लंबी यात्रा: नवीन सिवा

नवीन सिवा
11 :00 AM, शनिवार, अगस्त 8, 2021

एयरपोर्ट की दो घंटे लंबी यात्रा के बाद मैंने ड्राइवर को धन्यवाद दिया। जैसे ही मैं कार से बाहर निकला, मैंने विस्मय से एयरपोर्ट इमारतों को देखा। मैंने फिल्मों और फोटो में एयरपोर्ट देखा था। यह पहली बार था जब मैं वास्तविक जीवन में किसी एयरपोर्ट को देख रहा था। 

मैंने अपने दो रोलिंग सूटकेस पकड़े और हवाई अड्डे में प्रवेश किया। रविवार को दोपहर के दो बजे थे और एयरपोर्ट हर उम्र के लोगों के साथ जिंदा दिल लग रहा था। मैंने वृद्ध पुरुषों को देखा, महिलाओं को देखा, बच्चों वाली माताओं को देखा, और ऊर्जावान छोटे बच्चों को देखा। मैं चेन्नई और बैंगलोर में कई बस अड्डों पर गया था, लेकिन हवाई अड्डे पर कभी नहीं गया। यह देखना दिलचस्प था कि एयरपोर्ट में आश्चर्यजनक रूप से कुछ बड़े बस अड्डों की तुलना में अधिक लोग थे। 

मैंने अपनी एयरलाइन लुफ़्तहांसा के काउंटर पर अपने बैग जमा किए, और सुरक्षा जाँच से होता हुआ अंदर अपने गेट पर आ गया, और महसूस किया कि यात्रा करने से पहले मेरे पास एक घंटा बचा है। कोविड के कारण सभी लोग मास्क पहने हुए थे और मैं वहाँ किसी को नहीं जानता था। मैं इधर-उधर घूमने लगा, और विशाल काँच की खिड़कियों की ओर बढ़ गया। मैंने बाहर देखा। अभी भी अंधेरा था, इसलिए मुझे ज्यादा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। कुछ देर तक झाँकने के बाद, मैंने हवाई जहाज देखे। यह पहली बार था जब मैं किसी एरोप्लेन को इतने करीब से देख रहा था। 

यदि आपने हवाई जहाज नहीं देखा है, तो मैं आपको बता कर सकता हूँ कि वह बहुत बड़ा था, बस की तुलना में  चार से पाँच गुना बड़ा। उसकी ऊँचाई तीन  मंजिला इमारत जितनी थी। मैंने अपना सिर बाईं ओर घुमाया, और रनवे पर एक हवाई जहाज देखा। यह तेज रोशनी से जगमगा रहा था, और मैंने मन ही मन सोचा, “वाह! क्या यह वास्तविक है!"

पहले, मैंने आकाश में हवाई जहाज देखे थे। वह दूर से एक चिड़िया जैसे लगते थे। मैं और मेरे मित्र आकाश पर जोर-जोर से चिल्लाते थे, उम्मीद करते थे कि हमें जवाब मिलेगा। लेकिन अब, मेरी आँख के ठीक सामने विशाल विमान थे। मैंने सोचा कि विमान, इतनी बड़ी और भारी वस्तुएँ हवा में कैसे उड़ाते हैं? यह कैसे संभव है? जब मैं एक छोटा पत्थर हवा में फेंकता हूँ , तो वह तुरंत नीचे गिर जाता है। लेकिन इतना बड़ा विमान कैसे लोगों को ले जा सकता है, हवा में उड़ते हुए, महासागरों में उड़ सकता है। यह देखकर मुझे आश्चर्य होता है कि मनुष्य क्या करने में सक्षम हैं।
***


