मनोरंजक एवं शिक्षाप्रद बाल कविताओं का संग्रह: अपनी धरती अपना देश

समीक्षक: दिनेश पाठक ‘शशि’

28, सारंग विहार, मथुरा-6; चलभाष: +91 987 063 1805; ईमेल: drdinesh57@gmail.com

पुस्तक: अपनी धरती अपना देश (बाल कविता संग्रह)
ISBN: 979-888749415-9
लेखिका: श्रीमती विमला रस्तोगी
प्रकाशक: एक्सप्रेस पब्लिशिंग, तमिलनाडु-600004 
मूल्य: ₹ 200 रुपये
पृष्ठ:42
संस्करण: 2022


 बच्चों का हृदय कोरे कागज सरीखा होता है। कोरे कागज पर आप जो भी इबारत लिखना चाहें, आसानी से लिख सकते हैं। इसीलिए पुराने समय में सोने से पूर्व अपने नौनिहालों को चरित्र निर्माण करने वाली कहानियाँ, रामचरित मानस के दोहे और चौपाइयाँ सुनाया करते थे किन्तु आज के व्यस्ततम जीवन में उस कमी की पूर्ति कई बाल पत्रिकाएँ एवं कविता तथा कहानी-संग्रह कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान लखनऊ का वर्ष-2021 का सुभद्रा कुमारी चौहान बाल साहित्य सम्मान प्राप्त करने वाली वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती विमला रस्तोगी का बाल कविता-संग्रह-‘अपनी धरती अपना देश" भी उसी कड़ी का एक हिस्सा है।

 हिन्दी साहित्य जगत में बाल साहित्य लेखन के लिए ही नहीं बल्कि कविता, कहानी, नाटक, एकांकी आदि लेखन के लिए श्रीमती विमला रस्तोगी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। संग्रह -"अपनी धरती अपना देश" इनका सद्यः प्रकाशित बाल कविता संग्रह है जिसमें में कुल ग्यारह बाल-कविताएँ समाहित की गई हैं। संग्रह की सभी कविताएँ सहज एवं सरल भाषा में लिखी गई हैं जो बच्चों को बहुत पसन्द आयेंगीं। बच्चे इन्हें गुनगुनाकर पूर्ण आनन्द प्राप्त कर सकते हैं। 
 
 संग्रह की पहली कविता का शीर्षक है-‘बस्ता’। बच्चे अक्सर ही विद्यालय से आते ही अपने बस्ते को इधर-उधर फैंक देते हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर लेखिका ने लिखा है-

"रखा नहीं ठीक से बस्ता, देखो हालत हो गई खस्ता

बस्ता मुझसे बोल पडा, मेरे आगे हुआ खड़ा।

कॉपी किताब फटें नहीं, नाम स्कूल से कटे नहीं

मुझे ठीक से रखा करो, मेहनत करके पढ़ा करो। (पृष्ठ-13)
दिनेश पाठक ‘शशि’

 संग्रह की दूसरी कविता का शीर्षक है-‘हम सबका बागीचा’। इस कविता में विदुषी लेखिका विमला रस्तोगी जी ने फल और सब्जियों के महत्व को दर्शाते हुए उनके खाने के लाभ बताये हैं।

‘एक सीख’- संग्रह की तीसरी कविता है जिसमें प्रातः जल्दी जागने, व्यायाम करने, ध्यान से पढ़ाई करने, समय से भोजन करने तथा आराम करने आदि के बारे में अच्छी जानकारी दी हैं-

‘ध्यान लगाकर करो पढ़ाई, नहीं किसी से करो लड़ाई

घर आ करके खाना खाओ, थोड़ी देर को तुम सो जाओ। (पृष्ठ-18)

क्विता- गर्मी आई, गिलहरी की राखी, गुड़िया रानी, होली का त्यौहार’ सभी बच्चों के मन को गुदगुदाने वाली कविताएँ हैं।

अपनी धरती अपना देश’ कविता बच्चों को सहज में ही अपने देश के बारे में बहुत कुछ जानकारी प्रदान कर देती है-

‘पूरब में वो खड़ा हिमालय, कुछ हमको बतलाता है
हर संकट में स्थिर रहना, यह संदेश सिखाता है।
झर-झर करके बहता झरना, करता नहीं कभी विश्राम
चुपके से हमसे कह जाता, गति ही है जीवन का नाम। (पृष्ठ-32)

स्ंग्रह की अन्य कविताओं के शीर्षक हैं- रेलगाड़ी, खिलौने तथा गुब्बारे, जो शीर्षक से ही नहीं पढ़ने में भी मनोरंजक हैं।

 कुल मिलाकर संग्रह की सभी कविताएँ मनोरंजक एवं शिक्षाप्रद हैं, पुस्तक का गेटअप तथा प्रत्येक कविता पर लगे चित्र रंगीन एवं बहुत ही लुभावने हैं। पुस्तक उच्च स्तरीय आर्ट पेपर पर प्रकाशित की गई है। हिन्दी साहित्य जगत में पुस्तक का सर्वत्र स्वागत होगा, ऐसी आशा है।

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