सेतु साहित्य सम्मान समारोह

सेतु सम्पादन मण्डल ने जनवरी 2017 अंक में प्रथम सेतु सम्मान  की घोषणा की थी। जिसमें हिंदी साहित्य में प्रत्यक्ष और परोक्ष योगदान के लिये विशिष्ट कार्य करने वाले दो व्यक्तियों को चुना गया था। सेतु के लिये यह गर्व का विषय है कि दोनों ही व्यक्तियों ने स्वीकृति देकर, और हमें यह अवसर प्रदान करके हमें ही गौरवान्वित किया है।

प्रथम सेतु सम्मान समारोह का आयोजन रुझान प्रकाशन के सहयोग से उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, हज़रतगंज, लखनऊ में बुधवार, दिनाँक 17 मई, 2017 को सायंकाल 4 बजे से 8 बजे तक आयोजित समारोह में किया जा रहा है, जिसमें सभी साहित्य-सुधी हिंदीप्रेमियों का हार्दिक स्वागत है।

कार्यक्रम निम्न दो सत्रों में विभाजित है:

सत्र 1: 

  • अध्यक्ष - शैलेंद्र सागर तथा मुख्य अतिथि: यतींद्र मिश्र
  • सेतु हिंदी साहित्य सम्मान - मैत्रेयी पुष्पा, समग्र साहित्यकार
  • सेतु हिंदी प्रसारक सम्मान - शैलेश भारतवासी, हिंदयुग्म प्रकाशन
  • गुरु-शिष्य परम्परा, तथा अन्य पुस्तकों का विमोचन, रुझान प्रकाशन

सत्र 2:

  • अध्यक्ष - मैत्रेयी पुष्पा, मुख्य अतिथि: महेंद्र भीष्म, तथा विशिष्ट अतिथि: विवेक मिश्र
  • खिड़कियों से परे - दीपक मशाल के लघुकथा संग्रह पर चर्चा एवं लघुकथा विमर्श  

मैत्रेयी पुष्पा 
हिन्दी साहित्य में उत्कृष्ट लेखन और विश्व भर में हिन्दी साहित्य व भाषा के प्रचार-प्रसार के चल रहे प्रयासों पर सेतु द्विभाषी साहित्यिक ई-पत्रिका लगातार नज़र रखे हुए है। इन्हीं दोनों बिंदुओं को ध्यान में रखकर सेतु द्वारा हिन्दी साहित्य में अविस्मरणीय योगदान के लिए प्रथम सेतु साहित्य सम्मान सुप्रसिद्ध लेखिका मैत्रेयी पुष्पा जी को।

हिन्दी अकादमी, दिल्ली की उपाध्यक्ष मैत्रेयी पुष्पा से हिंदी पाठक भली-भांति परिचित हैं। वे वर्तमान हिंदी के शिरोमणि साहित्यकारों में से एक हैं। दिल्ली निवासी मैत्रेयी जी के लेखन में पाठक ब्रज और बुंदेली संस्कृतियों से परिचित हो सका है। दस उपन्यास, आठ कथा संग्रह सहित दो दर्जन से अधिक पुस्तकों की लेखिका मैत्रेयी जी ने अपनी लेखनी में ग्रामीण भारत को साकार किया है, उन्होंने भारतीय नारी के उस पक्ष को प्रस्तुत किया है जिसका चित्रण हिंदी साहित्य में सामान्य नहीं था। उनका कथन '1947 में भारत स्वतंत्र हुआ परंतु भारतीय नारी अभी भी स्वतंत्रता की प्रतीक्षा में है' उनके साहित्य के एक मुखर पक्ष की झलक दिखाता है। लेखक अपनी बात कहता है, परंतु पाठक अपनी ही बात समझते हैं। अच्छे लेखक अपनी अभिव्यक्ति को पाठक तक यथावत पहुँचाने में माहिर होते हैं। यथार्थ का बेबाकी से चित्रण करने वाली मैत्रेयी जी के लेखन की परिपक्वता उनके गहन अनुभव और गम्भीर अवलोकन का परिणाम है।
शैलेश भारतवासी 
हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए प्रथम सेतु हिन्दी प्रसारक सम्मान हिन्दी के लिए नई राह तैयार करने वाले शैलेश भारतवासी जी को प्रदान किया जा रहा है ।

हिंदयुग्म की स्थापना के साथ शैलेश भारतवासी ने वर्तमान हिंदी को आधुनिक तकनीक के प्रवाह में बांधा था। हिंदयुग्म ने हज़ारों भारतीयों को यूनिकोड का प्रयोग करके कम्प्यूटर व मोबाइल उपकरणों पर सरल हिंदी लिखना सिखाया। हर मास एक यूनिकोड कवि सम्मान देकर संसारभर के उभरते कवियों को एक पहचान दी। हिंदी तकनीक के विशेषज्ञों, साहित्यकारों और वॉलंटीयर्स की सहायता से सुप्तप्राय हो रही हिंदी को हिला दिया। बाल उद्यान ने बाल साहित्य को, कहानीकलश ने गल्प को, आवाज़ ने दृश्य-श्रव्य को और हिंद युग्म ने साहित्य-शिल्प को बढावा और वैश्विक पहचान दिलाई। आवाज़ और हिंदयुग्म ने वैश्विक इंटरनैट कवि सम्मेलन सम्भव किये। हिंदयुग्म ने सबसे पहले प्रेमचंद की कहानियाँ और महादेवी, दिनकर, निराला, पंत, आदि जैसे महाकवियों की रचनाओं को वैश्विक प्रतियोगिताएँ कराकर संगीतबद्ध किया। वर्धा विश्वविद्यालय के वैबस्थल हिंदीसमय का बीज प्रेमचंद की प्रथम ऑडियोबुक सीडी के विमोचन पर ही पड़ा था।

निश्चित रूप से आप दोनों का इसे स्वीकार करना सेतु का ही सम्मान है।