आरक्षण की तलवार: ऋतु गुप्ता

आरक्षण की तलवार से, बच्चों का भविष्य मत छाँटो,
सुख संसाधन सारे बाँटो, सीट गुणों की मत बाँटो।

आओ फिर से समय आ गया, फिर एक मंथन कर लें हम,
जिस बच्चे में हो प्रतिभा, उसको प्रोत्साहन देवें हम।

आज फिर एक बार हमको, नया नजरिया रखना होगा,
आरक्षण से जो क्षति हुई देश की,उसका हर्जाना भरना होगा।

अगर चाहो एक सुदृढ़ भारत, इसकी तस्वीर बदलनी होगी,
जात पात से ऊंचे उठकर, सिर्फ प्रतिभा ही तराशनी होगी।

आरक्षण का असर देखो,दो हजार रैंक का चपरासी बनता है
पच्चीस हजार रैंक वाला बच्चा, उस पर शासन करता है।

निर्धन तो कोई भी हो सकता,चाहे हरिजन हो,या चाहे सवर्ण,
कुछ कोटे वाले मर्सिडीज़ में घूमते, कुछ सवर्णों को न रोटी न घर।

थाली में परोस कर मिलता धनवानों को, तो वो कुछ सीढ़ी चढ जाते, 
कुछ जो है आरक्षण कोटे से, बिन क्षमता ही नाम कमा जाते।

कुछ बच्चे विरले ही होते, जो जनरल या मध्यम वर्ग से होते हैं,
ना कोई कोटे, संसाधन इनको, फिर भी ये रोशन होते हैं।

परोसे हुए से तो कोई भी, कामयाबी हासिल कर सकता,
सफल वही इस जग में मित्रों,जो प्रतिभा के दम पर बढ़ता।

यदि गुणों को हम दे प्राथमिकता, सभी डॉक्टर निपुण होंगे,
निर्माण बखूबी होंगे तब जब, कुशल सभी इंजीनियर होंगे।

सभी बच्चों को सभी छात्रों को, क्षमता के बल पर आँकें हम,
नहीं अब जात पात के नाम पर, इनका भविष्य = बाँटें हम।

तब जाकर भारत की फिर से, एक नई छवि निर्मित होगी,
बड़ी से बड़ी डिग्री फिर देश में,सही सार्थक हाथों में होगी।

भारत होगा शीर्ष पर फिर एक दिन, जब सभी पोस्ट पर कुशल होंगे,
देश-विदेश में डंके बजेंगे, हमारे बच्चे (चिराग़) फिर से रोशन होंगे।

इसलिए ये अपील मै फिर एक बार आपसे से करती हूँ...

इस सच्चाई का अब करो सामना, तभी तो कुछ हल होगा,
तभी तो भारत विश्व गुरु बनकर, इस विश्व में रोशन होगा।
***

खुर्जा बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)

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