विद्युत चलित मोटरवाहनों के विकास के संबंध में – निकोला टेसला

-मेहेर वान 


निकोला टेसला 
(यह पत्र मेनूफ़ेक्चरर्स रिकॉर्ड के विशेष संवाददाता अल्बर्ट फ़ेनिया ने प्रसिद्ध वैज्ञानिक निकोला टेसला से बातचीत के बाद तैयार किया था, जो कि निकोला टेसला की तरफ़ से पत्रिका को लिखा गया था। इस पत्र में निकोला टेसला विद्युत से चलने वाले मोटर वाहनों के बारे में कल्पना करते हुये इन्हें बेहद संभावनाशील कह रहे हैं। सन 1904 के समय में यह एक सपने जैसी बात थी।)


मेनूफ़ेक्चरर्स रिकॉर्ड
दिसम्बर 29, 1904, पेज- 583
इलैक्ट्रिक ऑटोज़,
मोटर वाहन ऊर्जा (Motive Power) में निहित भविष्य के विषय में निकोला टेसला के विचार
(विशेष संवाददाता, मेनूफ़ेक्चरर्स रिकॉर्ड)

न्यू य़ोर्क, दिसम्बर 27,

मेनूफ़ेक्चरर्स रिकॉर्ड और कुछ अन्य पत्रिकाओं द्वारा प्रकाशित किये गये धरती और जल में यातायात के लिये इस्तेमाल किये जाने वाले आन्तरिक-प्रदाह इंजन के ज़रिये, नये तरह के ऊर्जा उत्पादकों के विकास से सम्बधित लेखों में पाठकों की अत्याधिक रुचि को देखते हुये, मनहाटन ट्रांजिट कंपनी के याँत्रिक इंजीनियर श्री चार्ल्स ए. लीब द्वारा बनाये गये नयी तरह की मोटर-बस के नमूने को मद्देनजर रखते हुये, श्री निकोला टेसला का बयान भेज रहा हूँ, जो उनसे काफ़ी बातचीत के पश्चात तैयार किया गया है. बेशक, आशा है यह पाठकों द्वारा अत्याधिक रुचि के साथ पढ़ा जायेगा. 

न्यू यॉर्क, 17 दिसम्बर,1904

श्री अल्बर्ट फेनिया, 
विशेष संवाददाता, मेनूफेक्चरर्स रिकॉर्ड

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प्रिय श्रीमान,

मोटर-वाहनों के प्रचालन में विद्युत का अनुप्रयोग निश्चित ही अत्यंत तर्कसंगत विचार है, जिसके बारे में कल आपने मुझसे पूछताछ की थी। मुझे खुशी है कि श्री लीब ने इसे साकार करने की दिशा में कार्य करना शुरु किया है। जनरल इलेक्ट्रिक कं. के साथ उनका लम्बा अनुभव और अन्य बातें इस कार्य के लिये उत्कृष्ट रूप से उपयुक्त हैं।

इसमें कोई शक़ नहीं है कि इस प्रकार से अत्यंत सफल-मशीनों का उत्पादन किया जा सकता है। यह क्षेत्र अक्षय है और ये नये तरह के मोटर वाहन जिनमें मुख्य चालक मशीन और पहियों के बीच विद्युत का इस्तेमाल शुरु करने का मेरे विचार से में उज्ज्वल भविष्य है।

मैं ख़ुद इस सिद्धान्त की कई वर्षों से वकालत करता चला आ रहा हूँ। इस प्रभाव के बारे में आपको मेरे तमाम तकनीकी बयान मिल जायेंगे जो कि प्रकाशित हो चुके हैं। सेन्चुरी पत्रिका के जून 1990  के अंक में मैंने इस विषय पर बात करते हुये कहा है: स्टीमर और रेलगाड़ियाँ अब भी भाप ऊर्जा द्वारा शाफ़्ट और अक्सेल्स के घूमने से चल रहे हैं। ईंधन से उत्पादित ऊष्मीय ऊर्जा का बहुत अधिक प्रतिशत वाहन ऊर्जा में बदला जा सकता है यदि मरीन इंजनों और वाहनों के विशेष रूप से निर्मित उच्च-दाब वाली भाप अथवा गैस वाले इंजनों के डायनमो को विद्युत से चलने वाले यंत्रों से प्रतिस्थापित कर दिया जाये। इस तरह से ईंधन से ऊर्जा प्राप्त करने में कम से कम 50 से 100 प्रतिशत लाभ होना चाहिये। यह समझ पाना मुश्किल है कि इतने साधारण और सपाट विचार इंजीनियर्स का ध्यान क्यों नहीं खींच पा रहा है।