3:00 AM, रविवार, अगस्त 8, 2021 

तभी घोषणा हुई की कि यह बोर्डिंग का समय है। मैं अपनी सीट से उतरा, अपना बैग लिया और लाइन की तरफ चला गया। मैं यह विश्वास नहीं कर सकता था कि मैं भारत छोड़ रहा था। मुझे याद है कि मेरे मन में मिश्रित भावनाएँ थीं। मैं दुखी था क्योंकि मैं अपनी माँ, पिता, भाई, परिवार और दोस्तों को पीछे छोड़ रहा था। मुझे पता था कि मैं उन्हें भविष्य में मिलूँगा, लेकिन मैंने उन्हें बहुत याद किया। मैं वह सब छोड़ने जा रहा था जो मैंने अपने पूरे जीवन में जाना था। लेकिन मैं उत्साहित था क्योंकि मैं ड्यूक यूनिवर्सिटी  जा रहा था। मेरे माता-पिता ने हाई स्कूल पूरा नहीं किया था, और यह रोमांचक था कि अपने परिवार में मैं अच्छी शिक्षा पाने वाला पहला व्यक्ति था, और अब मैं अमेरिका के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में जा रहा था।

यदि आप किशोरावस्था में अपने देश को छोड़कर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश जा रहे होते तो आपको कैसा लगता? मैं आपसे सहमत हूँ । अवसर प्राप्त करना बहुत ही रोमांचक है क्योंकि बहुत से लोगों को नहीं मिला है। लेकिन यह भी याद रखें, आप अपने पीछे उन जाने-पहचाने चेहरों को छोड़ रहे होंगे जिन्हें आप जीवन भर जानते रहे हैं। आप अपने माता-पिता, दोस्तों, परिवार और उन सभी लोगों को छोड़ देंगे जिन्हें आपने प्यार किया था। यह करना मुश्किल काम है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे वैसे भी करते हैं। दूसरी ओर की घास हमेशा हरी लगती है।

मेरे दस्तावेजों की जाँच के बाद, मुझे विमान में चढ़ने की अनुमति दी गई। हमें एक लंबे, संकरे रास्ते से गुजरना था जो हमें एयरप्लेन की इमारत से विमान के प्रवेश द्वार तक ले जाता था। यह एक छोटा रास्ता था, और मेरे सभी साथी यात्री अंदर चल रहे थे। जैसे ही में केबिन में प्रवेश किया, दो एयर होस्टेस ने मेरा स्वागत किया। मैंने उन्हें धन्यवाद दिया, और भीतर की ओर चलकर मुझे अपनी सीट मिली।  

मेरे ठीक बगल में जो व्यक्ति बैठा था, मैंने उसके साथ बातचीत शुरू की, और वह बहुत मिलनसार और खुले विचारों वाला आदमी था। उसने मुझे बताया कि वह भारत का एक पुजारी है, और अपने पेशे का अभ्यास करने के लिए कैलिफोर्निया, अमेरिका जा रहा है। जब वह मुझे अपने अनुभवों के बारे में बता रहा था, तभी पायलट ने घोषणा की कि हम उड़ान भरने के लिए तैयार हैं।

मेरा दिल दौड़ गया। क्या यह डर था या उत्तेजना? शायद दोनों। मैंने अतीत में विमान दुर्घटनाओं के बारे में कई कहानियाँ पढ़ थीं, और मुझे डर था कि मेरा विमान भी दुर्घटनाग्रस्त हो जाएगा। मैं मरना नहीं चाहता था। मैं केवल उन्नीस वर्ष का हूँ। मैं एक लंबा जीवन जीना चाहता हूँ और महान चीजें हासिल करना चाहता हूँ। जैसे ही विमान धीरे-धीरे चलने लगा, मैंने अपनी सीट को कस कर पकड़ लिया।

जैसे ही विमान रनवे पर आना शुरू हुआ, तेज आवाज हुई। मैंने खिड़की के बाहर देखा। मैंने देखा रास्ते में रंग बिरंगी रोशनी महसूस कर सकता था। मेरी सीट हिल रही थी। मैंने अपनी सीट बेल्ट और भी कस ली। विमान के अंतिम रनवे पर पहुँचाने के बाद, उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी और ऊपर उड़ गया। मेरी खिड़की के बाहर सब कुछ धुंधला था, और अचानक विमान ने उड़ान भरी। 

