सम्पादकीय दिसम्बर 2016

साल की सबसे बड़ी रात संजोए दिसम्बर मास, बड़े दिन यानि क्रिसमस के उल्लास के साथ नववर्ष की उमंगें भी जगाता है। दिसम्बर से जुड़ी अनेक अच्छी बातों के बीच एक दुखद याद दिसम्बर 1927 को ब्रिटिश शासकों द्वारा काकोरी काण्ड में फांसी चढ़ाये गए स्वतंत्रता सेनानियों की भी है। ठाकुर रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी, पंडित रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्लाह खान 17 व 19 दिसंबर सन् 1927 को हंसते-हंसते इस आशा में फांसी चढ़ गए थे कि एक दिन हम लोगों को स्वतंत्रता की हवा में सांस लेने का अवसर मिलेगा। हिंदी के अग्रिम पंक्ति के ब्लॉगरों में एक स्वर्गीय डॉ. अमर कुमार की प्रेरणा से सेतु में हम इसी काकोरी काण्ड के नायक बिस्मिल की आत्मकथा को धारावाहिक रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। आशा है, यह धारावाहिक प्रस्तुति हमें अपने अतीत से परिचित कराने में सहायक सिद्ध होगी।

धरोहर में इस बार प्रस्तुत है सोहनलाल द्विवेदी की वह प्रेरक कविता जो अंतर्जाल पर लम्बे समय तक हरिवंश राय बच्चन के नाम से घूमती रही थी। यहाँ तक कि अमिताभ बच्चन ने भी इसे मंच पर "बाबूजी की कविता" कहकर पढ़ा था। यह घटना हिंदी साहित्य से हमारे अपरिचय को तो रेखांकित करती ही है, साथ ही ध्यान दिलाती है कि कट-पेस्ट-फ़ॉरवर्ड के युग में आज हमारे जीवन में प्रामाणिकता का महत्व किस प्रकार धीरे-धीरे कम हुआ है। मेरा अनुरोध यही है कि आप जागृत रहें और अपने आसपास भी जागृति बनाए रखने में सहायक सिद्ध हों। सेतु परिवार का प्रयास सदा प्रामाणिक बने रहने का ही है।

प्राख्यात हिंदी लेखिका नासिरा शर्मा के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के उपन्यास परिजात के लिये साहित्य अकादेमी सम्मान इस महीने की उल्लेखनीय साहित्यिक गतिविधि रही। परिजात के द्वारा कर्बला के ऐतिहासिक युद्ध में पंजाब के मोहियाल/दत्त ब्राह्मणों की वीरता की कहानी पंजाब की दंतकथाओं से बाहर आकर साहित्यिक पटल पर तो आई ही, इस बार का सम्मान अन्य कारणों से भी उल्लेखनीय रहा है।

इस वर्षांत में हमने प्रसिद्ध लघुकथाकार सतीश दुबे को खोया है। उन की लघुकथा श्रद्धांजलि उन्हीं के लिये एक श्रद्धांजलि के रूप में इस अंक में शामिल की गई है। सेतु परिवार उनकी और इस वर्ष हमें छोड़कर गये सभी साहित्यकारोंकी दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करता है।

अच्छी हिंदी लिखना वक़्त की ज़रूरत है, खासकर साहित्य से सम्बंध रखने वाले व्यक्तियों के लिये। इस विषय में उत्सुक पाठकों व लेखकों की सहायता के लिये इस अंक में "कृपया सही लिखें" शीर्षक से एक आलेख प्रस्तुत है, जिसे पढ़कर अच्छी हिंदी लिखना बहुत सरल हो जायेगा। कृपया इस आलेख का भरपूर लाभ उठाएँ और अपने उत्सुक मित्रों व परिजनों को भी पढ़ाएँ।

अंत में, आप सभी को नववर्ष की मंगलकामनाओं के साथ नमस्कार!

सादर,
अनुराग शर्मा
पिट्सबर्ग, अमेरिका