मैं जिसको लिखता गाता हूँ

अनुज चतुर्वेदी 'अनुभव'

अनुज चतुर्वेदी 'अनुभव'


मैं जिसको लिखता गाता हूँ।
परिचित तुमसे करवाता हूँ।
मैं जिसके पीछे पागल हूँ।
जिसके कारण मैं शायर हूँ।
वो अद्भुत बात सुनाता हूँ।

वो परियों की रानी सी है।
मुझ प्यासे को पानी सी है।
मै गीत उसी के गाता हूँ। 

इतना कोमल मन है उसका।
गंगाजल जीवन है उसका।
मैं उससे जीवन पाता हूँ।

वो हँसती है दिल हँसता है।
उसमें अपनापन बसता है।
मैं उसको यूँ अपनाता हूँ ।

वो फूलों की क्यारी सी है।
क्या बोलूँ मैं प्यारी सी है।
बस इतना ही कह पाता हूँ।
मैं जिसको लिखता गाता हूँ। 
परिचित तुमसे करवाता हूँ॥
***

संपादक: तुलसी साहित्यधारा
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1 comment :

  1. प्रिय अनुज चतुर्वेदी'अनुभव' को बहुत बहुत बधाई ।

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