अब लग रहा था मैं वास्तव में भारत छोड़ रहा था। मेरा शरीर आगे की ओर झुक गया। मेरा पेट सिकुड़ गया। मेरे सिर बहुत लाइट हो गया। हवा का दबाव बढ़ने पर मेरे कानों में साइलेंस सुनाई देने लगा। विमान के स्थिर होने तक पूरा विमान हिल रहा था।

मैंने अपने पड़ोसी की ओर देखा, और वह मुझ पर मुस्कुराये। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि सब कुछ ठीक है, और विमान हमेशा इसी तरह से उड़ान भरते हैं। उन्होंने अपनी बातचीत में मुझे बताया कि वह कर्नाटक में पैदा हुए और वहाँ एक धार्मिक स्कूल में गए। अब, वह अमेरिका जाकर मंदिर में पूजा करवाने का काम करेंगे। 

उन्होंने शांत स्वर में कहा, "अपने अवसरों का उपयोग दूसरों की मदद करने के लिए करें। अगर आप ऐसा नहीं करते तो आप एक खोखला जीवन जी रहे है।"

मैंने कहा, "बिल्कुल! बेशक।"

उन्होंने आगे कहा, "मैं आपका भविष्य देख सकता हूँ।"
मैं चौंक गया। मैंने कहा, "क्या आप मुझे मेरा भविष्य बता सकते हैं"।

उन्होंने कहा, "आप जानना नहीं चाहते हैं।"

मैंने कहा, " चाहता हूँ आप बताएंगे?"

"तुम्हारा जीवन एक पहाड़ की तरह है। तुम ऊपर चढ़ जाओगे लेकिन नीचे सब कुछ खो दोगे। मतलब उन लोगों को खो दोगे जो तुम्हें प्यार करते हैं।”

मैं चौंक गया था। वाह! तो एक पुजारी ने अभी मुझे बताया कि मैं भविष्य में वह सब खोने जा रहा हूँ जिससे मैं प्यार करता हूँ। उसे कैसे पता चला कि मेरा जीवन क्या है? मैं बड़ी शक्ति में विश्वास करता हूँ, लेकिन भाग्य बताने और हस्तरेखा पढ़ने में विश्वास नहीं करता। इसलिए मैंने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया।

थोड़ी देर बाद धीरे-धीरे मेरी आँखें भारी होने लगीं और मैंने उन्हें बंद कर लिया। 

मैंने जीवन भर मेरे साथ हुई कई चीजों के बारे में सोचा। मुझे यहाँ नहीं होना चाहिए था। मुझे सबसे पहले एक विमान पर नहीं जाना चाहिए था, और नॉर्थ कैरोलिना के डरहम में ड्यूक यूनिवर्सिटी के कॉलेज में तो बिल्कुल नहीं। लेकिन क्यों, आप पूछेंगे? यह पूछने के लिए एक अच्छा सवाल है, और मुझे खुशी है कि आपने किया। इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए, मुझे आपको हवाई जहाज की सवारी तक की अपने जीवन कहानी के बारे में बताना होगा।

मैं चार लोगों के परिवार में पला-बढ़ा हूँ - एक पिता, माँ, एक छोटा भाई और मैं। जैसे मैंने पहले बताया कि मेरे माता-पिता ने हाई स्कूल पूरा नहीं किया था, और जीवन भर गरीबी में रहे थे। मैं इस परिवार में पैदा हुआ था, और मुझे अपने माता-पिता के समान जीवन जीने के लिए नियत किया गया था। मुझे वह घर याद आ गया जिसमें मैं बड़ा हुआ था। उसकी एक टूटी हुई छत थी, और हर बार बारिश होने पर, पानी भर जाता था, जिससे हमारे सोने के लिए कोई जगह नहीं बची थी। हम इस एक छोटे से कमरे में खाना बनाते थे, सफाई करते थे, और सुख-दुःख बाँटते थे। 