पहली नज़र में, यह प्रतीत होता है कि किसी इंजन से विद्युत उत्पन्न करना और फिर उससे उत्पन्न विद्युत-धारा को अन्य पहिये को चलाने में किसी इंजन की सहायता से याँत्रिक रूप से इस्तेमाल करना, बहुत कठिन और कदापि ग़ैर-ज़रूरी प्रक्रिया लग सकती है। लेकिन ऐसा नहीं है; इसके विपिरीत विद्युत के इस प्रकार के इस्तेमाल के कई अन्य व्यावहारिक लाभ होंगे। यह समय का सवाल है कि इस विचार को रेलवे और सामुद्रिक परिवहन में भी विस्तार से प्रयोग होने में कितना समय लग पाता है, यद्यपि दूसरे प्रयोग कि हिसाब से परिस्थितियाँ कुछ आसान नहीं हैं। रेल और सड़क वाहन बनाने वाली कम्पनियाँ साधारण वाष्प इंजन के इस्तेमाल करके कैसे अपना बचाये हुये हैं यह मेरे लिये रहस्यमय है। विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने वाले इंजन और उस विद्युत से इलैक्ट्रिक मोटर्स चलाकर रेलगाड़ियों को बहुत अधिक तेज़ गति साथ और कम खर्चे में चलाया जा सकता है। फ़्राँस में यह श्री हेलमेन पहले ही कर चुके हैं, हालाँकि उनकी मशीनरी सबसे उकृष्ट नहीं है परन्तु जो भी उन्होंने हासिल किया है वह विश्वस्यनीय और हौसला बढ़ाने वाला है। मैंने गणना की है कि कई कारणों से ज़रूरी कुछ खास सुधारों के बाद  सामुद्रिक वाहनों की गति भी बढ़ाई जा सकती है और उनका परिचालन खर्च कम किया जा सकता है। ऐसा बहुत संभव है कि आने वाले समय में तेल (डीजल/पेट्रोल) ईंधन के रूप में स्थापित हो जायेगा और यह बहुत ही प्रशंसनीय ढ़ंग से प्रचालन का एक नया तरीका बनायेगा। विद्युत उत्पादन कम्पनियाँ जनरेटर्स और मोटर्स की आवश्यक्ताओं की पूर्ति करने में शायद ही सक्षम होंगी।

यातायात या मोटर-वाहन के क्षेत्र में शायद ही इस दिशा में कोई काम हुआ है, और ऐसा अब भी प्रतीत होता है कि अब भी इस सिद्धान्त के अनुप्रयोग की दिशा में असीम संभावनायें हैं। हालाँकि यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि इस (सिद्धान्त को) किन तरह की मोटर्स में इस्तेमाल किया जाये- दिष्ट धारा (DC) अथवा मेरी प्रेरण धारा से बनी मोटर्स में। प्रेरण विद्युत धारा कुछ मामलों में काफ़ी बेहतर है लेकिन कम्यूटर (एक तरह का यंत्र) और ब्रश इत्यादि मोटरवाहन में लगाना आपत्तिजनक है। यह देखते हुये मैं प्रेरण धारा आधारित मोटर को वाहनों में लगाने की वकालत करता हूँ जो कि शायद ही कभी खराब हो। इसकी शर्तें बहतरीन है, विद्युत धारा की आवृत्ति काफ़ी कम होनी चाहिये और तीन से ज़्यादा फ़ेज़ इस्तेमाल किये जाने चाहिये। इनका क्रियान्वयन थोड़ा मुश्किल होगा, लेकिन जैसे ही एक बार इस योजना के तहत एक मोटर वाहन तैयार हो जायेगा, इसके विभिन्न लाभों की लोग प्रशंसा करेंगे।    

भवदीय
निकोला टेसला 

(http://www.nuenergy.org/teslas-letter-about-the-electric-car/tesla_car2/)

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