहाँ भारतीय पर्यटन को एक बड़े क्षेत्र की सूची में डालने वाला था वही इस महामारी ने इस क्षेत्र को अपनी सूची में अंतिम पायदान पर बिठा दिया।
पर्यटन को निचले पायदान में लाने का सबसे मुख्य कारण हमेशा से युद्ध रहा है चाहे वह नाभिकीय शस्त्र, धार्मिक या जैविक युद्ध हो। वर्त्तमान में इस महामारी को हम बायो युद्ध का नाम दे सकते है। हम प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध से निकले फिर गृह युद्ध में पड़ोसी देशों के साथ फंसे रहे  उसके बाद पड़ोसी देशों की बॉर्डर पर की जाने वाली छोटी टुच्ची हरकतों ने भी काफी प्रभाव डाला जिसके कारण हमारा कश्मीर जोकि अपनी ख़ूबसूरती के कारण कभी छोटा स्विटज़रलेंड के नाम से जाना जाता था आज वह विदेशी शैलानियों के लिए अपने पर्यटन को पूर्ण रूप से खो चुका है क्योंकि प्रत्येक पर्यटक अपनी यात्रा शुरू करने से पहले अपनी सुरक्षा को प्रथम श्रेणी में रखता है। इसलिए किसी भी क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने से पहले वहां के आतंक-वाद को ख़त्म करना जरुरी है। वहीं अगर हम बायो युद्ध की बात करें तो यह महामारी प्रकृति से नही जन्मी बल्कि मानव निर्मित है जिसको आज हम कोरोना के नाम से जानते है। हमारे देश के कुछ राज्य आतंकवाद के कारण अपने  पर्यटन को पहले ही कम कर चुके थे पर इस कोरोना नामक महामारी ने भारत के प्रत्येक राज्य से पर्यटन को ख़त्म करने की कोसिस की।
भारतीय पर्यटन पर कोरोना का प्रभाव अत्यधिक देखने को मिल रहा है परंतु सवाल ये है कि इसका निवारण कैसे किया जाए जिससे ये प्रभाव कुछ कम हो सके। पर्यटन के कई प्रकार है कुछ ऐसे है जिसको इस महामारी में भी आगे बढ़ने का साधन बनाया जा सकता है जैसे कि मेडिकल टूरिज्म इस पर्यटन के अंतर्गत हम मरीजों को पूरा एक पैकेज प्रदान करते है जिसमे मरीज को उसके स्थान से हॉस्पिटल तक सुरक्षित पहुँचाया जाता है और उसका इलाज़ अच्छे विशेषज्ञों के द्वारा किया जाता है। उसकों अच्छे रूम में रखा जाता है व साथ साथ उसके स्वास्थ का ख्याल रखते हुए उसे लोकल पर्यटन स्थलों पर भ्रमण भी कराया जाता है। इस महामारी के समय हम अपने मेडिकल पर्यटन को बढ़ावा दे सकते है जिसमें हमारे द्वारा बनायी गयी कोविड वैक्सीन भी एक बड़ा रोल निभा सकती है। दुसरे पर्यटन की बात करें तो हम एडवेंचर टूरिज्म के ओर भी ध्यान दे सकते है जिसमे हम यात्रियों को पहाड़ी क्षेत्रों की तरफ ले जा सकते है जिसमे हिमाचल प्रदेश,उत्तराखंड, लेह और पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्य शामिल है। इस महामारी में हम जितना भीड़ वाले क्षेत्रों से दूर रहेंगे उतना ही अच्छा है इसलिए पहाड़ इसका सबसे अच्छा विकल्प है जहाँ यात्री अपने मेट्रो सिटी से दूर जाके कुछ दिन प्रकृति का आनंद उठा सकते है। तीसरा सबसे अच्छा पर्यटन विकल्प वेलनेस टूरिज्म है जिसमे कोई भी यात्री अपने स्थान को छोड़कर दुसरे स्थान पर योग व मैडिटेशन के लिए जाता है यह इस महामारी में सबसे अच्छा उपाय है जिससे आप अपने इम्युनिटी को बूस्ट कर सकते है। अपने स्थान से किसी पहाड़ी क्षेत्र पर रहकर योग व मैडिटेशन के द्वारा इस बीमारी से लड़ा जा सकता है। ऐसे कई टूरिज्म है जिसको पर्यटन मंत्रालय की मदद के द्वारा आगे ले जाया जा सकता है इसी को अवसर तलासना कहते है।
भारतीय पर्यटन के क्षेत्र को आगे बढाने के लिए पर्यटन मंत्रालय को कुछ नए स्कीम की शुरुवात करनी चाहिए जिसमें सामाजिक दूरी को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र को कमसेकम कछुआ की चाल से चला सके और इसमें भारत सरकार का योगदान भी जरुरी है लेकिन अगर हम पिछले वित्तीय वर्ष से तुलना करें तो इस वर्ष पर्यटन क्षेत्र  को कम बजट दिया गया है जोकि इस क्षेत्र के लिए निंदनीय है। पर्यटन मंत्रालय के लिए एक बार फिर से अपने समृद्ध संस्कृति को घरेलू व विदेशी पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करने का यह अच्छा अवसर है जिसका लाभ जरुर उठाना चाहिए।

कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से 
ये नए मिजाज का शहर है जरा फासले से मिला करो।  - डॉ बशीर बद्र 

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