जब मैं साढ़े तीन साल का था, तो हमारे एक पड़ोसी ने मेरे पिता को तमिलनाडु के होसुर में शांति भवन नामक एक बोर्डिंग स्कूल के बारे में बताया। शांति भवन ग्रामीण भारत में एक रेजिडेंशियल स्कूल  है जो वंचित परिवारों के बच्चों को मुफ्त, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है। शांति भवन में एक स्क्रीनिंग प्रक्रिया थी, और मेरे पिता मुझे स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए ले गए। मुझसे पूछे गए सवालों के जवाब मैंने दिए, और मुझे स्कूल में दाखिला मिला। 

मेरी माँ ने मुझसे कहा था कि जब मैं चार साल का था तब वह मुझे बोर्डिंग स्कूल जाने देना नहीं चाहती थीं। लेकिन मेरे पिता ने जोर देकर कहा कि मैं जाऊँ क्योंकि उनके पास शिक्षा के लिए पैसे नहीं हैं। कभी-कभी, मैं खुद को अपनी माँ  की जगह रखकर सोचता हूँ। मैं यह कल्पना करने की कोशिश करता हूँ कि अपने चार साल के बेटे को अपने से विदा करना कैसा महसूस होता है। यह बहुत दर्दनाक होगा। मेरे माता और पिता ने निर्णय लिया कि मैं शांति भवन जाऊँ, और मैं बहुत खुश हूँ कि यह उसका निर्णय था।  

शांति भवन एक बोर्डिंग स्कूल था, इसलिए मैं जीवन भर वहीं पला-बढ़ा हूँ। यह मेरे साथ अब तक हुई सबसे अच्छी बात थी। यहाँ, मैं अपने जैसे कई बच्चों से मिला, एक अच्छे वातावरण में पला-बढ़ा, और मुझे ऐसे लगा जैसे मेरा एक नया परिवार है। शांति भवन का पूरा समुदाय बहुत प्यार और गर्मजोशी से भरा हुआ था, और इधर टीचर्स और स्टाफ हमारी सफलता के लिए प्रतिबद्ध था।

शांति भवन में, मुझे एक ऐसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर दिया गया, जिसे मेरा परिवार कभी भी वहन नहीं कर पाता। एकेडेमिक्स और एक्सट्रा-करिकुलर दोनों पर सामान रूप से ध्यान दिया गया। मैंने फुटबॉल और बास्केटबॉल खेला। मैंने स्कूल बैंड में गाना गाया, वाद-विवाद में भाग लिया। मैं दुनिया भर के लोगों से मिला। मेरी बातचीत हुई जिसने मेरी सोच को आगे बढ़ाया। मैंने गंभीर रूप से सोचना सीखा। मैंने सीखा कि दया, प्यार, सम्मान और ईमानदारी बहुत ज़रूरी है। मैं समझ गया था कि हमें अच्छा इंसान बनना है, और ये रिश्ते खास होते हैं।

मैं गारंटी दे सकता हूँ कि मुझे अपने गाँव के सरकारी स्कूल में यह कुछ भी नहीं मिल पाता। मेरा भाई एक गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ता है और उसको शिक्षा ठीक से नहीं मिल रही है।  

अपनी 12 वीं कक्षा की राष्ट्रीय परीक्षाओं में अच्छे प्रदर्शन के बाद, मुझे यूनाइटेड स्टेट्स के कॉलेजों में आवेदन करने का अवसर दिया गया। मैंने एस ए टी की तैयारी की और कॉलेज के दाखिला के लिए अच्छा सा निबंध लिखा। उसके बाद दाखिला मिला और ड्यूक यूनिवर्सिटी ने मुझे स्वीकार कर किया। 

मेरे अतीत ने मुझे नींद से जगा दिया।  फिर, मैंने अपने आप से कहा, “मैं इस मौके का उपयोग करने जा रहा हूँ जो मेरे माता-पिता को यह कभी नहीं मिला, मेरे भाई को नहीं मिला। मेरे चचेरे भाई या मेरे समुदाय के अन्य दोस्तों को यह नहीं मिला। इसलिए मैं यूनाइटेड स्टेट्स में कॉलेज जाने के अपने मौके का पूरा उपयोग करने की बहुत कोशिश करूँगा।

