प्रकाश मनु जी का बाल उपन्यास ‘सांता क्लॉज का पिटारा'

बाल उपन्यास पर एक बाल-पाठक के उद्गार

रवीना, कक्षा -11
यह पुस्तक ‘सांता क्लॉज का पिटारा' प्रकाश मनु द्वारा रचित है। यह एक बाल उपन्यास है। इसे पढ़कर मुझे बहुत अच्छा लगा। इसमें बहुत ही सरल शब्दों और सरल भाषा-शैली का प्रयोग किया गया है। यह उपन्यास पढ़कर बहुत आनंद आया। इस उपन्यास में हमारी मुलाकात अपने सबसे प्यारे दोस्त सांता से होती है, जो हर साल क्रिसमस पर लाखों नन्हें नटखट बच्चों को चुपके से अनेक सुंदर, रंग-बिरंगे उपहार दे जाता है। और तब उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता है। वही सांता यहाँ मौजूद है। उपन्यास की शुरुआत से लेकर अंत तक और उसके मन में जितनी सारी बातें हैं, योजनाएँ हैं, कितने सारे सपने हैं। वे सब इस उपन्यास में खुलकर सामने आते हैं। ऐसे अनोखे किस्से तो हमने पहली बार सुने हैं। हमें इस उपन्यास को पढ़कर पता चला जिस सांता को हम प्यार करते हैं, वही सांता देश दुनिया के सारे नन्हें- मुन्ने बच्चों पर अपना प्यार लुटाता है। साथ में यह पता चलता है कि सांता का दिल बहुत बड़ा है और उसमें सुख-दुख की कितनी अनोखी कहानियाँ छिपी हैं, जिन्हें पढ़कर हमारे चेहरे पर कभी हँसी खिल उठती है, तो कभी मन थोड़ा उदास हो जाता है। मुझे इसी उपन्यास को पढ़कर पता चला कि अगर किसी बच्चे की कोई अधूरी चाहत है, जिसे उसके मम्मी-पापा या घर के दूसरे लोग किसी कारण पूरा नहीं कर पा रहे हों तो उसे भी सांता क्लॉज अपने अनूठे और जरूरत वाले उपहारों से पूरा करता है।

सांता हर साल बच्चों को ढेर सारी खुशियाँ देने के लिए आता है। ऐसा करने से उसे खुशी मिलती है। वैसे इस उपन्यास में अनेक पात्र हैं, जैसे हैरी, नीलू और जॉन आदि।

 हैरी के माता-पिता उसके लिए खिलौने नहीं ला सकते थे, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इस उपन्यास में अनेक और भी ऐसे पात्र हैं, जिनके घर की स्थिति अच्छी नहीं है। उन बच्चों की इच्छा सांता क्लॉज पूरी करता है। इस उपन्यास में सांता क्लॉज उदास हो जाता है क्योंकि जॉन नाम का एक पात्र है, जिसके पिता की नौकरी छूट जाती है और घर की स्थिति खराब हो जाती है। जॉन के पिता को उसके स्कूल की फीस जमा करवानी है, लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे, तो सांता क्लॉज ने जॉन की फीस के लिए पैसे और चॉकलेट उपहार में देकर खुशी प्रदान की।

 क्रिसमस वाले दिन सुबह से ही सांता की खूब व्यस्तता थी। दिन भर बच्चों के लिए उपहार इकट्ठे करके वह अपने बड़े से पिटारे में भरता रहा। पिटारा इतना भर गया कि उसे बंद करना ही मुश्किल हो गया। सांता क्लॉज ने बड़े जतन से उसे बंद किया और चल पड़ा, क्योंकि थोड़ी देर में ही शाम घिरने लगी थी। सांता ने बग्घी में उपहारों वाला पिटारा रखा, फिर उसकी बग्घी झटपट सड़क पर दौड़ने के लिए उतर आई। सांता क्लॉज सभी बच्चों को सुंदर-सुंदर उपहार देता है। सभी बच्चे क्रिसमस वाले दिन का इंतजार करते हैं। सभी बच्चे किसमिस से एक दिन पहले रात को अपने प्रिय दोस्त सांता से अपनी मनपसंद चीजें माँगते हैं। और सांता क्लॉज उनकी मनपसंद चीजों से उनकी इच्छाओं को पूरा करता है।

 जब सांता क्लॉज का पिटारा खाली हो जाता है, तो सांता क्लॉज बहुत खुश होता है क्योंकि सभी बच्चे उन उपहारों को पाकर बहुत खुश थे। बच्चे खुश, तो सांता क्लॉज खुश। मुझे इस पुस्तक के सभी चित्र बहुत सुंदर लगे। ये चित्र बहुत ही आकर्षित करते हैं। मुझे इस उपन्यास में सबसे अच्छा यह गीत लगा -

“गाये जा, मन तू गाये जा,
 मीठी-सी एक तान उठ जा,
 सोया है जल शांत नदी का,
 सोई-सोई आज हवाएँ
 सोए-सोए पेड़ ओढ़कर,
 मधुर चांदनी की है चादर।

 थर-थर, थर-थर मन के भीतर,
 थर-थर, थर-थर देखो बाहर,
 सोया-सोया आसमान है,
 तू उसमें भी भर जा हलचल।
 भार जा हलचल,
भर-भर हलचल,
 चल-चल सांता, चल तू चल-चल!
चल रे मन तू,
 चल-चल, चल-चल!
 चल रे मन तू,
चल-चल, चल-चल!

  प्रकाश मनु जी इस बात से बहुत दुखी हैं कि कुछ बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, उन्हें मजदूरी करनी पड़ती है क्योंकि कुछ बच्चों के माता-पिता नहीं होते। तथा कुछ बच्चों की घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती। लेकिन मनु जी और उन जैसे अनेक लेखकों ने अपनी कहानियों द्वारा यह कोशिश की है कि हमारे समाज में कोई भी बच्चा अनपढ़ ना रहे। प्रकाश मनु जी स्वयं सांता क्लॉज बनाकर दूसरे गरीब बच्चों की सहायता करते हैं। जिस तरह मनु जी ने सांता क्लॉज बनाकर दूसरे बच्चों की सहायता की, वैसे ही हमें भी गरीब बच्चों की सहायता करनी चाहिए। जब से मैंने यह उपन्यास पढ़ा है, तभी से मेरे मनपसंद साहित्यकार प्रकाश मनु जी बन गए हैं। मैं अपने प्रिय साहित्यकार के अगले उपन्यास को पढ़ने के लिए भी उत्साहित हूँ।
धन्यवाद।
***

रवीना
कक्षा -11वीं A, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय
टयोंठा, पुण्डरी (कैथल) हरियाणा।

प्रेषक: डॉ. अशोक बैरागी, हिंदी प्राध्यापक
चलभाष: 9466549494 
 

1 comment :

  1. परम आदरणीय सम्पादक महोदय, आपने इस इस बाल पाठक, रवीना की अनगढ़ और भोली टिप्पणी को प्रकाशित करके बाल भावनाओं और सृजन का सम्मान किया है। मैं हृदय से आपका आभारी हूँ। इससे पत्रिका के बाल पाठक बढ़ेंगे। बच्चों साहित्य पढ़ने की रुचि जागृत होगी और सृजन का संस्कार गहरा होगा। उन्हें लिखने पढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। पुन:धन्यवाद।।

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