शैलेश भारतवासी


हिंदयुग्म की स्थापना के साथ शैलेश भारतवासी ने वर्तमान हिंदी को आधुनिक तकनीक के प्रवाह में बांधा था। हिंदयुग्म ने हज़ारों भारतीयों को यूनिकोड का प्रयोग करके कम्प्यूटर व मोबाइल उपकरणों पर सरल हिंदी लिखना सिखाया। हर मास एक यूनिकवि सम्मान देकर संसारभर के उभरते कवियों को एक पहचान दी। हिंदी तकनीक के विशेषज्ञों, साहित्यकारों और वॉलंटीयर्स की सहायता से सुप्तप्राय हो रही हिंदी को हिला दिया।

हिंदयुग्म के परचम तले कहानीकलश ने गल्प को, आवाज़ ने दृश्य-श्रव्य को और हिंद युग्म ने साहित्य-शिल्प को बढावा और वैश्विक पहचान दिलाई। अमेरिका में बैठकर अनुराग शर्मा ने बोलती कहानियाँ और मृदुल कीर्ति ने वैश्विक इंटरनैट कवि सम्मेलन सम्भव किये। हिंदयुग्म ने सबसे पहले प्रेमचंद की कहानियाँ और महादेवी, दिनकर, निराला, पंत, आदि जैसे महाकवियों की रचनाओं को वैश्विक प्रतियोगिताएँ कराकर संगीतबद्ध किया। वर्धा विश्वविद्यालय के वैबस्थल हिंदीसमय का बीज हिंदयुग्म द्वारा प्रकाशित  अनुराग शर्मा  के स्वरपाठ में बनी प्रेमचंद की पहली ऑडियोबुक सीडी के विमोचन पर ही पड़ा था। हिंदयुग्म पर पंकज सुबीर की ग़ज़ल कक्षा ने कितने ही शायर बना डाले। और अब हिंदयुग्म ने प्रकाशन में प्रवेश करके नई हलचल मचाई है। यह सब सम्भव हुआ एक युवा तकनीकविज्ञ की इच्छाशक्ति से, जिसका नाम है शैलेश भारतवासी।

हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में शैलेश भारतवासी के योगदान के लिये उन्हें 17 मई 2017 को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में प्रथम सेतु हिंदी प्रसारक सम्मान से नवाज़ा गया है।