डॉ. जगदीश व्योम के श्रम और साधना का सुफल: एतिहासिक दस्तावेज: हिन्दी हाइकु कोश

समीक्षक: दिनेश पाठक ‘शशि’

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ईमेल: drdinesh57@gmail.com

पुस्तक: हिन्दी हाइकु कोश (हाइकु संकलन)
लेखक: डॉ. जगदीश व्योम
ISBN: 978.93.5445.630.5
पृष्ठ: 728
मूल्य: ₹ 1,100.00 रुपये
प्रकाशन वर्ष: 2022
प्रकाशक: निशात प्रकाशन, दिल्ली-110091


हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं, कहानी, लघुकथा, बालकहानी, बाल उपन्यास और गीत, नवगीत तथा हाइकु आदि में समान अधिकार से लेखनी चलाने वाले वरिष्ठ साहित्यकार डा. जगदीश व्योम का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। आप शिक्षा निदेशालय, दिल्ली सरकार से उप शिक्षा निदेशक के पद से सेवानिवृत्ति के उपरान्त स्वतंत्र लेखन में पूर्णतः संलग्न हैं।

दिनेश पाठक ‘शशि’
डॉ.जगदीश व्योम के गत 15 वर्ष के अथक परिश्रम एवं साधना के फलस्वरूप हिन्दी हाइकु कोश का प्रकाशन हुआ है।

5-7-5 के वर्णक्रम में मात्र 17 अक्षर की जापानी कविता, हाइकु कहलाती है जो आज केवल जापान तक ही सीमित नहीं रही अपितु विश्व की अधिकांश भाषाओं में रची जा रही है। भारत देश में हाइकु के उन्नायक और दिशा वाहक के रूप में प्रो. सत्यभूषण वर्मा का नाम उल्लेखनीय है जिनको जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने 1981 में -‘जापानी हाइकु और आधुनिक हिन्दी कविता’’ विषय पर पी-एच.डी प्रदान की थी। प्रो.सत्यभूषण वर्मा जी ने ही पहली बार अधिकारिक रूप से स्पष्ट किया था कि हाइकु 5-7-5 के वर्णक्रम में 17 अक्षरीय कविता है।

प्रो.नामवर सिंह का कथन है, "हाइकु एक संस्कृति है, एक जीवन पद्धति है। इसमें एक भावचित्र बिना किसी टिप्पणी के, बिना किसी अलंकार के प्रस्तुत किया जाता है, और यह भावचित्र अपने आप में पूर्ण होता है।

लगभग छह दशक से अधिक समय से हिन्दी में हाइकु लेखन जारी है। अनेक रचनाकार हाइकु के सृजन में रत हैं। उन अनेक सृजनकर्त्ताओं में से उत्कृष्ट को "सार-सार को गहि रहें, थोथा देय उड़ाय’’ की जटिल प्रक्रिया से गुजरते हुए लगभग पन्द्रह वर्ष के अथक परिश्रम और अनवरत साधना के द्वारा मथानी द्वारा मथे गये मट्ठे से निकले नवनीत की भाँति ही डॉ. जगदीश व्योम ने इस हाइकु कोश को प्रस्तुत किया है।

बीसियों हजार हाइकु कविताओं में से उत्कृष्ट हाइकु कविताओं का चयन पूरी लगन, एकाग्रता तथा निष्ठा के साथ करके इस हाइकु कोश में डॉ. जगदीश व्योम ने एक हजार पिचहत्तर हाइकुकारों के छह हजार तीन सौ छियासी हाइकु कविताओं को समाहित किया है जो अपने आप में एक एतिहासिक एवं अभूतपूर्व कार्य है।

इस हाइकु कोश की भूमिका प्रख्यात साहित्यकार श्री कमलेश भट्ट कमल जी द्वारा लिखी गई है जिसमें भूमिका "हिन्दी हाइकु कविता का व्योम’ के बहाने उन्होंने पूरे 24 पृष्ठ में हाइकु के उद्भव और विकास सन्दर्भित सुस्पष्ट तथ्यों को प्रस्तुत करते हुए अपने आप में पूर्ण शोध आलेख प्रस्तुत किया है।

