अतिथि सम्पादकीय

डॉ. कन्हैया त्रिपाठी
प्रत्येक दिन लिखा-पढ़ा जा रहा है। नए नए अनुसंधान हो रहे हैं। जो लिखा जा रहा है उसके भी सामाजिक, सांस्कृतिक और मनुष्य केंद्रित लाभ और हानि के बारे में अनुसंधान हो रहे हैं। यह एक अनवरत प्रक्रिया है जो चलती रहेगी लिखने और पढ़ने की। परंतु, जैसे अनवरत अनुसंधान किसी नए सम्भवनाओं के लिए आवश्यक होता है वैसे ही उसका दस्तावेज़ीकरण भी आवश्यक है। सेतु द्विभाषी पत्रिका केवल कुछ विचारों का संग्रह नहीं है अपितु वर्षों से चल रहे विमर्श और अनुसंधान के लिए एक समृद्ध वैचारिक सेतु है जिससे आने वाली पीढ़ियाँ बहुत कुछ सीखेंगी और अनुसंधान करके आने वाली पीढ़ी के लिए नए अवसर उपलब्ध करायेंगी।

सेतु के आज़ लाखों पाठक हैं और इसे प्रत्येक दिन बहुत से माध्यमों से लोग देख रहे हैं, पढ़ रहे हैं। इसका हर अंक कुछ नया लेकर आता है।

नयी सामग्री केवल पठनीय नहीं होतीं अपितु संग्रहणीय भी होती हैं। इसका संपादन करना मेरे लिए गौरव की बात है। मैं अपने श्रेष्ठ आदरणीय अनुराग शर्मा जी का कृतज्ञ हूँ कि उन्होंने यह जिम्मेदारी सौंपी। श्री अनुराग जी अनुशासनप्रिय व्यक्ति हैं और यह चाहते हैं कि हम जो भी प्रकाशित करें पाठक उसका अध्ययन कर कुछ सीखें। इसलिए भाषाई दृष्टि से अगर कोई त्रुटि हुई तो वे टोक देते हैं। यह एक खूबसूरत और ईमानदार संपादक की खूबी होती है।

इस बीच दुनिया भर में कई घटनाएँ घटीं। विचलित करने वाली घटनाएँ थीं। मनुष्यता को विचलित करने वाली घटनाओं में आज गरीबी, भुखमरी और अज्ञान नहीं हैं लेकिन आतंकवाद, संघर्ष और युद्ध अवश्य ऐसी घटनाओं में शामिल हैं जिनसे प्रभावित पूरी सभ्यता होती है भले हम उसे एक बाउंड्री में समेटकर देखते हों। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव इसका सबसे ज्वलंत प्रमाण है। युद्ध किसी भी दशा में चिंताजनक है। शांति ही एक मात्र विकल्प है युद्ध रोकने का। समझदारी से शांति के विकल्प चुनने वाले वास्तविक मनुष्य के हितकारी हैं। जो भी हो पूरी दुनिया में युद्ध के लिए मचाये गए शोर से थोड़ा राहत मिल गई, यह बड़ी बात है।

सेतु के इस अंक में जिन सर्जकों ने अपनी रचना हमें भेजी वे इस अंक में प्रकाशित किए गए हैं। कविता, कहानी, लघु कथा, अनुवाद, आलेख और अन्य विधाओं में जो सामाग्री हमें मिली वह संपादित की गईं और पठनीय भी बनाई गईं। हम अपने लेखकों, कवियों और सृजनकर्ताओं का सम्मान करते हैं पर साथ ही यह अनुरोध भी करते हैं कि यदि आप लिखना चाहते हैं तो पढ़ें ज़रूर। पाठ के अभाव में आप सही रचना नहीं दे पाते हैं, यह बड़ी कमी है। इस अंक के सभी रचनाकारों और स्थाई स्तम्भ लेखकों के हार्दिक सहयोग के लिये मैं धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ। अपने प्रधान संपादक श्री अनुराग शर्मा जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए मैं यह अंक आप सबको समर्पित करता हूँ।

वैसे समाज साहित्य का क्षितिज बहुत विस्तृत है, उम्मीद करता हूँ कि आपको यह अंक पसंद आएगा।

सादर,

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