युद्ध उन्मूलन एवं विश्व शांति की संकल्पनाओं का महत्वपूर्ण दस्तावेज है 'मैं समय हूँ'

समीक्षकः प्रदीप उपाध्याय



पुस्तक: मैं समय हूँ (उपन्यास)
लेखक: राजकुमार चन्दन 
प्रकाशक: साधना कुंज पब्लिकेशन, देवास, मध्य प्रदेश



बहुमुखी प्रतिभा के धनी राजकुमार चन्दन का उपन्यास 'मैं समय हूँ' अपने समय का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। वे एक शिक्षाविद होने के साथ ही विभिन्न विधाओं में सिद्धहस्त हैं। लेखक स्वयं पाँच विश्व रिकॉर्ड धारक एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक हैं। विश्व की ज्वलंत समस्याओं पर उनकी पैनी दृष्टि है, उतनी ही गहरी समझ और उनपर उनका अपना दृष्टिकोण है। 

दुनिया शस्त्रों की अंधी दौड़ में लगी हुई है,युद्धोन्माद में विश्व अशांत माहौल में है। दो विश्वयुद्ध झेल चुकने तथा दुनिया भर में रसायनिक हथियारों के प्रयोग जिनमें कोरोना जैसी महामारी एक उदाहरण के रूप में हमारे सामने है, वहां रचनाकार ने रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में यूक्रेन में अध्ययनरत भारतीय तथा अन्य देशों के चिकित्सा शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों द्वारा विश्व शांति के विचार के साथ दृढ़ता से शांति स्थापना के प्रयास करने का एक प्रयोगवादी उपन्यास 'मैं समय हूँ' के रूप में प्रस्तुत किया है। साधना कुंज पब्लिकेशन से प्रकाशित 216 पृष्ठों का यह उपन्यास पाठक के सामने युद्ध की भयावहता, युद्ध की विभीषिका, अशांत माहौल और हताशा के बीच शांति की स्थापना का संकल्प भी प्रस्तुत करता है। 

राजकुमार चन्दन जी ने जहां सबसे बड़ी कारपेट रंगोली, दुनिया की सबसे बड़ी वाटर रंगोली,यूनिक वाटर रंगोली बनाकर तथा पुस्तक का तत्काल लेखन एवं प्रकाशन व विश्व की सबसे बड़ी ग़ज़ल लिखकर पांच अनूठे विश्व रिकार्ड बनाए हैं, वहीं उनके रचना संसार में स्वयं की खोज, डिस्कवरी ऑफ हेवन,लाडो!बहक न जाना, वन्दे मातरम्,डर के आगे जीत है, मनुष्य जीवन और कुंभ, चुनौतियों का सफर तथा शब्द शिल्प प्रमुख हैं। 

चलिए,अब इस उपन्यास पर भी कुछ चर्चा कर ली जाए। उपन्यास के प्रकाशक ओमप्रकाश जी ने लिखा है कि, "राजकुमार चन्दन ने इस उपन्यास के माध्यम से धरती के मनुष्य पर छाए संकट के प्रति आगाह किया है। उन्होंने मानवतावादी पक्ष को सर्वोपरि रखते हुए युद्ध एवं सीमाओं की ज्वलंत समस्याओं के हल रखे हैं जो वैश्विक जरूरत है। " उन्होंने आगे लिखा है, "इसमें सिर्फ घटनाओं, चुनौतियों और मुश्किलों को ही स्थान नहीं दिया गया है बल्कि उसके जन्मदाता विचार या दृष्टिकोण को आधार बनाया गया है और जहां से वे शांत हो सकते हैं,उस मूल स्त्रोत की बात कही है। 

उपन्यासकार ने स्वयं अपनी बात में लिखा है कि, "विश्व का जहाज़ डूबने को है और सब अपने अपने कैबिन बचाने में लगे हुए हैं। क्या इस स्थिति में जहाज़ बच सकता है?" उन्होंने लिखा है कि, "पूरी दुनिया युद्ध और सीमाओं के जाल में फंसकर छटपटा रही है। विश्व निरन्तर विनाश की ओर बढ़ता जा रहा है। अशांति के इस दौर में,यह उपन्यास विश्व शांति का एक अनूठा विकल्प प्रस्तुत करता है। "

उपन्यास लिखने के उद्देश्य के बारे में उन्होंने लिखा है कि, "रूस-यूक्रेन लड़ाई की पृष्ठभूमि तो मात्र एक बहाना है, इस उपन्यास के माध्यम से विश्व शांति के कुछ बुनियादी उपायों को विश्व पटल पर रखना ही एकमात्र उद्देश्य है। "

उपन्यास में निहित समस्त घटनाक्रम समय के साथ चलता है। लगता है कि रंगमंच पर आने वाले समस्त दृश्यों को समय ही दृश्यवान बना रहा है। समय आत्मकथ्यात्मक शैली में अपनी बात कहता है-"मैं समय हूँ…!" सृष्टि के निर्माण का साक्षी। मैंने सौरमंडल,तारे तथा कई ग्रहों को बनते-बिगड़ते देखा है। मैं सब जगह पहले भी था, अभी भी हूँ…और आगे भी रहूँगा। पृथ्वी के जीवों की उत्पत्ति और विनष्टि का साक्षी हूँ। 

