बहुवचन सम्बोधन में अनुस्वार - हिंदी दिवस विशेष

** हिंदी जैसी आधुनिक और समर्थ भाषा को निरर्थक आग्रहों की भेड़चाल से बचना होगा **

- अनुराग शर्मा

हिंदी में सम्वाद करते समय यदि आप किसी से कपाट बंद करने का अनुरोध करें तो द्वार की ओर संकेत करके स्पष्ट कह सकते हैं, "भेड़ो।" हिंदुस्तानी बोली के एक स्वरूप के पैरोकार इस अनुरोध को भेड़ (पशु) के समूह के लिये सम्बोधन मानने का आग्रह करते हैं। उनके इस आग्रह का स्रोत पुरानी उर्दू/हिंदुस्तानी के एक क्षेत्रीय स्वरूप पर आधारित है जिसमें बहुवचन को सम्बोधित करते समय उसके अनुस्वार बिंदु को हटा लेने की बात कही गई है। फ़ारसी लिपि पर आधारित नस्तालिक़/उर्दू में लिखते समय ऐसा करने पर एक अक्षर नून गुन्ना (ں) की बचत हो जाती थी और उस लिपि में सम्बोधनकारक चिह्न (!) के अभाव में सम्बोधन को चिह्नित करना भी सरल हो जाता था।

अच्छी बात यह है कि अनुस्वार हटाने के इस आग्रह से हिंदी मातृभाषा के बड़े क्षेत्र का परिचय नहीं है। मेरे जैसे लाखों मूल हिंदीभाषी बहुवचन में नियमानुसार अनुस्वार लगाते रहे हैं। "ऐ मेरे वतन के लोगों" जैसा प्रसिद्ध देशभक्ति गीत हो या फिर "मेरे पास आओ, मेरे दोस्तों! एक क़िस्सा सुनो" जैसा फ़िल्मी गीत, अनुस्वार अपने सही स्थान पर उपस्थित है।

हिंदी/हिंदुस्तानी व्याकरण की 'कुछ' पुस्तकों में इस आग्रह का वर्णन है। यहाँ कुछ का अर्थ गिनी-चुनी से ही है, जबकि अधिकांश पुस्तकों में ऐसे किसी आग्रह का संदर्भ भी नहीं है। कुल मिलाकर व्यवहार, शिक्षण, या परम्परा में बहुमत यही है कि बहुवचन सम्बोधन में अनुस्वार लगता है, लगना भी चाहिये। तो भी, चूंकि कहीं तो इसका ज़िक्र है, यह बहस कई बार सामने आ ही जाती है, खासकर उनके द्वारा जिन्हें किसी व्यक्ति, आलेख, या पुस्तक द्वारा इसके बारे में बताया या टोका जा चुका है।।  इसलिये इसका प्रत्युत्तर सामने रखना भी मुझे तार्किक लगता है।

पुरानी उर्दू/हिंदुस्तानी के अतिरिक्त किसी अन्य भारतीय या विदेशी भाषा में बहुवचन को सम्बोधित करते समय ऐसे किसी रूपांतरण या विकृति का आग्रह किया गया हो, ऐसा मेरे संज्ञान में नहीं है। संसार की अग्रणी भाषा अंग्रेज़ी में भी नहीं है। उदाहरण के लिये अंग्रेज़ी में लेडी (lady) का बहुवचन लेडीज़ (ladies) और बॉय (boy) का बहुवचन बॉयज़ (boys) है जो कि सम्बोधन में भी समान ही रहता है। गुजराती में दोनों ही रूपों में अनुस्वार नहीं होता। हिंदी व्याकरण के अधिकांश विश्वसनीय स्रोतों में ऐसे किसी नियम का उल्लेख तक नहीं है। देवनागरी जैसी विकसित लिपि में लिखी जाने वाली आधुनिक हिंदी को ऐसे अनुत्पादक नियम की आवश्यकता भी नहीं है।

सम्बोधन करते समय बहुवचन से अनुस्वार हटाकर एक नया शब्द बनाने का आग्रह भाषा, सम्बोधन, या अभिव्यक्ति में किसी प्रकार की गुणवृद्धि नहीं करता, इस नाते यह निरर्थक है। केवल निरर्थक होता, तो भी अधिक हानि नहीं थी, लेकिन अक्सर किसी शब्द से अनुस्वार हटाने पर एक अलग ही शब्द बन जाता है जिसका अर्थ और संदर्भ दोनों ही भिन्न हैं, जो अर्थ को अस्पष्ट, बल्कि कई बार मंतव्य के प्रतिकूल करने की क्षमता रखता है।
जो सोती भीड़ बाइस-ए-ग़ौग़ा जगाए फिर
दरवाज़ा घर का उस सग-ए-दुनिया पे भेड़ तू
- शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

