मुंशी प्रेमचंद का जन्मदिन

जमींदार के इस प्रतिष्ठाशून्य उत्तर को सुनकर पण्डितजी कुछ खिन्न हृदय से बोले, "तो फिर मज़बूरी है। मेरे द्वारा इस समय कुछ कष्ट आपको पहुँचा हो तो क्षमा कीजिएगा। किन्तु मैं आपसे कह सकता हूँ कि ईमानदार आदमी आपको इतना सस्ता न मिलेगा।" (प्रेमचंद कृत 'पछतावा' से एक अंश)
अनुराग शर्मा
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अमिट योगदान देने वाले श्रद्धेय लोकमान्य बाल गंगाधर टिळक और चंद्रशेखर आज़ाद के जन्मदिन 23 जुलाई पर हम उनका पुण्य-स्मरण करते हैं।

जुलाई मास में पड़ने वाली महाश्वेता देवी, आनंद प्रकाश जैन, नीलाभ अश्क और मुहम्मद रफ़ी की पुण्यतिथियों पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित हैं।

हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार नामवर सिंह के 28 जुलाई के जन्मदिन के उपलक्ष्य में प्रकाश मनु का संस्मरण इस अंक में प्रस्तुत है।

आज ही भारत के ख्यातनाम साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद का जन्मदिन है। उनकी स्मृति में इस अंक में सत्यवीर सिंह का आलेख कथाशिल्पी मुंशी प्रेमचंद प्रस्तुत है।

कुछ ही दिनों में भारत अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। इस बीच चंद्रयान-3 निरंतर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है। भारत की दो राजनैतिक विचारधाराएँ आजकल इस बात पर टकराती दिखती हैं कि पिछले 70 सालों में सतत विकास हुआ या पिछले दशक में विकास की गति तेज़ रही। हमें यह ध्यान रखना चाहिये कि संसार के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को स्वतंत्र हुए भले ही कम समय बीता हो लेकिन अहिंसा, वैविध्य, वसुधैव कुटुम्बकम, के साथ-साथ ज्ञान की परम्परा भारतीय संस्कृति में बहुत गहरी है। भारत का जो सम्मान आज विश्वभर में हो रहा है वह 10 साल या 70 साल में कमाया नहीं जा सकता। वह शताब्दियों से चल रही प्रक्रिया का फल है। देश की प्रगति पर गर्वित होने के साथ-साथ पहले मणिपुर और अब हरयाणा के दंगे राष्ट्र को कलंकित करते हैं। अपराधों को रोकने में सक्षम प्रशासन किसी भी देश की ज़रूरत है। दुर्भाग्य से भारत इस मामले में लगातार विफल रहा है। विभाजन की विभीषिका से लेकर अब तक संगठित अपराधी तत्वों ने भारत की विविधता को एक-दूसरे के विरुद्ध वैमनस्य उत्पन्न करने के लिये चारे की तरह इस्तेमाल किया है। इस विषय में गम्भीर प्रयासों की आवश्यकता है। प्रशासन बेहतर हो, तैयार रहे, और हम सब भी अपने नागरिक दायित्वों का निर्वाह करते हुए अपनी व्यक्तिगत कुंठाओं और द्वेष आदि जैसी भावनाओं का दमन करके वैविध्य का सम्मान करते रहें।  

हमेशा की तरह इस अंक पर भी आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है।

शुभाकांक्षी,
सेतु, पिट्सबर्ग
31 जुलाई 2023 ✍️

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