[वापस एरोप्लेन में]

एक लंबी और थकान भरी यात्रा के बाद, मैं 8 अगस्त को 1:00 बजे डरहम, नॉर्थ करोलिना पहुँचा। मैं फ्रैंकफर्ट जर्मनी, न्यूआर्क और अंत में रैले-डरहम आया था। यात्रा में मुझे 20 घंटे से अधिक समय लगा और मैं थक गया था। जब मैं अपने होटल के कमरे में पहुँचा तो मैं अपने बिस्तर पर गिर पड़ा और सोने चला गया। मैं यहाँ था, अमेरिका में। 
***


अगस्त 9, 2020

बाहर एक उजली सुबह थी। पक्षी चहक रहे थे, और हवा धीमी गति से चल रही थी। सूरज धीरे-धीरे उग रहा था। मेरा अलार्म बज उठा और मैंने उसे स्नूज़ कर दिया। मुझे बहुत नींद आ रही थी। मैं जागना नहीं चाहता था। फिर से, कुछ मिनटों के बाद मेरा अलार्म बजा।

"मैं जागना नहीं चाहता!"

फिर, अचानक, मुझे अपनी माँ की आवाज़ सुनाई देती है, “बेटा, तुम क्या कर रहे हो! उठो! सात बज गए।"

मैंने जवाब दिया, "दस मिनट और अम्मा , प्लीज"।

उसने कहा, "आज भारत में तुम्हारा आखिरी दिन है। आज शाम को अमेरिका जा रहे हो। आखिरी बार अपने परिवार के साथ समय बिताओ । उठो, अपना चेहरा धो लो।”

मैं चौंक गया। मैं सिर्फ 24 घंटे के लिए विमान में था। मैं एक पुजारी से मिला, और अपने जीवन के बारे में सोचा और मैं क्या करने जा रहा था। अब, यहाँ मैं अपने कमरे में वापस अडयार, चेन्नई, तमिलनाडु में हूँ।

तब मुझे एहसास हुआ कि यह सब सिर्फ एक सपना था। मैंने संयुक्त राज्य अमेरिका की अपनी यात्रा के बारे में पहले भी सपना देखा था, लेकिन यह इतना यथार्थवादी था कि मुझे विश्वास हो गया था। मैं आज रात को निकलने वाला था। आज भारत में मेरा आखिरी दिन था। मैं अपने परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहता था। इसलिए मैं अपने बिस्तर से उठा, अपने दाँत ब्रश किए, और तैयार हो गया।

मैं नाश्ता करने के लिए नीचे गया। मुझे तीखे, बटर चिकन करी की महक आई। मेरी माँ ने मेरे लिए सब्जी पुलाव भी बनाया था। ये मेरा पसंदीदा भोजन था। मैंने अपने भाई को बुलाया, “सतीश! आओ नाश्ता कर लो!"

मैंने जल्दी से साबुन से हाथ धोए और टेबल की तरफ भागा। मेरी माँ ने मुझे एक थाली दी, और मुझे दो पूरियाँ परोसी। फिर, उसने कुछ बटर चिकन निकाला और मेरी प्लेट में रख दिया। मुझे भूख लगी थी।

मैंने पहला कौर खाया। 

"हम्म। यह बहुत स्वादिष्ट है। इसका स्वाद बहुत अच्छा है। धन्यवाद, अम्मा।"

"मुझे खुशी है कि तुम यह पसंद आया बेटा। क्या यह बहुत मसालेदार है? क्या इसमें नमक है?"

