लघुकथाओं की पोटली में 'चिल्हर'

पुस्तक: चिल्हर
लेखक: प्रदीप कुमार शर्मा
विधा: लघुकथा संग्रह (127 लघुकथाएँ)
आईएसबीएन: 978-93-90517-75-6
प्रकाशक: इंक पब्लिकेशन, प्रयागराज
कुल पृष्ठ: 128+4
मूल्य: ₹ 220.00 रुपये

समीक्षक: अर्विना गहलोत

डॉ. प्रदीप कुमार के लघुकथा संग्रह 'चिल्हर' के शीर्षक ने मेरा ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

वास्तव में 'चिल्हर' भी महत्वपूर्ण होती है, ₹ 100 में ₹ 1 रुपया कम हो, तो 99 ही रहता है। इस संग्रह की हर लघुकथा अपने आप में महत्वपूर्ण है। लेखक ने सम-सामयिक, राजनैतिक जनमानस की संवेदना को उकेरती हुई लघुकथाओं का सृजन किया है। इस संग्रह में कुल 127 लघुकथाएँ हैं, जिनमें जनमानस में पाई जाने वाली विसंगतियों को बखूबी उकेरा गया है। 

'कफन' लघुकथा के माध्यम से एक गरीब व्यक्ति की मनोदशा का प्रभावशाली वर्णन किया है जो बेहद मार्मिक है। लेखक का हृदय  अपने आसपास घटित होने वाली घटनाओं का अपने मस्तिष्क में मंथन करता है और अपने विचारों को शब्दों का जामा पहनाकर कथा के रूप में समाज के सामने प्रस्तुत करता है।

इस संग्रह की सभी लघुकथाएँ समाज को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हुईं प्रतीत होती हैं। पाठकों के लिए इन्हें पढ़कर अपने जीवन में आई नकारात्मकता को अपने से दूर रखने में लघुकथाएँ सहायक सिद्ध होंगी।

अर्विना गहलोत
लघुकथा 'शैक्षिक विकास' में शिक्षा के क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार को दर्शाती है। 'लाइक कमेंट्स' सोशल मीडिया के मोह को दर्शाती हुई लघुकथा है। सफारी सूट, क्वालिटी टाइम, भक्ति, जुगाड़, अपनी-अपनी विवशता आदि लघुकथाओं ने मुझे प्रभावित किया। 'मी टू' पर आधारित तीन अलग: अलग लघुकथाएँ लिखी गई हैं। एक ही लघुकथा भी होती तो बेहतर होता।   

'रक्तदान' लघुकथा समाज को रक्तदान की  प्रेरणा देती है।
'अपनापन' हो या 'मन की बात' सभी लघुकथाएँ अपनी सुंदर भाषा-शैली और प्रस्तुतिकरण के कारण पठनीय हैं। 

लघुकथाकार डॉ. प्रदीप की अब तक 15 पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। वे 40 से अधिक पुस्तकों का संपादन कर चुके हैं और 500 से अधिक रचनाएँ विभिन्न पुस्तकों में प्रकाशित हो चुकी हैं। 

बलात्कार, कन्या भ्रूणहत्या, ट्यूशन एवं कोचिंग की बीमारी, नशीले पदार्थों से हानि, दहेज, वृद्धाश्रम के कलंक, व्हाट्सएप का दुरुपयोग जैसी समस्याओं से दो-चार होना आज आम बात हो गई है। इन विषयों पर आधारित लघुकथाएँ इस संग्रह में हैं, जो समाज में फैली विसंगतियों की ओर हम सभी का ध्यान खींचने में सफल हुई हैं।
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प्रदीप कुमार शर्मा
लेखक: प्रदीप कुमार शर्मा
शिक्षा :- एम.ए. (हिन्दी साहित्य, राजनीति विज्ञान, शिक्षाशास्त्र), बी.एड., एम.लिब.आई.एस-सी., (सभी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण) पीएच.डी., C.G. T.E.T., U.G.C. N.E.T. 
आकाशवाणी केन्द्र, रायगढ़ (छ.ग.) में युववाणी तथा किसानवाणी कम्पीयर के रूप में कार्यक्रम संचालन। पत्र-पत्रिकाओं में पाँच सौ से अधिक रचनाएँ प्रकाशित। बत्तीस शोधपत्र राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं/पुस्तकों में प्रकाशित। तीस से अधिक राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला, सेमीनार में सक्रिय सहभागिता। 17 पुस्तकें प्रकाशित, कई पत्रिकाओंके सम्पादन मंडल में सम्मिलित।
चलभाष: +91 982 791 4888

समीक्षक: अर्विना गहलोत
जन्म 27 फरवरी, नगला दलपतपुर जिला बुलंदशहर
शिक्षा: एमएससी (वनस्पति विज्ञान), वैद्धविशारद
निवास: जिला गौतमबुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश)
ईमेल: ashisharpit 01@gmail.com

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