एक सरल उदाहरण के लिये 'भेड़' शब्द को लेते हैं। संज्ञा शब्द 'भेड़' एक पशु का प्रतीक है, जबकि क्रिया शब्द 'भेड़' का अर्थ मिलाना, या बंद करना होता है। जैसे कपाट भेड़ देना, यानी दरवाज़ा बंद करना। ऐसे में जहाँ भेड़ों शब्द भेड़ संज्ञा के बहुवचन रूप में प्रयुक्त होती है, वहीं भेड़ो, भेड़ने की क्रिया का आदेशात्मक रूप है। यदि आप किसी द्वार से निकलते रेवड़ को हर बार द्वार बंद न करने की हिदायत देना चाहते हैं तो अनुस्वार सहित सम्बोधन "भेड़ों, दरवाज़ा मत भेड़ो" में आपका आशय स्पष्ट है, लेकिन यदि आपने अनुस्वार हटाया तो वाक्य अस्पष्ट और विपरीतार्थी हो जाता है। भेड़ों में से अनुस्वार हटाते ही भेड़ ग़ायब हो जाती है और नया वाक्य, "भेड़ो, दरवाज़ा मत भेड़ो" निरर्थक हो जाता है, क्योंकि उसमें द्वार भेड़ो, और मत भेड़ो, ये दोनों ही अनुरोध/आदेश एक साथ उपस्थित हैं। भेड़ों के सरल उदाहरण से स्पष्ट है कि भेड़ों (एक पशु) और भेड़ो (कपाट बंद करना) दो पूर्णतः असम्बंधित अलग-अलग शब्द हैं, और इन्हें एक दूसरे से प्रतिस्थापित करना ग़लत है।
“जाओ, उन से कहो, साहब मिलने आए हैं।” जमील के लहजे में बेतकल्लुफ़ी थी। लड़का दरवाज़ा भेड़ कर अन्दर चला गया। (मंटो की कहानी 'शादी' से एक अंश)
ऐ मेरे वतन के लोगों
हिंदी जिनकी मातृभाषा नहीं है, या जिनका हिंदी शब्दज्ञान सीमित है उन्हें भेड़ने की क्रिया के बारे में जानकारी न हो, यह सम्भव है। लेकिन जैसी कि अङ्ग्रेज़ी कहावत है, इग्नोरैंस इज़ नो एक्सक्यूज़, यहाँ भेड़ों के स्थान पर भेड़ो का प्रयोग अनर्थकारी है। इसी प्रकार देवों (देवता का बहुवचन) की जगह देवो (देने की क्रिया) का प्रयोग भी भ्रामक ही होगा। प्रसिद्ध देशभक्ति गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों' में लोगों को सम्बोधित करते समय यदि 'लोगों' शब्द से अनुस्वार हटा दिया जाये तो कविवर पंडित प्रदीप देशवासियों के बजाय 'वतन के लोगो' यानी राष्ट्रीय प्रतीक अशोक की लाट को सम्बोधित करते दृष्टिगोचर होंगे, जोकि उनका मंतव्य नहीं है। प्रसन्नता की बात यह है कि उनके स्मृति संस्थान में तथा उनके सम्मान में जारी डाक टिकट में इस गीत के बोलों में अनुस्वार सही स्थान पर सुसज्जित है।

किसी भी भाषा-संस्कृति समूह की तरह भारतीय भाषाओं का ताना-बाना भारतीय संस्कृति से गर्भनाल से जुड़ा हुआ है। भारतीय संस्कृति में नदी, पर्वत, पाषाण, सागर, ग्रह, सूर्य, चंद्र, तारे, वृक्ष, वन, आदि समस्त भूतों, बल्कि भावों का भी मानवीकरण करने की प्रवृत्ति है। अर्थात हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं के सम्बोधन का क्षेत्र अभारतीय भाषाओं की तुलना में कई गुणा विस्तृत है इसलिये बहुवचन में से अनुस्वार हटाने पर बने नये शब्द का अर्थ मूल आशय से भिन्न होने की आशंका हमारे सीमित अनुमान से कहीं अधिक विस्तृत है। लोटा पात्र, तथा बस वाहन को सम्बोधित दो अन्य उदाहरण, जहाँ अनुस्वार हटाने पर पात्र लोटने की क्रिया बन जायेगा और वाहन निवासी हो जायेगी - 
  • लोटों, यहाँ मत लोटो (सही) तथा लोटो, यहाँ मत लोटो (भ्रामक - लोटो या मत लोटो? लोटा पात्र की जगह भूमि पर लोटने या न लोटने की दुविधा) 
  • बसों, यहाँ मत बसो (सही) तथा बसो, यहाँ मत बसो (भ्रामक - बस वाहन का ज़िक्र ही नहीं बचा, बसो या न बसो की गफ़लत अवश्य आ गई?)
  • ध्यान से सुनो लोगों, आग में लोगो नष्ट हो गया है (सही) तथा ध्यान से सुनो लोगो, आग में लोगो नष्ट हो गया है (भ्रामक - मानो बात लोगों से नहीं बल्कि उस लोगो से हो रही हो जो आग में नष्ट हो जाने के कारण बचा ही नहीं)
मेरा विचार है कि हिंदी जैसी आधुनिक भाषा में निरर्थक आग्रहों की लकीर पीटने के लिये कोई स्थान नहीं होना चाहिये। इस नाते अनुस्वार को अकारण हटाने की भ्रामक रीति को रोका जाना चाहिये। अर्थ स्पष्ट करने के लिये हिंदी वर्तने वालों को अनुस्वार हटाने जैसे करतबों के बजाय सम्बोधन के लिये अनुकूल चिह्न का सही प्रयोग सिखाया जाना चाहिये। आपका क्या विचार है?
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4 comments :

  1. सुंदर, ज्ञानवर्धक, भ्रांतियाँ मिटाता आलेख।

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  2. उपयोगी लेख ।उदाहरण सहित स्पष्ट तथ्य अच्छे लगे। सेतु का प्रकाश यूंही प्रकाशवान करते रहे। सादर वंदे।

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  3. उपयोगी लेख ।उदाहरण सहित स्पष्ट तथ्य अच्छे लगे। सेतु का प्रकाश यूंही प्रकाशवान करते रहे। सादर वंदे।

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  4. उपयोगी लेख ।उदाहरण सहित स्पष्ट तथ्य अच्छे लगे। सेतु का प्रकाश यूंही प्रकाशवान करते रहे। सादर वंदे।

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