रैयौली गाँव (गुजरात): भारत का जुरासिक पार्क।

राजेंद्र कुमार शर्मा

राजेंद्र कुमार शर्मा


स्टीवन स्पीलबर्ग द्वारा निर्देशित साइंस फिक्शन एक्शन फिल्म जुरासिक पार्क (1993), विलुप्त डायनासोर के जीवन पर आधारित सबसे सफल फिल्म रही है। डायनासोर पृथ्वी पर जुरासिक काल में पृथ्वी पर पाए जाने वाले कुछ विशालकाय, तो कुछ छोटे, कुछ दो पैर वाले तो कुछ चार पैर वाले, कुछ मांसाहारी, तो कुछ शाकाहारी जीव रहे हैं। जीवाश्म विज्ञानी वर्तमान के पक्षियों को डायनासोर का वंशज मानते हैं।

"डायनासोर " का शाब्दिक अर्थ है भयानक छिपकली जिनमे प्रजनन क्रिया अंडे के द्वारा होती थी अर्थ ये भी पक्षियों या सरीसर्प के जैसे अंडज जीव रहे होंगे।डायनासोर की लगभग 1000 प्रजातियों का पता जीवाश्म विज्ञानी लगा चुके है। इन जीवों के अवशेषों का पृथ्वी लगभग हर महाद्वीप में पाया जाना ये इंगित करता है को इनकी प्रजातियों की संख्या बहुत अधिक रही है।

उन्ही प्रजातियों में से लगभग 13 प्रजातियों की खोज जीवाश्म विज्ञानियों ने गुजरात (भारत) के बाला सिनोर  के रैयौली गाँव के जंगलों में  की। ये स्थान 1980 के दशक में  अचानक ही सुर्खियों में आ गया जब रैयौली गाँव में जीवाश्म विज्ञानियों को इतफाक से जीवाश्म अवशेषों एवम हड्डियों का पता चला। देखते ही देखते यह जगह शोधकर्ताओं से भर गई और इस क्षेत्र की खुदाई से ये तथ्य सामने आया की लगभग 67 मिलियन वर्ष पहले डायनासोर की 13 प्रजातियां पनपी थी, जो खुरदरा, मोटी टांगो वाले, कलगीदार सिंग वाले मांसाहारी जीव रहे हैं। जोकि ट्रायरनोसर्स परिवार से संबंध रखते थे।  रैयौली गाँव में खोजे गए डायनासोर को नाम दिया गया "राजसौरस नरमेंडेसिस" जिसमे राजा शब्द का प्रयोग किया गया   कलगीदार सींग वाले तथा दूसरा शब्द "नरमेंडेसिस" इस स्थान की भौगोलिक स्थिति को दर्शाता है, यानी नर्मदा नदी के पास का स्थान।

डायनासोर जीवाश्म पार्क की यात्रा निश्चित रूप से भारत में डायनासोर के इतिहास को जानने के लिए मजबूर कर देती। रैयौली स्थित जीवाश्म पार्क को मुख्यत दो भागों में बाँट सकते है, पहला है डायनासोर जीवाश्म संग्रहालय  जिसमे डायनासोर के अंडे, उनके शरीर की हड्डियों के अवशेष सहेजे गए है  और 40 मूर्तियों को चित्रित किया गया है जो उनके आकार, आदतों और आवास पर प्रकाश डालता है, और दूसरा भाग है वो वास्तविक खुदाई स्थल, जहाँ की खुदाई में इन विशालकाय जीवों के अंडे और शरीर के विभिन्न भागों की हड्डियों के अवशेष मिले है। इस स्थान का भ्रमण करना जहाँ आपको जिज्ञासा और कोतुहल से भर देगा वहीं यहाँ की प्राकृतिक वनों के बीच बनाए गए खुदाई स्थलों को  स्वयं जाकर देखना  रोमांचित करने वाला अनुभव  है।

डायनासोर संग्रहालय एवम पार्क का निर्माण / अन्वेषण 2001 में आरंभ हुआ था, जिसको दर्शकों और जिज्ञासुओं के लिए  9 जून,2019 को खोल दिया गया। डायनासोर संग्रहालय एवम पार्क का उद्घाटन उस समय गुजरात के  मुख्यमंत्री रहे श्री विजय रूपाणी जी ने किया था। संग्रहालय 25000  वर्ग फुट से अधिक के क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमे तहखाने और भूतल 10 दीर्घाएं बनी हुई है जिसमे डायनासोर के जीवन और उल्कायो के पृथ्वी से टकराने और उसके प्रभावों को दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त डायनासोर के विशालकाय प्रतिमान यहाँ आने वालों को जुरासिक पार्क का अनुभव करवाता है। इस संग्रहालय का सबसे बड़ा आकर्षण है यहाँ खुदाई में निकले डायनासोर के अंडे और उसके शरीर की हड्डियों, जैसे मेरुदंड की हड्डियों, के जीवाश्म को देखना।

रैयौली स्थित डायनासोर संग्रहालय एवम पार्क देश का पहला तथा विश्व का तीसरा डायनासोर जीवाश्म पार्क है। रैयौली डायनासोर जीवाश्म स्थल, विश्व का तीसरा सबसे बड़ा जीवाश्म स्थल है। 

कैसे पहुँचा जाए रैयौली स्थित डायनासोर संग्रहालय एवम पार्क: यह संग्रहालय और पार्क गुजरात के महीसागर जिले के बाला सिनोर क्षेत्र में स्थित है जो अहमदाबाद से लगभग 90 किलोमीटर दूर है। तथा बाला सिनोर से 15 किलोमीटर  राज्य राजमार्ग संख्या 141 पर जलोद - अहमदाबाद मार्ग पर स्थित है। अहमदाबाद से एक दिन में ही यहाँ आकर, भ्रमण करके वापिस जाया जा सकता है। राज्य सरकार को इस महत्वपूर्ण स्थान को विकसित करने की दिशा में काम करने की भी जरूरत है। ताकि यात्रियों को और अधिक सुविधाएँ मिल सकें।












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परिचय: राजेंद्र कुमार शर्मा 
मैं वर्ष 1995 से साहित्यिक गतिविधियों एवम साहित्य सेवा में क्रियाशील हूँ। मेरी मातृ भाषा हिंदी  है अतः मैंने अपनी साहित्यिक रचनाओं में मेरी मातृ भाषा को ही एक सशक्त माध्यम रूप में प्रयोग किया है। मेरा साहित्यिक यात्रा, राष्ट्रीय समाचार पत्रों के पाठकीय स्तंभ से आरंभ हुई।  कई वर्षों तक मैने सामाजिक कुरीतियों और अन्य आर्थिक, राजनैतिक, साहित्यिक  मुद्दों देश में प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों में लिखा।  पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण कुछ वर्षों तक अपने लेखन  कार्य में कुछ वर्षों के विराम के बाद, वर्ष 2021 में  पुनः लेखन आरंभ किया।

निवास: देहरादून, उत्तराखंड।
ईमेल: rksmyvoice@gmail.com
चलभाष: 8954034771

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