उपन्यासकार समय के माध्यम से सम्पूर्ण मानवता को संदेश देता है कि, "सम्पूर्ण मानव जाति को सचेत करने आया हूँ। अभी भी अवसर है, अहंकार व उपद्रव को त्यागकर…वह शांतिपूर्ण जीवन यापन के उपायों की खोज करें, अन्यथा सम्पूर्ण मानव जाति का विनाश हो जाएगा। मिथ्या अहंकार की अग्नि में सब भस्म हो जाएगा। इसके अतिरिक्त पृथ्वी की खरबों प्रजाति नष्ट करने का कलंक भी मनुष्य पर ही होगा। "

रचनाकार ने रूस-यूक्रेन की पृष्ठभूमि में समय के माध्यम से लिखा है, "इसी युद्ध भूमि से आधुनिक पात्रों, दृश्यों व घटनाओं में ढलकर एक कथाकार के रूप में सबका मार्गदर्शन करूंगा। मूल रूप से…अस्तित्व का संदेश प्राणियों तक पहुंचाने का प्रयत्न करूंगा। "

उपन्यासकार आदर्श स्थिति की परिकल्पना कर उम्मीद करता है कि, "मेरे संकेत व संदेशों को आत्मसात करने से सम्पूर्ण प्राणियों का कल्याण होगा। समस्त कष्टों का नाश तथा पृथ्वी पर सुख, समृद्धि व शांति का उदय होगा। "

उपन्यास की प्रासंगिकता तथा सार्थकता इसी बात से है कि वह समय के साथ यूक्रेन की राजधानी कीव में घटनाक्रमों के साथ बढ़ता चलता है जहां खूबसूरत शहर कीव स्थित मेडिकल यूनिवर्सिटी और वहां अध्ययनरत भारतीय तथा अन्य देशों के विद्यार्थियों की दिनचर्या और युद्ध के संकट के साथ कथानक आगे बढ़ता है। कथा की मुख्य नायिका मेडिकल की एक छात्रा हिमानी है जो संवेदनशील लड़की है तथा उसी के इर्द-गिर्द सम्पूर्ण उपन्यास का ताना-बाना बुना गया है। 

कथा की नायिका के माध्यम से उपन्यासकार अशांत विश्व की ज्वलंत समस्या पर एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाता है कि, "युद्ध के बजाय इंसान शांति से रहने का तरीका क्यों नहीं खोज लेता? यदि नहीं खोज सकता तो फिर उसकी सारी खोजें बेकार है…उसके विकसित होने का कोई अर्थ नहीं है। "

उपन्यास 'मैं समय हूँ' पढ़कर ऐसा लगता है कि हम स्वयं घटनास्थल पर मौजूद हैं और यही उपन्यासकार की विशेषता है कि वह पात्रों के साथ तादात्म्य स्थापित कर कथानक को जीवंत कर देते हैं। वैसे उपन्यास मानव जीवन की काल्पनिक कथा होती है। ख्यात कथाकार प्रेमचंद के अनुसार "मैं उपन्यास को मानव जीवन का चित्रमात्र समझता हूँ । मानव चरित्र पर प्रकाश डालना और उसके रहस्यों को खोलना ही उपन्यास का मूल तत्व है। "

इस लिहाज से देखें तो चन्दन जी अपने उपन्यास में पूरी तरह से सफल रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध को आधार बनाकर कीव मेडिकल यूनिवर्सिटी में ही घटनाक्रम को विस्तार देकर उपन्यास में वास्तविकता तथा कल्पना का कलात्मक मिश्रण किया गया है। साथ ही जीवन की समग्रता का चित्र इस प्रकार उपस्थित किया गया है कि उसमें अन्तरविष्ट अन्तर्वस्तु तथा पात्रों से हमारा सीधा तादात्म्य स्थापित हो जाता है। 

लेखक ने इस उपन्यास के जरिए अपने कथानक में प्रायोगिक पद्धति का प्रयोग कर प्रकृति की ओर वापसी, प्रेम, सद्भाव, शांति, सामंजस्य और युद्ध विहीन समाज की संकल्पना की है । पात्रानुकूल भाषा चन्दन जी के उपन्यास की महत्वपूर्ण विशेषता है। उपन्यास ऐसी भाषा में लिखा गया है जिससे पाठक को भाव-बोध सुगमता से हो जाता है। 

कथावस्तु भी रोचक एवं प्रभावोत्पादक है। कुल मिलाकर उपन्यास पठनीय होकर प्रभावी हैं तथा मन को छूने का सामर्थ्य रखता है। युद्ध उन्मूलन एवं विश्व शांति की संकल्पनाओं का यह महत्वपूर्ण दस्तावेज है । निश्चित ही शोधार्थियों के साथ पाठक वर्ग को यह प्रयोगात्मक उपन्यास प्रभावित करेगा और इसे पाठकों का बेहतर प्रतिसाद मिलेगा। राजकुमार चन्दन जी को हार्दिक शुभकामनाएँ। 
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समीक्षक का पता: डॉ. प्रदीप उपाध्याय
16, अम्बिका भवन, उपाध्याय नगर, मेंढ़की रोड, देवास, मध्य प्रदेश 455001
चलभाष: 9425030009

लेखक का पता: राजकुमार चन्दन 
एल आई जी 185,जवाहर नगर, देवास, मध्य प्रदेश
चलभाष: 9827328555

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