"हाँ, माँ। यह तीखा और स्वादिष्ट है। इसमें नमक भी ठीक है।"

मैंने 8 पूरियाँ और 4 सर्विंग बटर चिकन खाया। मुझे वह खाना बहुत पसंद था जो मेरी माँ ने मेरे लिए बनाया था। वह हमेशा मेरी पसंद का खाना बनाने के लिए समय निकलती थीं। मैंने वास्तव में उसकी सराहना की और उसे लगातार ऐसा करने के लिए प्यार किया।

पापा टेबल की तरफ बढ़े। उन्होंने मुझे गुड मॉर्निंग विश किया और कहा, "कैसे हो बेटा?"

मैंने कहा, "मैं बहुत अच्छा कर रहा हूँ, अप्पा। मेरा पेट भर गया है क्योंकि मैंने अभी 8 पूरी खाई हैं।"

"हा, हा! यह बहुत सारा खाना खाने की उम्र है।"

"हाँ। काश मैं और खा पाता।"

"ठीक है बेटा। क्या तुमने अपनी जरूरत की हर चीज पैक कर ली है?"

"हाँ, अप्पा। मैंने अपने सारे कपड़े, जूते, किताबें, सब सामान पैक कर लिया है। मुझे लगता है कि मेरे पास सब कुछ तैयार है।”

"कुछ भी मत भूलना बेटा। अगर ऐसा है, तो चलो मंदिर चलें और पूजा करें। यह आखिरी बार होगा जब तुम यहाँ किसी मंदिर में जाओगे बेटा।"

"ठीक है अप्पा। मैं जल्दी से तैयार हो जाता हूँ"।

मैं ऊपर भागा, अपने जूते पहने और अपना फोन पकड़ लिया। मुझे मंदिर जाना अच्छा लगता था। मुझे फूल और अगरबत्ती की महक बहुत पसंद थी। पवित्रता की भावना मेरी आत्मा को ऊपर उठाती है। मुझे वह हिस्सा भी पसंद है जहाँ आप भगवान से प्रार्थना करते हैं। यह ऐसा है जैसे आप अपने मन में भगवान से बात कर रहे हैं, और कोई और नहीं जानता कि आप क्या प्रार्थना कर रहे हैं। आपका परमेश्वर के साथ एक व्यक्तिगत अनुभव है। लेकिन मैं हमेशा सोचता था, अगर हर कोई परमेश्वर के साथ व्यक्तिगत अनुभव कर रहा है, तो परमेश्वर मेरी बात कैसे सुनेगा? भगवान को कितने लोगों की बात सुननी पड़ेगी। मैं उसके लिए खास नहीं हूँ। 

मुझे हिन्दू धर्म बहुत दिलचस्प लगता है, और मैं यह समझने की कोशिश करता हूँ कि इसमें रीति-रिवाज़ क्यों है?

"क्या तुम तैयार हो बेटा?" मैंने अपने पिता को सुना।

"हाँ, लगभग” मैंने जवाब दिया।

मैं नीचे गैरेज की ओर भागा। कार में मेरा भाई और माँ पहले से ही मेरा इंतजार कर रहे थे। मैं अंदर गया, और हम मंदिर गए।

मंदिर में हमेशा की तरह भीड़ थी। लोग अपने परिवार के साथ पूजा कर रहे थे। हम अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे कि एक भिखारी हमारे पास आया। उसने फटे-पुराने कपड़े पहने हुए थे, और हमसे पैसे मांग रहा।

उसने कहा, "मेरी मदद करो। मैं भूखा हूँ।"

यह असामान्य नहीं था। मंदिर बहुत सारे बेघर लोगों का घर है। उनके जीवित रहने का एकमात्र तरीका पैसे माँगना है।

भारत में ज्यादातर लोग या तो दया के लिए भिखारियों को पैसे देते हैं, या बिल्कुल भी उनकी मदद नहीं करते हैं। मेरे पिता ने उसे कुछ रुपये दिए, और उसे जाने के लिए कहा।

लेकिन भिखारी ने ऐसा नहीं किया।

उसने मेरी तरफ देखा। वह नहीं रुका।

मेरे पिता ने उन्हें पहले विनम्रता से जाने के लिए कहा। लेकिन जब वह नहीं गया, तो मेरे पिता उस पर चिल्लाये।
भिखारी ने कहा, "दूसरों की मदद करने के लिए तुम अवसरों का उपयोग करो। यदि तुम ऐसा नहीं करते, तो तुम वह सब खो दोगे। तुम्हारी अमेरिका की सुरक्षित यात्रा हो।” और वह चला गया। 

