अनुवाद: एलिसिओ दिएगो की स्पेनिश कविताएँ

अनुवाद: संजय मनहरण सिंह


1. अंतिम इच्छा

समय के आगमन पर
धुँधली छाया अधिक सांत्वना नहीं देती मुझे
और वे कम करती हैं छोटे सकूनों को
इस समय के आगमन पर

और जैसे द्रव हो काफी का
खुलता ठीक अभी मेरे लिए
उसके पास तीखे मुख
इस समय के आगमन पर

और छूटी सभी उम्मीदें
कुछ योग्य स्तर
देखा अंधेरे का शांत बहाव
और अधिक नहीं बढ़ता सुख इस समय
अधिक नहीं बढ़ता सुख, अंत में
रातों की मेरी स्मृतियाँ
और उसकी विशाल चमकीली उत्तमता

अधिक नहीं बढ़ता सुख
मेरी स्मृति के आकाश और धरती के बीच
जो इस समय है
निश्चित मेरी अंतिम इच्छा के सृजन में

यह है यह
उसका तीखा स्वाद
समय, हर समय


2. कहने जा रहा हूँ नाम तमाम चीज़ों के

कहने जा रहा हूँ नाम तमाम चीज़ों के
ऊँची प्रतिध्वनियाँ
जिसे देखते हैं वायु के उत्सव
विशाल गलियाँ, छाया और शांति के बंद परदे

और पवित्र के भीतर धुँधली छाया
जो पनपता है धूलभरे कारोबार में
मनुष्य की लकड़ी
मेरी देह की रातमयी लकड़ी
जब मैं सोता हूँ

और गाँव के ग़रीब,
और धूल
जिसमें मेरे पिता के पदचिन्हों की इच्छा जागती है
निश्चित प्रशंसा की जगहें और साफ
छाया की नग्नता, हमेशा समान

बिना भूले खुले आकाश में दूर के सूर्य की
ताप की संवेदना
ना बारिश के खुशगवार संस्कार में
बाग के विनम्र कप में

ना आश्चर्यजनक दीवार पर, दोपहर
द्रव और अंतहीन नीले में

ग्रीष्म की गतिहीन दृष्टि के साथ
मेरा प्रेम जानेगा रास्तों के बारे में
जहाँ से भागते हैं उत्सुक रविवार
और वे लौटते हैं सोमवार, निरूत्साहित

और मैं नाम लूँगा तमाम चीज़ों के
बहुत धीरे
जहाँ खो गया मेरी गली का स्वर्ग
और मुझे भूल गये मेरे लौटे हुए स्वप्न
भोर होेते ही जिसे मैं झट से पुकार सकूँगा


3. संस्करण

मृत है यह छोटी जार
हाथ में रंगीन फूलों के साथ
जो तमाम चीज़ों और जो कभी देखने को नहीं रूकता
मृत है यह छोटा पशु, जिसने आँगन को पार किया
और जो हमारे भ्रम को देता है सांत्वना
महसूस करता हूँ तुरंत
कि यह घर की अकेली बिल्ली
परम्परा की बिल्ली
बिल्ली जिसने अभी पार किया
और जिसे हम देख नहीं पायेंगे
मृत है यह मित्र
जो दिखता है परिवार के फोटोग्राफ में
चालाकी से भरा एक पक्ष
और जिसे ना कोई सही पाता
ना ही पहचान पाता
संक्षिप्त में
दीवार पर बना धब्बा मृत है
जिसे पहले ही हमने देख लिया
बिना उसे जाने
थोडे़ भय के साथ


4. शांति

यह शांति, सफेद, असीमित,
यह शांति शांत समुद्र की, अचल
जो जल्द ही
टूट जाता घोंघे की रोशनी
वायु की धड़कन में
जिसका होता विस्तार देर रात
फैलता
शायद अग्नि के पत्थरों के लिए
अनंत निर्जन समुद्र तट
प्रवृति जो समाप्त नहीं होती
संभवतः यह शांति

कभी नहीं?

5.

गीत उन सब के लिए जो तुम हो

आज खुश्बू अकेली नहीं तुम्हारे होंठो की, जिसे मैं प्यार करता हूँ
बिना धुँधली बच्ची जो देखती सीधे दुनिया की विशालता
उत्साहित और प्यार करता हूँ चकित धुँधलका
जो मेरी स्मृति के भीतर समय
जो शीत का आश्रय
तुम्हारी विशालता, उड़ान तुम्हारे समय की
प्यार करता हूँ तुम्हारे हजार पूर्ण चित्रों को
जैसे झुंड हो क्रूर पंछियों का
तुम अकेली नहीं सुख के संक्षिप्त रविवार में
अलावा इसके एक दुखद शुक्रवार,
जिसे तुम जानती हो और विजय और गौरव का शनिवार
जिसे मैं कभी नहीं देखूँगा किन्तु प्रशंसा करता हूँ
छोटी बच्ची और लड़की और युवा स्त्री
तुम पूर्णतः भर देती हो मेरा हृदय
और शांति में उन्हें प्यार करता हूँ

6. ज्यादा नहीं

अंधेरे जंगल में
एक कविता ज्यादा नहीं
जो बूढे़ भट्टी की धुंधलके छाया में एक संवाद है
जब सभी चले जाते, घने जंगल के भीतर, एक कविता

ज्यादा नहीं है जो शब्द
जो प्रिय हैं, और समय के साथ जगह बदलते
और ये ज्यादा नहीं जो एक धब्बा, एक अकथनीय उम्मीद
एक कविता ज्यादा नहीं
जो भाग्य, जो धुंधलके छाया में एक संवाद है
जो सब जितना गया
शांति है

एलिसिओ दिएगो (1920-1996)
कवि और लेखक एलिसिओ दिएगो का जन्म 02 जुलाई 1920 को हवाना में हुआ। अल्पायु में ही अपने परिवार के साथ फ्रांस की यात्रा की, इस दौरान अर्जित अनुभव ने उनकी कविता को प्रभावित किया। शुरूआत में बालकथाएं लिखीं। अन्य लेखक/कवियों के साथ मिलकर पत्रिका के संस्थापक के रूप में कार्य किया। उन्होंने दुनिया के बाल साहित्य में अनुवाद के महत्व को पहचाना और कार्य किया। यूनिओन दे एसक्रितोरेस इ आरतिस्तास दे कूबा (यूएनइएसी) की पत्रिका का संपादन भी किया। वर्ष 1966 में एल आस्कूरो एसप्लेन्दोर (अद्भुत अंधकार) का प्रकाशन हुआ। वर्ष 1986 में एलिसिओ दिएगो को उनके कार्य के लिए नासिओनाल दे लितेरातुरा पुरस्कार प्राप्त हुआ। वर्ष 1988 व 1989 में लगातार आलोचना का पुरस्कार प्राप्त हुआ। 1 मार्च 1996 को मैक्सिको में उनका देहांत हुआ। उनका पार्थिव शरीर क्यूबा लाया गया जहाँ उन्हें दफ़नाया गया।

संजय मनहरण सिंह
जन्म: 28 दिसंबर 1970
शिक्षा: बी. एस. सी., एम. ए. (ग्राम विकास)
संप्रति: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में कार्यरत।

अन्य: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कवितायें तथा कहानियाँ प्रकाशित
     कथादेश-अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता 2008 में सांत्वना पुरस्कार
     विपाशा-अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता 2009 में प्रथम पुरस्कार

संपर्क: मकान संख्या सी 6, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय परिसर, वर्धा 442001
मोबाइल: +91 937 396 1230; ईमेल: perjs@rediff.com 

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