डॉ. जगदीश व्योम के श्रम और कठिन साधना का अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इस हाइकु कोश में समाहित की गई हाइकु कविताओं को उनके रचनाकारों के माध्यम से मंगाकर एकत्रित नहीं किया गया । इस सन्दर्भ में डॉ.जगदीश व्योम अपनी बात के अन्तर्गत स्वयं बताते हैं कि-

"मैंने हाइकु संग्रहों, संकलनों, पत्र-पत्र-पत्रिकाओं, वेब पत्रिकाओं आदि के महासमुद्र को मथकर कुछ अच्छे हाइकु प्रस्तुत करने का विनम्र प्रयास किया है।’’ .....यह भी यहाँ बताना अनुचित न होगा कि हाइकु कोश के लिए किसी भी हाइकुकार से हाइकु मंगाये नहीं गए। सभी हाइकु विभिन्न श्रोतों से खोजे गये हैं। " (पृष्ठ-35)

इस हाइकु कोश के कुछ हाइकु- 

अतिभौतिकतावादी युग में इंसान अपनी इंसानियत को खोता जा रहा है। यही भाव कितने सटीक रूप से प्रकट कर रहा है यह हाइकु -

 इर्द-गिर्द हैं
साँसों वाली मशीनें
इंसान कहाँ।
डॉ.जगदीश व्योम (पृष्ठ-77)

मानव मन की कुटिलताएँ उसे सहज कहाँ रहने देती हैं। कितना कटु सत्य कहा गया है इस हाइकु में-

कौन मानेगा
सबसे कठिन है
सरल होना।
कमलेश भट्ट कमल (पृष्ठ-145)

और जहाँ हर तरफ झूठ का बोलबाला हो वहाँ सच्चे इंसान का आहत होना तो स्वाभाविक ही है। इसी कटु सत्य को इस हाइकु में दर्शाया गया है-

झूठों का मेला
लहूलुहान अब
सत्य अकेला।
सागर पाठक (पृष्ठ-252)

संतान की उत्तपत्ति के सुख की कल्पना मात्र से ही असीम पीड़ा को भी सहन कर लेने वाली माँ के लिए लिखा गया अद्भुत हाइकु-

 कराह रही
पी रही है दर्द को
रचती सृष्टि।
सुषमा चौरे (पृष्ठ-113)


और जीवन की आपाधापी में व्यस्त शहरी जीवन का वर्णन कैसे सहज रूप में कर दिया गया है एक छोटे से हाइकु में-

आठों पहर
दौड़े बदहवास
महानगर।
लक्ष्मीशंकर वाजपेयी (पृष्ठ-65)

झूठों के बीच एक सच्चे इंसान की व्यथित मनोदशा को दर्शाता यह हाइकु-

कैसे चलता
झूठ की दुनिया में
सच के साथ।
डॉ.करुणेश प्रकाश भट्ट (पृष्ठ-137)

इस हाइकु कोश में कई पीढ़ियों के हाइकुकारों के हाइकु समाहित किए गये हैं। कोश में सभी हाइकु अकारादि क्रम से सूचीबद्ध किए गये हैं किसी हाइकुकार की वय या लेखन वरिष्ठता के आधार पर नहीं।

हाइकु कोश का मुद्रण त्रुटिहीन एवं साफ-सुथरा है। आवरण आकर्षक है। हाइकु कविताओं में रुचि रखने वालों के लिए, विद्यार्थियों के लिए और सृजनकर्त्ताओं के साथ-साथ शोधार्थियों के लिए यह एक आवश्यक महत्वपूर्ण कोश है। इस उत्कृष्ट कोश के सम्पादन के लिए डॉ.जगदीश व्योम का नाम निश्चित ही इतिहास में दर्ज होगा, ऐसी आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है।


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