मैं उलझन में था। मैं भयभीत था। अभी क्या हुआ था? दूसरों की मदद करने के लिए अपने अवसरों का उपयोग करें? उसे कैसे पता चला कि मैं आज यात्रा कर रहा हूँ? भिखारी का संदेश जाना-पहचाना था। मैंने इसे पहले सुना था। मैंने यह याद करने की कोशिश की कि मैंने इसे कहाँ सुना था। तब मुझे एहसास हुआ कि मेरे सपने में पुजारी ने भी मुझसे यही बात कही थी। "आप जिसे प्यार करते हैं उसे खो देंगे"। उनकी आवाज़ें और चेहरे के भाव एक जैसे थे। मैं डर गया था। इस सबका क्या मतलब था?

मेरे पिता ने मुझे शांत होने के लिए कहा। मैंने थोड़ा पानी पिया। मेरी साँसें धीरे-धीरे शांत हो गई। फिर, हमने अपनी पूजा जारी रखी। मैंने भगवान से प्रार्थना की, कुछ प्रसाद खाया और आराम करने की कोशिश की। लेकिन भिखारी के साथ हमारी बातचीत मेरे दिमाग में थी।

फिर, हम घर वापस चले गए और बस आराम किया।

दिन के अंत में, पूरा परिवार एक साथ कॉमन रूम में बैठ गया। हमने भगवान से प्रार्थना की। हमने ड्यूक विश्वविद्यालय में विदेश में अध्ययन करने के शानदार अवसर के लिए भगवान को धन्यवाद दिया। हमने अपने सुखी और स्वस्थ जीवन के लिए उनका धन्यवाद किया। हमने अद्भुत परिवार के लिए भगवान को धन्यवाद दिया। 

बाद में, हम सभी ने अब तक की सभी यादों के बारे में बात की। हम अपने बचपन की यादों पर हँसे। हमने एक दूसरे के साथ समय का आनंद लिया। फिर, मेरे पिता और माँ ने मुझे एक नए देश में मजबूत और बहादुर होने की सलाह दी। अपने माता-पिता की सलाह सुनकर मुझे हमेशा खुशी होती थी। मुझे पता था कि वे मुझे कभी कुछ  गलत नहीं बताएंगे। 

[कई घंटे बाद]

अंत में, मेरे जाने का समय हो गया। मेरी कार यहाँ आ गई। मैंने अपने परिवार को अंतिम बार गले लगाया और कहा कि मैं उनसे बहुत प्यार करता हूँ। माँ और भाई को रोता देख मैं रोने लगा। मुझे पता था कि मैं उन्हें बहुत मिस करूँगा। मैं कार के अंदर बैठ गया और उन्हें अलविदा कह दिया। कार चलने लगी और मुझे अपने अंदर उदासी का अहसास होने लगा। मुझे उनकी बहुत याद आएगी। मुझे मालूम था। 

एयरपोर्ट तक की दो घंटे लंबी यात्रा के बाद मैंने ड्राइवर को धन्यवाद दिया। जैसे ही मैं कार से बाहर निकला, मैंने विस्मय से एयरपोर्ट इमारतों को देखा। और यह पहली बार था जब मैं वास्तविक जीवन में इस को देख रहा था। 
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नवीन सिवा का परिचय: भारत के कर्नाटक राज्य में जन्म। माता और पिता भारतीय मूल के हैं। ड्यूक विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान और अर्थशास्त्र का अध्ययन और हिंदी के प्रथम वर्ष का छात्र। दुनिया घूमने में दिलचस्पी है। हिंदी और अंग्रेजी के अलावा तमिळ और कन्नड़ भाषा का ज्ञान। लोगों के उत्थान और मदद में रुचि।

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