कविता: क्या खोया, क्या पाया!

शशि पाधा
मन की गठरी बाँध के रखी यादें शहरों गाँव की
मिटटी की सौंधी खुशबू की, बरगद की ठंडी छाँव की

चौपालों पे हँसी ठिठौली, भरी पिटारी खुशियाँ थी
भोले भाले लोगों की वह भोली भाली दुनिया थी

छोटे छोटे घर थे उनके , दिल तो अम्बर जैसा था
गली मोहल्ला अपना ही था, हर कोई अपने जैसा था

दो कमरों के महल हवेली, कितने लोग समाते थे
ड्योढ़ी सांकल बंधी कभी न, बिन पूछे सब आते थे

सटे सटे थे छत चौबारे, गलियों की गलबाहियाँ थी
दोपहरी की गपछप सांझी, सुख दुःख खाते बहियाँ थी

रिश्तों की पड़ताल हुई न, हर कोई बन्धु बांधव थे
मामा काका सगे संबंधी, कहीं न कौरव पांडव थे

किसका आँगन, किसका बच्चा, कोई फ़िक्र न फाका था
जिसके घर थे खीर बताशे, उसके घर में डाका था

गर्मी की छुट्टी जब होती, घर बाहर भर जाता था
एक दरी और चादर तकिया, सब के हिस्से आता था

मेहमान सदा भगवान के जैसे, आदर स्वागत होता था
जाने पर उपहार बाँध कर, फिर आने का न्योता था

कैसी अजब रसोई थी तब, सारा कुनबा खाता था
आस-पड़ोस और बर्तन वाली , सबके हिस्से आता था

अदरक की वो चाय रसीली, सुड़क सुड़क क्या स्वाद रहा
नुक्कड़ के वो चाट समोसे, गप्पों संग संवाद रहा

बीच गली में लगा खोमचा, बच्चे जी भर खाते थे
बटुआ लेकर खड़े जो दादा, सब का मोल चुकाते थे

शादी ब्याह का घर तो एक, गली मोहल्ले सजते थे
ढोलक के संग गीत सुरीले, ढोल नगाड़े बजते थे

तेरा मेरा इसका उसका, भेद भाव की रीत न थी
मिलजुल के सब उत्सव मेले, बैर द्वेष की नीत न थी

अपनों की ही दुनिया थी वो, अपनों का संसार था
सब के दिल हर दिल से मिलते. मिश्री सा व्यवहार था

कहाँ खो गये दिन सोने से,गुम कहाँ चांदी सी रात
अब न वैसे छत चौबारे, अब न वो अपनों का साथ

संबंधों की डोरी के हम. टूटे टूटे धागे हैं
फोन तार से जुड़े हैं केवल, कितने हम अभागे हैं

मन की आँखों में सपनों सी, वही तो दुनिया बसती है
बचपन के आँगन देहरी में, यादों की लौ सी जलती है

इक छोटी सी साध है मेरी, जादू की कोई छड़ी घुमा दे
मंतर कोई ऐसा फूँके, बचपन के वो दिन लौटा दे

3 comments :

  1. कितना सुंदर और सही लिखा है आपने शशि जी 🌸

    -शुभ्रा

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  2. शशि जी, आपकी कविता ने मन में बसी यादों को कुरेद दिया । मैं उन्हीं में खो गयी।

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  3. शकुन्तला बहादुर, कैलिफ़ोर्नियाJuly 4, 2023 at 11:35 PM

    जो कुछ अतीत में खो गया था, आपकी कविता ने उनकी याद दिला कर उसे पुन: दिला दिया।

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